Chhattisgarh Murder Case: वकील अंकित उपाध्याय और पत्नी ने दोस्त को किया सूटकेस में बंद, 30 लाख के लेन-देन पर हुई हैरान कर देने वाली हत्या!
Chhattisgarh Murder Case छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। 30 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद ने एक वकील को इतना अंधा बना दिया कि उसने अपनी पत्नी और दो साथियों के साथ मिलकर एक व्यक्ति की नृशंस हत्या कर दी और शव को सूटकेस में बंद कर सुनसान इलाके में फेंक दिया।
सुनसान इलाके में मिली बदबूदार पेटी ने खोला रहस्य
23 जून को रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र के इंद्रप्रस्थ कॉलोनी के पास एक सुनसान इलाके में लोगों ने पुलिस को एक लोहे की पेटी से तेज बदबू आने की सूचना दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की, तो एक बड़े सूटकेस में बंद एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ। शव के ऊपर सीमेंट डाला गया था और दोनों पैर रस्सी से बंधे हुए थे। यह दृश्य इतना भयावह था कि आसपास के लोग भी सिहर उठे।
पुलिस ने शव को तुरंत पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और हत्या की जांच शुरू की। शव की पहचान किशोर पैकरा (58) के रूप में हुई, जो कुछ समय से लापता थे। किशोर पैकरा रायपुर के एक प्रतिष्ठित व्यापारी थे और अपने विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाते थे।
सीसीटीवी फुटेज ने खोली हत्या की परतें
जैसे ही पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की, एक चौंकाने वाला दृश्य सामने आया। फुटेज में एक कार से तीन पुरुष और एक महिला लोहे की पेटी को ले जाते हुए दिखे। इस फुटेज ने पुलिस को सीधे उस गाड़ी के मालिक तक पहुंचा दिया, जिसने बताया कि उसने कार एक महीने पहले वकील अंकित उपाध्याय को बेची थी।
दिल्ली से गिरफ्तार हुए मास्टरमाइंड वकील और पत्नी
जांच में पता चला कि जिस मकान में आरोपी रुके थे, वह इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में किराए पर लिया गया था। मकान मालिक ने बताया कि वकील अंकित उपाध्याय और उसकी पत्नी शिवानी शर्मा ने कुछ महीने पहले यह मकान किराए पर लिया था, लेकिन हत्या के बाद से दोनों फरार थे।
पुलिस ने फौरन दिल्ली एयरपोर्ट पर दोनों की तलाश शुरू की, और 23 जून को दोनों को गिरफ्तार कर रायपुर लाया गया। वहीं, उनके दो साथी – विनय यदु (23) और सूर्यकांत यदु (21) – को रायपुर से गिरफ्तार किया गया।
30 लाख की रकम बना हत्या की वजह
पुलिस की पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ। किशोर पैकरा ने वकील अंकित उपाध्याय को करीब 30 लाख रुपये उधार दिए थे। जब किशोर ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की, तो अंकित और उसकी पत्नी को यह नागवार गुजरा। दोनों ने विनय और सूर्यकांत की मदद से एक भयावह योजना बनाई – किशोर को मारकर शव को ठिकाने लगाने की।
हत्या को अंजाम देने के बाद उन्होंने शव को सूटकेस में भरकर सीमेंट से ढका और सुनसान जगह पर फेंक दिया, ताकि बदबू से लोग भ्रमित हो जाएं और पहचान न हो सके। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
कानून के शिकंजे में चारों आरोपी
फिलहाल चारों आरोपी – अंकित उपाध्याय, शिवानी शर्मा, विनय यदु और सूर्यकांत यदु – पुलिस हिरासत में हैं। उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना), 120B (षड्यंत्र रचना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस लगातार जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसमें और कोई व्यक्ति भी शामिल है।
क्या इस केस में और भी राज़ छुपे हैं?
पुलिस सूत्रों की मानें तो हत्या की योजना बेहद सुनियोजित थी। अंकित और उसकी पत्नी ने न सिर्फ किराए का मकान लिया, बल्कि कार की रजिस्ट्री और मोबाइल कॉल डिटेल्स को भी इतनी चतुराई से छुपाया कि कोई उन तक आसानी से न पहुंच सके। लेकिन सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी और पुलिस की मुस्तैदी ने उन्हें धर दबोचा।
इस केस ने छत्तीसगढ़ पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच प्रणाली की तारीफ भी बटोरी है।
हत्या के पीछे की गहराई – जब वकालत बन गई वारदात
यह मामला इसलिए भी चौंकाता है क्योंकि हत्या का मास्टरमाइंड खुद एक वकील है, जो कानून का रक्षक माना जाता है। जिस व्यक्ति को अदालतों में इंसाफ दिलाने की शपथ लेनी चाहिए, वही कानून को अपने पांव तले रौंदता दिखा। शिवानी शर्मा, जो केवल 24 साल की है, वह भी इस खौफनाक साजिश में शामिल रही।
मृतक किशोर पैकरा की पारिवारिक और सामाजिक पहचान
किशोर पैकरा अपने क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित और सम्मानित व्यक्ति थे। उनके जानने वालों का कहना है कि वे बेहद शांत स्वभाव के, मददगार और भरोसेमंद व्यक्ति थे। पैसों की जरूरत में जब अंकित ने उनसे मदद मांगी, तब उन्होंने बिना किसी कागजी प्रक्रिया के उसे 30 लाख रुपये उधार दिए। यह उनका विश्वास था – लेकिन यही विश्वास उनकी मौत का कारण बन गया।
परिवार ने मांगा न्याय, समाज में गुस्सा
मृतक के परिजनों ने आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग की है। समाज में भी इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। कई लोगों का कहना है कि पैसों के लेन-देन को लेकर हत्या जैसा कदम उठाना समाज के गिरते मूल्यों को दर्शाता है।
क्या भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सकता है?
यह मामला एक बार फिर से ये सवाल उठाता है कि क्या ऐसे वित्तीय लेन-देन को लेकर कोई कानूनी सुरक्षा दी जा सकती है जिससे इस तरह के अपराधों को रोका जा सके? क्या कर्ज देने और लेने की प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सकता है?

