यूपी में एमएलसी चुनाव: मुलायम के करीबी अहमद हसन और राजेंद्र चौधरी ने नामांकन दाखिल किया; अखिलेश यादव ने कहा- दोनों नेता जीतेंगे
इस दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद थे। अखिलेश ने भरोसा जताया है कि उनके दोनों प्रत्याशी चुनाव जीतकर विधान परिषद सदस्य पहुंचेंगे।
हालांकि वे इस दौरान भाजपा सरकार पर निशाना साधना नहीं भूले। पूछा कि देश की सरकार प्रदेश की सरकार बताए कि जनता को फ्री वैक्सीन कब मिलेगी?
वहीं सपा एक सीट पर आसानी से चुनाव जीत सकती है। लेकिन सपा ने दो उम्मीदवार उतारे हैं। एक सीट को जिताने के लिए 31 विधायकों की जरूरत पड़ेगी।
वर्तमान में सपा के पास 49 विधायक हैं। इनमें नितिन अग्रवाल बागी हैं। शिवपाल यादव अपनी अलग पार्टी बना चुके हैं। ऐसे में सपा की संख्या 47 हो जाती है।
31 वोट के बाद 16 विधायक ही बचते हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि विपक्षी दल के विधायक सपा की मदद कर सकते हैं।
IPS की नौकरी से सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और सपा का दामन थामा था। इसके बाद से ही विधान परिषद के सदस्य हैं। मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। इतना ही नहीं वो सपा में मुस्लिम समुदाय का OBC चेहरा माने जाते हैं। अहमद हसन UP में मुसलमानों की सबसे बड़ी आबादी अंसारी (जुलाहा) समुदाय से आते हैं।
हालांकि 1977 में वो उसी सीट से जीत दर्ज करके विधानसभा पहुंचे। इस दौरान मुलायम सिंह यादव सहकारिता मंत्री थे। यहीं से दोनों नेता करीब आए, तब से लेकर राजेंद्र चौधरी और मुलायम सिंह यादव का रिश्ता अटूट रहा।
लोकदल का बंटवारा हुआ तो ज्यादातर जाट नेता अजित सिंह के साथ चले गए, लेकिन राजेंद्र चौधरी ने मुलायम सिंह यादव का साथ नहीं छोड़ा।
2012 में जब अखिलेश यादव सूबे के सीएम बने, तो भी राजेंद्र चौधरी उनके साथ साए की तरह दिखते रहे। लंबे वक्त तक राजेंद्र चौधरी ने सपा के प्रवक्ता के तौर पर काम किया।

