वैश्विक

हिंदू से मुस्लिम बने युवक-युवतियों का निकाह कराएंगे मौलाना Tauqeer Raza Khan, हिंदू नेताओं ने किया विरोध

 इत्तेहाद ए मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) ने इस्लाम अपनाने वाले दूसरे धर्म के युवक-युवतियों के सामूहिक निकाह के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी है, जिसका हिंदू नेताओं ने विरोध किया है. इस बीच, पुलिस का दावा है कि बिना जिला प्रशासन की अनुमति के यदि किसी ने कोई कार्यक्रम आयोजित किया और किसी ने माहौल खराब करने की कोशिश की तो सख्त विधिक कार्रवाई होगी. वहीं संभल के एक मुस्लिम धर्मगुरु ने आईएमसी के धर्म परिवर्तन के लिए कार्यक्रम आयोजित करने को शरीयत के खिलाफ करार दिया है.

आईएमसी प्रमुख मौलाना Tauqeer Raza Khan  ने सोमवार की शाम मीडिया से बातचीत में कहा, हिंदू से मुस्लिम बने युवक-युवतियों का निकाह कराएंगे और पहले चरण में पांच जोड़ों का निकाह होगा, जिसमें युवक एवं युवतियां धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी कर एक-दूसरे का दामन थामेंगे. मौलाना ने कहा, सामूहिक निकाह समारोह 21 जुलाई को सुबह 11 बजे खलील हायर सेकेंडरी स्कूल में होगा.

इसके लिए प्रशासन से भी अनुमति मांगी है. मौलाना तौकीर का दावा है कि उनके पास निकाह के लिए धर्म परिवर्तन करने वाले करीब 23 युवक-युवतियों के आवेदन आ चुके हैं. इनमें आठ लड़के और 15 लड़कियां शामिल हैं, इन्होंने अपने रिश्ते पहले से तय किए हुए हैं.

सिटी मजिस्ट्रेट को आवेदन

बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा, सिटी मजिस्ट्रेट को एक आवेदन दिया गया था और इसकी स्थानीय पुलिस और एलआई (स्थानीय खुफिया) द्वारा जांच की जा रही है. जांच के बाद एक रिपोर्ट दर्ज की जाएगी. बरेली पुलिस सभी स्थानीय लोगों को आश्वस्त करती है कि किसी को भी शहर और जिले की कानून-व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. अगर कोई ऐसा प्रयास करता है, तो पुलिस उससे सख्ती से निपटेगी. जिले में बिना अनुमति के कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं होने दिया जाएगा.

शिरडी साइन सर्व देव मंदिर के महंत पंडित सुशील पाठक ने कहा कि सावन के पवित्र माह में मौलाना का ऐलान कहीं ना कहीं शांति भंग करने की एक साजिश है. उन्होंने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री से मौलाना तौकीर के आयोजन को अनुमति न देने की मांग की है.

बीजेपी नेता प्रेम शुक्ला ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा, मौलाना तौकीर रजा के सामूहिक लव जिहाद के ऐलान पर INDI गठबंधन के सभी सदस्य चुप हैं. निश्चित रूप से सरकार ऐसे मौलानाओं के खिलाफ कार्रवाई करेगी. उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ मौलाना की एक तस्वीर दिखाकर कांग्रेस पर निशाना साधा. बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, मौलाना तौकीर रजा जानबूझकर विवादित बयान देकर चर्चा में आने की कोशिश करते रहते हैं और वे फिर से इसी तरह की कोशिश कर रहे हैं. धर्म परिवर्तन का यह प्रयास घृणित है और सरकार इस तरह के किसी भी प्रयास पर अवश्य रोक लगाएगी.

भारत में धार्मिक एकता और समरसता की भावना सदैव मजबूती से जुड़ी रही है, लेकिन हाल ही में एक विवाद उठा है जिसने समाज की धार्मिक समृद्धि और सहमति को चुनौती देने का सामना किया है। इस मुद्दे का मुख्य केंद्रबिंदु है इत्तेहाद ए मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) द्वारा आयोजित किए जाने वाले समूहिक निकाह समारोह के प्रस्तावित आयोजन के खिलाफ उठाए गए विरोध।

समूहिक निकाह समारोह का ऐलान

आईएमसी ने हाल ही में एक समूहिक निकाह समारोह का ऐलान किया, जिसमें धर्म परिवर्तन करने वाले युवक-युवतियों के बीच निकाह का आयोजन किया जाना है। इसके विरोध में हिंदू समाज के नेताओं ने आवाज उठाई है और इसे धर्मांतरण की चाल माना है। पुलिस विभाग ने भी इस मामले में कार्रवाई करने का दावा किया है और अगर कोई ऐसा कार्यक्रम अनुमति के बिना आयोजित करता है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस मुद्दे का समाज पर व्यापक प्रभाव होने की संभावना है। धार्मिक और सामाजिक समृद्धि में विभाजन उत्पन्न हो सकता है और लोगों के बीच आपसी विश्वास और समझौते को खतरा पहुंच सकता है। इसे विभाजन और असन्तोष के रूप में भी देखा जा सकता है, जो हमारे समाज के एकता और समरसता के विरुद्ध है।

इस मामले में धार्मिक गुरुओं और सामाजिक नेताओं के बीच भी विवाद बढ़ गया है। कुछ धार्मिक गुरुओं ने इसे शरीयत के खिलाफ माना है और इस प्रक्रिया को खतरनाक माना है, जबकि अन्य इसे धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्रता का मुद्दा मानते हैं।

इसी के साथ, राजनीतिक दलों के बीच भी विवाद उभरा है। एक दल ने इसे ‘लव जिहाद’ का मामला बताया है और सरकार से कठोर कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय का प्रश्न उठाया है।

इस मामले में सामाजिक और नैतिक मामलों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत न्याय के मामले में लोगों के मूल अधिकारों का पालन करना चाहिए, लेकिन इसे किसी भी समाज की स्वाभाविक सीमाओं के बाहर नहीं ले जाना चाहिए।

इस प्रकार, धार्मिक समूहिक निकाह के मामले में उठे गए सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए, समाज को एकता और समरसता की दिशा में अग्रसर रहना चाहिए। इस मुद्दे पर सख्ती से वि

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