UP conversion gang: दिव्यांगों को शादी और धर्म परिवर्तन के जाल में फंसाने वाला गिरोह बेनकाब
UP conversion gang: बरेली ज़िले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। यहां धर्म परिवर्तन कराने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह की कार्यशैली बेहद खौफनाक और चालाक थी। इनके निशाने पर समाज के सबसे असहाय तबके — दिव्यांग, नेत्रहीन और आर्थिक रूप से संपन्न लोग थे।
गिरोह पहले भावनात्मक सहारा देता, फिर शादी और धार्मिक किताबों के बहाने लोगों को अपनी गिरफ्त में लेता। इस मामले ने न केवल पुलिस महकमे को चौंकाया है बल्कि समाज को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर किस तरह से असहाय लोगों की भावनाओं और आस्थाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
नेत्रहीन प्रवक्ता प्रभात उपाध्याय बना शिकार
राजकीय इंटर कॉलेज अलीगढ़ के नेत्रहीन प्रवक्ता प्रभात उपाध्याय इस गिरोह के जाल में फंसे। प्रभात बेहद मेधावी रहे हैं। दिव्यांग कोटे से उन्हें आरक्षण मिला और उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। बाद में हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी से सूफिज़्म में पीएचडी की।
2019 में प्रभात की नियुक्ति जीआईसी अलीगढ़ में सहायक प्रवक्ता के तौर पर हुई। विवाह अलीगढ़ की अंजलि से हुआ, लेकिन दृष्टिहीनता के कारण वैवाहिक जीवन टूट गया। अंजलि ने घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के मुकदमे दर्ज करा दिए। इसी बीच प्रभात ने तलाक की अर्जी भी दी।
इन्हीं परिस्थितियों का फायदा उठाकर गिरोह ने प्रभात से संपर्क साधा। पहले उन्हें धार्मिक किताबें और सीडी दी गईं, फिर शादी का लालच दिखाकर धीरे-धीरे धर्म परिवर्तन की ओर धकेलने की कोशिश की गई।
दूसरे दिव्यांग शिक्षक ब्रजपाल सिंह से भी ठगी
प्रभात अकेले शिकार नहीं थे। गिरोह ने ब्रजपाल सिंह, एक अन्य दिव्यांग शिक्षक, को भी अपने जाल में फंसाने की कोशिश की। ब्रजपाल को भी भावनात्मक सहारा देकर उनकी आस्था से खिलवाड़ करने का प्रयास हुआ। लेकिन मामला खुलने से पहले गिरोह अपने मंसूबों में पूरी तरह सफल नहीं हो सका।
अखिलेश कुमारी की रिपोर्ट ने खोला राज़
इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब अलीगढ़ के मोहल्ला इंद्रपुरी क्वारसी निवासी अखिलेश कुमारी ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। उनके बेटे प्रभात उपाध्याय के बदलते व्यवहार ने उन्हें संदेह में डाल दिया।
उन्होंने देखा कि प्रभात फोन और व्हाट्सएप पर अक्सर मुस्लिम धर्म से जुड़ी बातें कर रहे हैं। उन्हें धार्मिक किताबें भेंट की जा रही थीं और बार-बार संपर्क करने वाले कुछ अज्ञात लोग प्रभात पर गहरी पकड़ बना रहे थे।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बनाई टीम
जैसे ही मामला दर्ज हुआ, एसएसपी अनुराग आर्य ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने जांच के लिए एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा को जिम्मेदारी सौंपी। अंशिका वर्मा ने न केवल अखिलेश कुमारी से पूछताछ की, बल्कि प्रभात से जुड़े लोगों और गतिविधियों की गहन जांच शुरू कर दी।
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह केवल अलीगढ़ या बरेली तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई ज़िलों में फैला हो सकता है।
धर्म परिवर्तन के नए हथकंडे
आमतौर पर धर्म परिवर्तन कराने वाले गिरोह लालच, नौकरी, पैसों और इलाज का झांसा देते हैं। लेकिन इस मामले में तरीका कुछ अलग था। यहां शादी का लालच, धार्मिक किताबें और भावनात्मक सहारा हथियार बने।
दिव्यांगों की कमजोरी का फायदा उठाकर गिरोह उन्हें अपनी तरफ खींचने की कोशिश करता। धीरे-धीरे उनके आर्थिक संसाधनों को भी इस्तेमाल करने की योजना बनाई जाती।
यूपी पुलिस की बढ़ी जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में धर्म परिवर्तन के कई मामले सामने आ चुके हैं। कई बार गरीबों को लालच देकर, तो कभी महिलाओं को शादी का सपना दिखाकर धर्मांतरण कराने की घटनाएं हो चुकी हैं।
यह घटना इसलिए और गंभीर है क्योंकि इसमें शारीरिक रूप से असहाय लोग निशाने पर थे। सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए यह नई चुनौती है कि ऐसे संगठित गिरोहों को पूरी तरह खत्म किया जाए।
समाज के लिए चेतावनी
यह मामला समाज के लिए भी एक चेतावनी है। हमें अपने आस-पास हो रही गतिविधियों पर नज़र रखनी होगी। दिव्यांग और असहाय लोगों को भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है, लेकिन इसी जरूरत का फायदा उठाकर कुछ लोग उनके साथ छल करते हैं।
क्या हो सकती है आगे की कार्रवाई?
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। बरेली, अलीगढ़ और आसपास के इलाकों में नेटवर्क खंगाला जा रहा है। माना जा रहा है कि कुछ राजनीतिक और बाहरी संगठनों की भी इसमें संलिप्तता हो सकती है।

