बीजिंग परमाणु सबमरीन, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस और इलेक्ट्रोनिक युद्ध के लिए क्षमताओं को बढ़ाने में जुटा-पेंटागन
चीन लगातार गुपचुप तरीके से हथियारों का निर्माण करता रहा है, ताकि अपनी सेना के साथ-साथ अपनी विस्तारवादी नीति को मजबूत कर सके।
चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है और उसकी निगाह भारत-प्रशांत क्षेत्र में अपने सैन्य ठिकाने बनाने की है। इसके अलावा, चीन अगले दशक तक अपने परमाणु हथियारों को दोगुना करने पर भी काम कर रहा है।
मंगलवार को अमेरिकी कांग्रेस को पेंटागन ने एक रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में कहा गया, चीन की बढ़ती सैन्य ताकत को लेकर किए गए मूल्यांकन में सामने आया है कि बीजिंग लंबी दूरी तक हमला करने वाली मिसाइलों, परमाणु सबमरीन, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस और अंतरिक्ष और इलेक्ट्रोनिक युद्ध के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाने में जुटा हुआ है।
चीन की इस तरह की चाल को लेकर भारत को खासा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि बीजिंग हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में अपनी नौसेना का विस्तार करना चाहता है, जिससे भारत के साथ तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
गौरतलब है कि चीन ने 2017 में हॉर्न ऑफ अफ्रीका में जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य बेस तैयार किया था। इसके अलावा उसकी पाकिस्तान के कराची और ग्वादर बंदरगाह पर पहले से मौजूदगी है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए भारत की चिंताएं बढ़ सकती है।
पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है, चीन सक्रिय रूप से म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, श्रीलंका, यूएई, केन्या, सेशेल्स, तंजानिया, अंगोला और तजाकिस्तान में मिलिट्री लॉजिस्टिक्स सुविधाएं स्थापित करने पर विचार कर रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया, चीन के पास 350 के करीब युद्धपोत और पनडुब्बी हैं। इस तरह चीन ने अमेरिकी नौसेना के 293 युद्धपोतों के बेड़े को भी पीछे छोड़ दिया है।

