UPPCL अधिकारी मात्र वीडियो कांफ्रेसिंग में व्यस्त: अब ना जाने कब होगा फरियादियों का काम

लखनऊ – उ प्र पावर कार्पोरेशन के सभी डिस्कमो के कार्यालय के खुलने की शुरुआत ही VC नाम के मंत्र से होती है जिसके शुरू होने का समय तो निर्धारित है परन्तु समाप्त होने का कोई समय निश्चित नही होता

वैसे प्रदेश सरकार के लगभग सभी विभागों में कोविड 19 के संक्रमण के बाद वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से लगभग सभी बैठके और आवश्यक निर्देश देने की परम्परा सुरक्षा की दृष्टि से लागू कर दिये गये है

पर विद्युत विभाग इस व्यवस्था में सबसे ऊपर और सबसे ज्यादा वीडियो कांफ्रेसिंग करने वाले विभाग की श्रेणी में गिना जा सकता है पूर्व की प्रबंध निदेशिका यानि की विधि विषेशज्ञा महोदया और पूर्व के सबसे बडे बडका बाबूजी ने यह परम्परा शुरू की गयी

इसी के बहाने कई बिना जरूरत के कम्प्यूटर साफ्टवेयर और मोबाइल एप बनवाने का एक बडा घोटाला भी हुआ खैर अब आगे ।

उ प्र में सबसे ज्यादा कही ऐप खरीद घोटाले हुआ है तो वह UPPCL
जिस प्रकार उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति बिजली घरों से देने की व्यवस्था है ठीक उसी प्रकार मानो विभागीय मुख्यालयों में सारे काम इन दिनों वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से होने शुरू हो गये है

वैसे यह विभाग प्रदेश के सभी जनपदीय उपभोक्ताओं के सुविधा के लिये बनाया गया है पर यहाँ के अधिकारी एक मात्र वीडियो कांफ्रेसिंग में व्यस्त नजर आते है और बचे हुए समय मे उसकी तैयारी मे लगे रहते है

सूत्र बताते हैं कि यहा सुबह के कार्यालय खुलने के साथ ही प्रति दिन सभी डिस्कमो मे प्रबंधनिदेशक से लेकर सभी निदेशक UPPCL के प्रबंध निदेशक की वीडियो कांफ्रेसिंग में व्यस्त नजर आते है

और यह VC प्रतिदिन प्रातः10 बजे से शुरू होकर लगभग 2 बजे तक चलकर समाप्त होती है उस वक्त इन विभागीय कार्यालयों में प्रदेश की गरीब जनता अपनी फरियाद लेकर आई हुई होती है फरियादी अपने बारी की प्रतीक्षा मे सुबह से लेकर शाम तक अपनी बारी की प्रतीक्षा करते नजर आते है क्योंकि सारे ही साहब छोटे से लेकर बडे तक VC में है ।

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एक तरफ उ प्र सरकार द्वरा प्रदेश के सभी कार्यालयों में फरियादियों से मिलने के समय का निर्धारण तय है जिसमे प्रातः10 बजे से 12 बजे तक का समय सभी कार्यालयों में फरियादियों से मिलने के लिये निर्धारित है परन्तु विद्युत विभाग उस समय को अपने बडकाबाबूओ की वीडियो कांफ्रेसिंग में गुजार देता है

शायद यही कारण है विभाग में भ्रष्टाचार , घाटे में पहुचने और जनता की शिकायतों को नजर अंदाज करने में काफी कारगर होती नजर आ रही है ।

वैसे यह विडियो कान्फ्रेंसिंग है बडी काम की चीज क्यो कि इसी बहाने से सभी बडे से ले कर छोटे अधिकारी जहाँ से चाहे जुड कर अपनी सफाई पेश कर सकते है और फिर अपने अधीनस्थ कर्मचारियो को इस विडिओ कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से मिला ज्ञान की घुट्टी को बाटने मे लग जाते है कौन जाने विभागीय नियम

यहाँ पाठको को बताना जरूरी है कि यह सारे वितरण निगम स्वयत संस्थान है और उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन का मुख्यालय शक्तिभवन इनमे मात्र समन्वय स्थापित करने वाली संस्था है परन्तु बिल्ली के गले मे घण्टी बाधे कौन यहा तो बस सब लगे है

भेड चाल मे वो मेमोरेडम कहा गया जिसमे यह सब नियमावली लिखी है क्या कोई अधिकारी कर्मचारी ने उस मात्र 29 पेज की नियमावली या मेमोरेडम आफ आर्टिकल/ उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन का कार्यालय ज्ञापन को पढने का कष्ट भी किया है

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शायद नही बस सब लगे है मक्खन हाथो मे ले कर बडकाबाबूओ की फौज को लगाने और उनके वैध/अवैध बे- सर पैर के आदेशो का पालन करने मे लग जाते है उस आदेश से भले ही उससे माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना ही क्यो ना हो रही हो ।

यही कारण है जो यह सोने की चमक बिखेरने वाला अधेरे को उजाले से दमकाने वाला यह सस्थान आज इन्ही नातजुर्बेकार बडका बाबूओ और इनके मख्खन लगने वाले व चहेतो लोगो के कारण ही बर्बाद हो रहा है।

खबर इंटरनेट एवं अन्य सूत्रो से प्राप्त जानकारी पर आधारित

News Desk

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