Kanpur News: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में अनोखा कारनामा – पैर के मांस से बनाया नया जबड़ा, 70 वर्षीय बुजुर्ग को मिला नया जीवन
Kanpur News: कानपुर शहर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने चिकित्सा जगत को हैरान कर दिया है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 70 वर्षीय बुजुर्ग को नया जीवन दे दिया। इस ऑपरेशन की खासियत यह रही कि डॉक्टरों ने मरीज की जांघ से मांस निकालकर नया जबड़ा तैयार किया, जिससे कैंसर से प्रभावित हिस्से को बदल दिया गया।
मरीज की तकलीफ और दुर्लभ कैंसर का पता
करीब एक महीने पहले यह बुजुर्ग व्यक्ति जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला की ओपीडी में पहुंचे थे। लगातार जबड़े में दर्द और सूजन से परेशान बुजुर्ग की जांच की गई तो सामने आया कि उन्हें स्पिंडल सेल कैंसर (Spindle Cell Cancer) है।
डॉक्टरों ने बताया कि यह कैंसर बेहद दुर्लभ होता है और बहुत कम लोगों में पाया जाता है। अगर समय पर इलाज न हो, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। खास बात यह रही कि निजी अस्पतालों ने इतनी जटिल सर्जरी करने से साफ मना कर दिया था, लेकिन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की टीम ने चुनौती स्वीकार की।
डॉ. संजय काला के नेतृत्व में ऑपरेशन
सोमवार को एलएलआर अस्पताल में प्राचार्य डॉ. संजय काला के नेतृत्व में प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रेम शंकर और ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. हरेंद्र गौतम ने मिलकर अनोखा ऑपरेशन किया।
ऑपरेशन की प्रक्रिया बेहद जटिल थी —
सबसे पहले कैंसर से प्रभावित जबड़े का हिस्सा निकाल दिया गया।
इसके बाद मरीज की जांघ से मांस और ऊतक निकाले गए।
उन्हीं ऊतकों से नया जबड़ा तैयार किया गया।
मरीज के चेहरे और जबड़े को इस तरह जोड़ा गया कि भविष्य में भी उन्हें किसी गंभीर समस्या का सामना न करना पड़े।
सर्जरी की सफलता और मरीज की हालत
डॉक्टरों ने बताया कि सर्जरी पूरी तरह सफल रही है। फिलहाल मरीज को आईसीयू में निगरानी में रखा गया है और उनकी हालत स्थिर है। डॉक्टरों का दावा है कि बुजुर्ग जल्द ही सामान्य जीवन जी सकेंगे।
इस सर्जरी की एक और विशेषता रही कि इसमें खून बहुत कम निकला और ऑपरेशन इतना सटीक तरीके से किया गया कि मरीज को बड़ी परेशानी नहीं हुई।
मरीज के परिजनों ने राहत की सांस ली और डॉक्टरों का आभार जताया। उनका कहना है कि जब निजी अस्पतालों ने उम्मीद छोड़ दी थी, तब जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने उन्हें जीवनदान दिया।
25 साल में चौथी बार हुई ऐसी दुर्लभ सर्जरी
प्राचार्य डॉ. संजय काला ने जानकारी दी कि यह पिछले 25 साल में चौथी बार है जब जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में ऐसी सर्जरी हुई है। उन्होंने कहा कि स्पिंडल सेल कैंसर के मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं, और देर होने पर मरीज की जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि टीमवर्क और सही तकनीक के कारण ही यह संभव हो सका।
सरकारी संस्थान ने दिखाई क्षमता
आमतौर पर इस तरह की जटिल सर्जरी बड़े निजी अस्पतालों में ही संभव मानी जाती है। लेकिन इस बार सरकारी संस्थान जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने जो कारनामा किया है, वह पूरे कानपुर के लिए गर्व का विषय है।
डॉक्टरों का कहना है कि सरकारी संस्थानों में अगर संसाधनों और टीमवर्क का सही इस्तेमाल किया जाए तो किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।
समाज और चिकित्सा जगत के लिए सीख
यह घटना सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं है, बल्कि समाज और चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणा है। यह दिखाता है कि सरकारी अस्पताल भी असंभव लगने वाली बीमारियों का इलाज कर सकते हैं।
मरीजों और उनके परिजनों का भरोसा बनाए रखना ही डॉक्टरों की सबसे बड़ी जीत होती है। इस मामले में डॉक्टरों की लगन, हिम्मत और तकनीकी कौशल ने एक परिवार की जिंदगी बदल दी।

