अमेरिका के H-1B वीजा बदलाव से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को झटका, लेकिन अन्य देशों ने बढ़ाई उम्मीदें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया आदेश ने भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स की उम्मीदों को एक बड़ा झटका दिया है। ट्रम्प ने H-1B वीजा से जुड़ी फीस को बढ़ाकर इसे 88 लाख रुपये तक कर दिया है, जो कि पहले 6 लाख रुपये के आसपास था। इससे भारतीय प्रोफेशनल्स पर खर्च का बोझ काफी बढ़ गया है। हालांकि, इस बदलाव के बावजूद दुनिया के 7 प्रमुख देशों ने भारतीय टैलेंट को अपने देशों में आकर्षित करने के लिए विशेष वीजा नीतियों और प्रस्तावों की घोषणा की है।
ट्रम्प के आदेश का असर: H-1B वीजा की फीस में भारी बढ़ोतरी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा की वन टाइम फीस बढ़ाकर लगभग 88 लाख रुपये करने की घोषणा की है। इससे पहले, H-1B वीजा के लिए औसतन 6 लाख रुपये का शुल्क लिया जाता था, जो 3 साल के लिए वैध होता था। अब इसे बढ़ाकर सालाना 88 लाख रुपये किया गया है, जिससे कुल 6 साल में प्रोफेशनल्स को लगभग 5.28 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। इस वृद्धि से भारतीय आईटी और साइंस प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में काम करने का खर्च 50 गुना बढ़ गया है, जो कि बड़ी चिंता का कारण बन गया है।
दुनिया के प्रमुख देशों ने भारतीय टैलेंट को आकर्षित करने के लिए खोलीं नई राहें
हालांकि, इस बदलाव के बाद भी अन्य देशों ने भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए नए अवसर खोले हैं। इनमें से 7 प्रमुख देश हैं, जिन्होंने अपनी वीजा नीतियों में सुधार किया है और भारतीय टैलेंट को अपने देशों में आने का न्योता दिया है। इनमें फिनलैंड, ताइवान, कनाडा, जर्मनी, यूके, दक्षिण कोरिया और चीन प्रमुख हैं।
फिनलैंड और ताइवान: भारतीय टैलेंट के लिए नए अवसर
फिनलैंड और ताइवान ने विशेष रूप से भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए आकर्षक प्रस्ताव दिए हैं।
फिनलैंड ने भारत के साथ एक साझेदारी की घोषणा की है जिसके तहत दोनों देशों के बीच आईटी और गेमिंग क्लस्टर की साझेदारी होगी। फिनलैंड दुनिया के सबसे बड़े गेमिंग एक्सपोर्टर्स में से एक है, और उसने भारत के साथ गेमिंग टाइटल्स के निर्यात को बढ़ाने के लिए करार किया है। इसके अलावा, फिनलैंड ने भारतीय आईटी सेक्टर के साथ मिलकर उच्च गुणवत्ता वाले गेम्स तैयार करने की दिशा में काम करने का फैसला किया है।
ताइवान ने अपनी 15 से अधिक विश्वविद्यालयों के साथ भारतीय छात्रों को आकर्षित करने का फैसला किया है। ताइवान की यह पहल विशेष रूप से एआई और सेमी कंडक्टर के कोर्स के लिए है। ताइवान के शीर्ष विश्वविद्यालयों में से कम से कम पांच संस्थान दुनिया के शीर्ष 350 विश्वविद्यालयों में शामिल हैं।
कनाडा, यूके और अन्य देशों ने दी विशेष वीजा सुविधाएं
इसके साथ ही, कनाडा और यूके जैसे देशों ने भारतीय टैलेंट के लिए और भी आकर्षक वीजा योजनाएं पेश की हैं।
कनाडा ने भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक्सप्रेस एंट्री की पेशकश की है, जिससे उन्हें कनाडा में जल्दी वीजा मिल सकेगा।
यूके ने भारतीय टैलेंट को आकर्षित करने के लिए वीजा फीस में छूट देने की घोषणा की है, जिससे भारतीय प्रोफेशनल्स को ब्रिटेन में काम करने के लिए कम खर्च करना पड़ेगा।
दक्षिण कोरिया और चीन ने भी अपनी वीजा नीतियों में बदलाव किया है। चीन ने विशेष रूप से आईटी प्रोफेशनल्स के लिए एक स्पेशल ‘के’ कैटेगरी वीजा की शुरुआत की है, जो भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक नया अवसर हो सकता है।
भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा
हालांकि ट्रम्प के आदेश ने अमेरिकी वीजा सिस्टम को भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए कम आकर्षक बना दिया है, लेकिन दुनिया भर के देशों ने उनकी क्षमताओं और कौशल का सम्मान करते हुए भारतीय टैलेंट को अपने देशों में आकर्षित करने के लिए नए रास्ते खोले हैं। इससे भारतीय प्रोफेशनल्स के पास अब अमेरिका के अलावा अन्य देशों में भी अवसर हैं।
भारत के आईटी और साइंस प्रोफेशनल्स के लिए अब अमेरिका से बाहर भी बहुत से विकल्प खुल गए हैं, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा और बेहतर हो सकती है।

