उत्तर प्रदेश

आयकर विभाग ने संतों को भेजे नोटिस, खुद पेश होने को कहा, संतों ने बताया सनातन धर्म का अपमान

वाराणसी,। तीर्थराज प्रयाग कुंभ 2019 में संत-भक्त निवास के लिए दिए गए करोड़ों रुपये के खर्च का ब्योरा न देने पर आयकर विभाग ने 13 अखाड़ों सहित 16 मठों-आश्रमों को नोटिस जारी किया है। नोटिस जारी होते ही काशी के संतों में नाराजगी बढ़ रही है।

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बता सन्तों का अपमान बताया है। इस संबंध में उन्होंने शनिवार को बताया कि वित्तमंत्री व वित्त सचिव को पत्र भी लिखा है।

उन्होंने संतों का पक्ष रखते हुए कहा कि जिन संतों, अखाड़ों और धर्माचार्यों को नोटिस जारी किया गया है। वह धन उन्हें अब तक मिला ही नहीं। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जो भी कार्य कराया गया उसमें किसी भी अखाड़ा अथवा आश्रम से जुड़े ट्रस्ट संबंधित नहीं थे।

जो भी खर्च हुआ सरकारी कार्यदायी संस्था द्वारा  हुआ। इसमें खर्च हुए धन का संतों, आश्रमों, अखाड़ों से कुछ भी लेना-देना नहीं था। न यह धन उनके खाते में आया, न उन्होंने खर्च किया।

इसके बावजूद आयकर विभाग के दो अधिकारियों ने 13 अखाड़ों एवं तीर्थराज प्रयाग के सभी प्रमुख मठ-मंदिरों को नोटिस भेजा है। संतों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। यह दुर्भावनापूर्ण ही नहीं, पूरे विश्व में सनातन धर्म के आचार्यों को अपमानित करने का षड्यंत्र है। 

स्वामी जितेन्द्रानंद ने बताया कि इस मामले में उन्होंने वित्तमंत्री व वित्त सचिव को पत्र लिखा है। यदि इस मामले में कोई कार्रवाई नही हुई तो संत समाज चुप नहीं बैठेगा।

उन्होंने बताया कि 2019 में प्रयागराज कुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश सरकार ने आने वाले तीर्थयात्रियों की मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रत्येक अखाड़ों एवं धर्माचार्यों के शिविरों में निर्माण कार्य कराने का निर्देश दिया था। ताकि संत और भक्त वहां आराम से ठहर सकें। निर्माण का सारा कार्य कार्यदायी संस्था जल निगम ने कराया था । 

News Desk

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