Gaza में इज़राइली टैंक से होली फैमिली कैथोलिक चर्च पर हमला: विस्फोट, अफरातफरी और बेगुनाहों की मौत से कांप उठा चर्च परिसर
गुरुवार की सुबह Gaza में उस वक्त कोहराम मच गया, जब इज़राइली टैंक से निकला एक गोला सीधे ‘होली फैमिली कैथोलिक चर्च’ पर जा गिरा। यह चर्च गाजा का इकलौता कैथोलिक धार्मिक स्थल है, जो युद्ध की मार से बचने की उम्मीद लिए सैकड़ों विस्थापितों का ठिकाना बना हुआ था। इस दिल दहला देने वाले हमले में तीन बेगुनाहों की मौत हो गई और दस अन्य घायल हो गए, जिनमें चर्च के पादरी फादर गैब्रियल रोमानेली भी शामिल हैं।
नेतन्याहू का अफसोस, लेकिन क्या सिर्फ ‘गलती’ से माफ हो सकता है हमला?
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर दुख जताया और इसे एक “दुर्घटनावश हुई त्रासदी” बताया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से टेलीफोन पर बात की और स्पष्ट किया कि यह हमला इज़राइली सेना की ओर से जानबूझकर नहीं किया गया था।
नेतन्याहू ने कहा, “हर निर्दोष की जान का जाना एक असहनीय क्षति है। हमारी कोशिश है कि नागरिकों और धार्मिक स्थलों को हर संभव सुरक्षा दी जाए।”
इज़राइली डिफेंस फोर्स (IDF) का भी यही दावा है कि यह एक “गलत दिशा में दागे गए गोले का परिणाम” था, जो सैन्य कार्रवाई के दौरान असावधानी से चर्च परिसर में जा गिरा।
600 लोगों की जान को खतरा: चर्च बना युद्ध का मैदान
‘होली फैमिली कैथोलिक चर्च‘ गाजा में शांति और सुरक्षा की उम्मीद का अंतिम केंद्र बन गया था, जहां लगभग 600 शरणार्थियों ने छिपकर जान बचाने की कोशिश की थी। चर्च के शांत परिसर को अचानक एक युद्ध क्षेत्र में तब्दील होते देखना, किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था।
चश्मदीदों का कहना है कि गोला गिरने के बाद भारी विस्फोट हुआ, जिसके चलते चर्च की दीवारें हिल गईं और कांच के टुकड़े चारों तरफ बिखर गए। मासूम बच्चे चीखने लगे, और घायल लोग दर्द से कराहने लगे।
कैथोलिक समुदाय का आक्रोश: जानबूझ कर किया गया हमला?
‘लैटिन पैट्रिआर्केट ऑफ जेरूसलम‘ के वरिष्ठ कार्डिनल पियेरबातिस्ता पिज्जाबाला ने इस हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं थी, बल्कि एक “जानबूझकर किया गया सैन्य हमला” हो सकता है।
उन्होंने कहा, “हमारे पास पक्के सबूत हैं कि टैंक ने टारगेट कर चर्च को निशाना बनाया। IDF का दावा अपनी छवि को बचाने के लिए है।” उन्होंने यह भी बताया कि पादरी फादर गैब्रियल रोमानेली गंभीर रूप से घायल हैं और उन्हें चिकित्सकीय मदद की सख्त जरूरत है।
इटली और वेटिकन की तीखी प्रतिक्रिया: ‘अब और नहीं!’
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस हमले को “नृशंस और अस्वीकार्य” बताते हुए इज़राइल को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा:
“गाजा में इज़राइली हमले अब आम नागरिकों को भी नहीं बख्श रहे। कैथोलिक चर्च पर हमला मानवीय गरिमा पर सीधा प्रहार है। कोई भी सैन्य उद्देश्य इस तरह के क्रूर कृत्य को न्यायोचित नहीं ठहरा सकता।”
वेटिकन से भी इस त्रासदी पर गहरा शोक जताया गया है। पोप लियो XIV ने अपने संदेश में मृतकों की आत्मा की शांति और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की। उन्होंने यह भी दोहराया कि धार्मिक स्थलों को हर हाल में युद्ध से अलग रखना चाहिए।
गाजा की एकमात्र आशा पर पड़ा बम का साया
गाजा में केवल 1,000 के करीब ईसाई समुदाय है, जिनके लिए होली फैमिली कैथोलिक चर्च सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि जीवन की आशा का केंद्र है। यही वजह है कि खुद पोप फ्रांसिस भी चर्च के पादरी और वहां मौजूद लोगों से समय-समय पर संपर्क में रहते थे।
युद्ध से घिरे इस इलाके में यह चर्च लगातार मानवीय सहायता और सांत्वना का प्रतीक बना रहा। लेकिन अब वह भी बारूद और तबाही की चपेट में है।
इज़राइली सेना की कथनी और करनी में अंतर?
IDF द्वारा जांच की बात कही जा रही है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि यह केवल एक औपचारिकता है। पिछले कुछ महीनों में गाजा में हुई नागरिक मौतों और धार्मिक स्थलों पर हमलों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
क्या इज़राइल अपनी कार्रवाईयों की सीमाएं लांघ रहा है? क्या अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन वास्तव में हो रहा है, या यह सब केवल कागज़ों तक सीमित है?
गाजा के नागरिकों की पुकार: “हम सिर्फ जीना चाहते हैं”
गाजा में विस्थापितों के लिए अब विकल्प सीमित होते जा रहे हैं। स्कूल, अस्पताल और धार्मिक स्थल— सभी कहीं न कहीं इस युद्ध की चपेट में आ चुके हैं।
एक महिला विस्थापित ने कहा, “हम ईश्वर के घर में थे, क्योंकि हमें लगा वहां हम सुरक्षित हैं। लेकिन वहां भी बम आ गया। अब हम कहां जाएं?”
क्या यह युद्ध या मानवता का पतन?
इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आधुनिक युद्धों में भी “मानवता” नाम की कोई चीज़ बची है? जब धार्मिक स्थल, जो शांति और करुणा का प्रतीक होते हैं, वे भी हथियारों के शिकार बनते हैं, तब ज़रूरत है दुनिया को जगाने की।
आगे क्या? – अंतरराष्ट्रीय दबाव और निष्पक्ष जांच की मांग
इस हमले के बाद वैश्विक समुदाय ने इज़राइल पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, और कैथोलिक समुदाय अब मांग कर रहे हैं कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो।
इस बीच गाजा के लोग और चर्च के घायल शरणार्थी, दुनिया से एक ही सवाल पूछ रहे हैं – “क्या हमारे जीवन की कीमत कुछ भी नहीं है?”

