पैरोल पर छूटे लापता 23 सजायाफ्ता कैदियों के घर दस्तक देगी यूपी पुलिस
कोरोना संकट के मद्देनजर आठ सप्ताह के पैरोल पर रिहा हुए 26 कैदियों में से 23 ने अभी तक जेल में अपनी आमद नहीं कराई है। अब संबंधित थानों की पुलिस उन कैदियों के घर जाएगी।
पुलिस घरवालों से कैदी के बारे में जानकारी लेगी कि वह इस समय कहां है, और पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद नोटिस मिलने पर जेल क्यों नहीं लौटे?
अगर उन कैदियों का कुछ पता नहीं चला और घरवालों ने उनके बारे में अनभिज्ञता जताई, या फिर तय समय पर वापस लौटने का उचित कारण नहीं बताया तो जेल प्रशासन उन कैदियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कराएगी। साथ ही उनके जेल आने के बाद दोबारा पैरोल भी नहीं मिलेगा।
कोरोना संकट को देखते हुए अप्रैल, मई व जून माह में कोर्ट के आदेश व डीजी जेल आनंद कुमार के निर्देश पर जेल प्रशासन ने सात साल या कम की सजा पाए 26 कैदियों को आठ हफ्ते के पैरोल पर रिहा किया था। जिसे बाद में एक बार फिर आठ हफ्ते के लिए बढ़ा दिया गया था। कुछ दिन पहले ही जेल प्रशासन ने शासन के निर्देश पर इनकी पैरोल अवधि आगे नहीं बढ़ाई।
नोटिस भेजकर सभी कैदियों को जेल वापस आने को कहा। लेकिन तय समय सीमा में केवल तीन ही कैदी वापस आए। जेल अधिकारियों ने इसकी जानकारी पत्र के माध्यम से डीएम, एसएसपी व संबंधित थाने को दी है।
जेल सूत्रों के अनुसार इन्हें विलंब से आने का एक मौका दिया जाएगा। पुलिस इनके घर जाएगी। इनके बारे में पूरी जानकारी लेगी कि ये कहां है और क्यों नहीं लौटे। कोई जानकारी न मिलने या परिजनों के इनके बारे में अनभिज्ञता जताने पर इनके खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा।
जेल सूत्रों के अनुसार इन कैदियों को जेल में लौटने के बाद पैरोल के दौरान बाहर बिताई गई अवधि के बराबर अवधि जेल में बीतानी होगी, जोकि सजा के अतिरिक्त होगी।
साथ ही लापता कैदी जितने दिन विलंब से लौटेंगे, उतने दिन की भी अवधि जेल में अतिरिक्त बीतानी होगी। यह पैरोल का नियम है।
जैसे अगर किसी कैदी को सात साल के कारावास की सजा मिली, वह चार साल कैद पूरा कर चुका है और आठ हफ्ते के पैरोल पर गया था। अब समय से जेल लौटने पर निर्धारित सजा के अलावा आठ हफ्ता और जेल में बीतानी पड़ेगी।
वहीं लापता कैदी अगर लौटते हैं तो लौटने के समय से जितने दिन बाद वह आए हैं, उन्हें विलंब का दिन माना जाएगा। उन्हें बाकी की सजा के अलावा आठ हफ्ते बाहर बीताए गए पैरोल की अवधि तथा विलंब के दिन अतिरिक्त काटनी होगी।
पैरोल पर छूटे कैदी गोरखपुुर के विभिन्न थाना क्षेत्रों के अलावा जौनपुर, चित्रकूट, संतकबीरनगर, अररिया, महराजगंज, बलरामपुर, पश्चिमी चंपारण, बिहार, सीवान, बेतिया, दिल्ली, गोंडा आदि जगहों के हैं।
जेल में सात साल या उससे कम की सजा के आरोप में बंद करीब 300 विचाराधीन बंदी भी आठ हफ्ते की अंतरिम जमानत पर रिहा हुए थे। अब इन्हें भी कोरोना काल का लाभ मिल गया है।
इनमें से अधिकांश बंदियों ने कोर्ट के समक्ष पत्र देकर स्थायी जमानत ले ली है या फिर कुछ समय के लिए और अंतरिम जमानत ले ली है।

