भारतीय नौसेना के समुद्री फाइटर जेट मिग-29के को उत्तरी सेक्टर में तैनात करने का फैसला
भारत सीमा पर लगातार अपनी क्षमताएं बढ़ा रहा है। अब भारतीय नौसेना के समुद्री फाइटर जेट मिग-29के (MiG-29K) को उत्तरी सेक्टर में तैनात करने का फैसला लिया गया है। नौसेना के पी-82 निगरानी विमान पहले ही पूर्वी लद्दाख सेक्टर में तैनात किए जा चुके हैं।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने कहा, ‘मिग-29के फाइटर एयरक्राफ्ट को उत्तरी सेक्टर में भारतीय नौसेना के बेस पर तैनात करने की योजना बनाई जा रही है। इनका इस्तेमाल पूर्वी लद्दाख सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अभियानों को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है।’
भारतीय नौसेना के बेड़े में 40 से ज्यादा मिग-29के फाइटर जेट हैं जिन्हें एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य पर तैनात किया गया है। भारत ने रूस से ये विमान करीब एक दशक पहले खरीदे थे। इनकी एयर फोर्स बेस पर तैनाती के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मौदी के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।
डोकलाम विवाद के जौरान इन निगरानी विमानों का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया था। भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के बीच भारतीय नौसेना अहम भूमिका निभा रही है। नौसेना के विमानों का एलएसी पर चीनी गतिविधियों और उनकी स्थिति पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
चीन से लगी सीमा पर टकराव के बीच भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के एक बेड़े ने परमाणु क्षमता से लैस यूएसएस निमित्ज की अगुवाई में अमेरिकी नौसेना के एक समूह के साथ अंडमान निकोबार द्वीप समूह तट के पास सोमवार को सैन्य अभ्यास किया। नौसेना के चार अग्रणी युद्धपोतों ने ‘पासेक्स’ अभ्यास में भागीदारी की।
यह कवायद ऐसे वक्त हुई जब अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप दक्षिण चीन सागर से हिंद महासागर क्षेत्र से गुजर रहा था। इस अभ्यास की अहमियत इसके समय की वजह से बढ़ गई है। यह ऐसे वक्त हुआ है जब पूर्वी लद्दाख और दक्षिण चीन सागर में चीन की सेना आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
भारत ने पिछले महीने जापान की नौसेना के साथ भी इसी तरह का अभ्यास किया था। पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ने के बाद सरकार ने सेना के तीनों अंगों को हाई अलर्ट पर रखा है। नौसेना को हिंद महासागर के उन क्षेत्रों में चौकसी बढ़ाने को कहा गया है जहां चीनी नौसेना से अक्सर उसका सामना होता है।
भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के बीच डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने भारतीय सेना को स्वदेश में विकसित ‘भारत’ ड्रोन उपलब्ध कराए हैं। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर ये ड्रोन अधिक ऊंचाई वाले इलाकों और पर्वतीय क्षेत्रों में सटीक निगरानी सुनिश्चित करेंगे।

