दिल्ली एनसीआर: नेपाली गैंगस्टर Bhim zora का पुलिस एनकाउंटर, डकैती और हत्या के आरोपी का हुआ सफाया
दिल्ली एनसीआर में नेपाली नौकरों के भेष में बड़े पैमाने पर चोरी, लूट और हत्या करने वाला कुख्यात बदमाश भीम बहादुर जोरा आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया और मंगलवार को एनकाउंटर में ढेर हो गया। भीम जोरा न केवल चोरी और डकैती का मास्टरमाइंड था, बल्कि टारगेट के विरोध करने पर हत्या करने से भी नहीं हिचकिचाता था।
पुलिस के मुताबिक, Bhim zora ने दिल्ली, गुरुग्राम, गाजियाबाद, सूरत और कर्नाटक में वारदातों को अंजाम दिया। उसकी कई वारदातों में हत्या, लूट और चोरी शामिल हैं। भीम जोरा पर 1 लाख रुपये का इनाम भी घोषित था।
भीम जोरा कौन था?
भीम बहादुर जोरा नेपाल के बाजुरा जिले का रहने वाला था। अपराध की दुनिया में पैसा कमाने के इरादे से भारत आया। भारत में उसने फर्जी आधार कार्ड बनवाए और अमीर घरों में नौकर के रूप में काम करना शुरू किया।
अवसर मिलने पर वह घर के सदस्यों को नशीली दवाइयां देकर बेहोश कर देता या बंधक बना लेता और कीमती सामान लेकर नेपाल भाग जाता। उसने अपने गांव के अन्य युवाओं को भी अपराध में शामिल किया और एक गैंग का निर्माण किया।
भीम जोरा के अपराध का तरीका
नेपाल के बेरोजगार युवाओं को फंसाना: नौकरों के नाम पर उन्हें भारत में लाकर अमीर घरों में काम दिलाना।
सोशल मीडिया पर निगरानी: नौकरों के पोस्ट पर नजर रखना, दोस्त बनाकर उन्हें वारदात के लिए तैयार करना।
लालच देकर वीडियो मंगवाना: घरों का नक्शा और वीडियो लेकर लूट की योजना बनाना।
लूट के बाद नेपाल भागना: लूट के माल का बंटवारा कर नेपाल भाग जाना और फिर नए मिशन पर लग जाना।
पुलिस को भीम जोरा की तलाश क्यों थी?
महत्वपूर्ण चोरी: 2 अक्टूबर 2024 को गुरुग्राम सेक्टर 49 में BJP महरौली जिला उपाध्यक्ष ममता भारद्वाज के घर 20 लाख की चोरी।
सिविल लाइन चोरी: जुलाई 2024 में 3.5 लाख की चोरी।
हत्या और डकैती: मई 2024 में जंगपुरा में डॉक्टर योगेश चंद्र पॉल की हत्या और डकैती।
17 महीने की तलाश: गुरुग्राम पुलिस पिछले 17 महीनों से उसे पकड़ने की कोशिश कर रही थी।
एनकाउंटर की पूरी कहानी
गुरुग्राम क्राइम ब्रांच को सूचना मिली कि भीम जोरा साउथ दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में किसी वारदात को अंजाम देने वाला है।
ऑपरेशन टीम: क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र शर्मा, एसपी राजेन्द्र डागर और दिल्ली पुलिस की टीम।
फायरिंग का सामना: भीम जोरा और उसका साथी पुलिस को देखकर फायरिंग करने लगे। एक गोली इंस्पेक्टर नरेंद्र शर्मा की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी।
जवाबी कार्रवाई: पुलिस की जवाबी फायरिंग में भीम जोरा घायल हुआ और उसे तुरंत AIIMS ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया।
साथी फरार: जोरा का साथी घटना स्थल से भाग गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
साथी की गिरफ्तारी और पूछताछ
दो दिन पहले जोरा के साथी युवराज थापा को गुरुग्राम पुलिस ने गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि वह जुलाई में हुई सिविल लाइन चोरी में भी शामिल था।
भीम जोरा के क्राइम की अंतरराष्ट्रीय जड़ें
नेपाल के युवाओं को अपराध में शामिल करना।
चोरी, लूट और हत्या की योजनाओं में गैंग का विस्तार।
भारत में फर्जी डॉक्यूमेंट और नौकरी के बहाने अपराध को अंजाम देना।

