अफगान विदेश मंत्री Amir Khan Muttaqi का भारत दौरा, तालिबान के कड़े बयान और सीमा पर ताज़ा झड़प
भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में इस समय एक नई दिशा देखने को मिल रही है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री Amir Khan Muttaqi , जो तालिबान सरकार के प्रतिनिधि हैं, इस वक्त भारत के दौरे पर हैं। उनकी यह यात्रा न केवल अफगानिस्तान और भारत के द्विपक्षीय रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि तालिबान सरकार के नए दृष्टिकोण और रणनीतियों की भी एक झलक प्रस्तुत करती है। दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस ने विभिन्न मुद्दों पर खुलकर चर्चा की, जिसमें महिलाओं की शिक्षा से लेकर पाकिस्तान से बढ़ते तनाव तक के मामलों पर बात की गई।
महिलाओं की शिक्षा: तालिबान के भीतर एक नई सोच?
तालिबान के सत्ता में आने के बाद से महिलाओं की शिक्षा पर जो कठोर पाबंदियाँ लगी थीं, उन पर अब अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में आज भी करीब 1 करोड़ छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिनमें 28 लाख महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं। उनका यह बयान न केवल दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश है कि तालिबान शिक्षा के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि वे अपने देश में एक सशक्त और समृद्ध समाज की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ क्षेत्रों में अब भी महिलाओं के लिए शिक्षा की सीमाएँ हैं, लेकिन यह अस्थायी व्यवस्था है।
भारत के साथ व्यापार और रिश्तों में नई शुरुआत
मुत्तकी का भारत दौरा अफगानिस्तान और भारत के रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत है। अफगान विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच व्यापार, अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के दौरान यह घोषणा की गई कि भारत काबुल में अपने दूतावास को एम्बेसी में अपग्रेड करेगा और काबुल के डिप्लोमैट्स जल्द ही नई दिल्ली आएंगे। इसके साथ ही, भारत और अफगानिस्तान के बीच उड़ानों की संख्या बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और कूटनीतिक रिश्तों को नया आयाम मिलेगा।
अफगानिस्तान ने भारत से विशेष रूप से खनिज, कृषि और खेल क्षेत्रों में निवेश की अपील की। दोनों देशों के बीच चाबहार बंदरगाह को लेकर भी चर्चा हुई, जो भारतीय हितों के लिए बेहद अहम है। अफगानिस्तान ने भारत से वाघा बॉर्डर खोलने की भी मांग की, जिससे व्यापार के रास्ते को और भी सरल बनाया जा सके।
पाकिस्तान से बढ़ते तनाव और अफगानिस्तान की स्थिति
इससे पहले अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा था। 2021 में पाकिस्तान की सीमा पर हुई झड़पों में कई सैनिक मारे गए थे, और अब एक बार फिर से सीमा पर तनाव बढ़ चुका है। शनिवार रात को अफगानिस्तान ने दावा किया कि उसने पाकिस्तान की सीमा पर कार्रवाई करते हुए 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। पाकिस्तान ने इस झड़प में अपने 23 सैनिकों की मौत होने की पुष्टि की है।
यह संघर्ष पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान की वायुसीमा का उल्लंघन करने के जवाब में हुआ। अफगानिस्तान के अधिकारियों ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और पूर्वी क्षेत्रों में बमबारी की। पाकिस्तान ने इस हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया है, लेकिन यह तनाव बढ़ने के संकेत दे रहा है।
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि अफगान सेना ने पाकिस्तान के 25 सैन्य पोस्टों पर कब्जा कर लिया और 30 पाकिस्तानी सैनिक घायल हुए हैं। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से शांति की अपील की है, लेकिन कहा है कि अगर पाकिस्तान बातचीत के लिए तैयार नहीं है तो उनके पास और रास्ते भी हैं।
तालिबान का पाकिस्तान पर हमला: क्या यह शुरुआत है?
तालिबान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पाकिस्तान के आतंकी गुटों को अफगानिस्तान की भूमि से बाहर करने के लिए उन्होंने एक ऑपरेशन शुरू किया था, जो कि कतर और सऊदी अरब की मदद से रुकवाया गया। मुत्तकी ने पाकिस्तान के आतंकी समूहों को रोकने की अपील की है और कहा कि तालिबान के झंडे के नीचे अफगानिस्तान ने जिहाद लड़ा है, और यह उनके लिए गौरव की बात है।
पाकिस्तान की जनता से तालिबान ने कोई दुश्मनी नहीं होने की बात कही, लेकिन कुछ तत्व पाकिस्तान में परेशानियाँ पैदा करते हैं। तालिबान ने पाकिस्तान से यह भी कहा कि वे अफगानिस्तान में अपनी संप्रभुता की रक्षा करेंगे और यदि पाकिस्तान शांति की दिशा में कोई कदम नहीं उठाता, तो अफगानिस्तान के पास अन्य विकल्प हैं।
काबुल में भारतीय पत्रकार की मौत पर अफसोस
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, अफगान विदेश मंत्री ने 2021 में अफगानिस्तान में मारे गए भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की मौत पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। मुत्तकी ने कहा कि पिछले चार वर्षों में अफगानिस्तान में कोई पत्रकार घायल नहीं हुआ है, और उन्हें हर मौत का दुख है। यह बयान अफगानिस्तान के बदलते रवैये को दर्शाता है और यह बताता है कि तालिबान अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया और पत्रकारों के प्रति अपनी नीति में कुछ नरमी ला रहा है।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर नए झगड़े: क्या होगा अगला कदम?
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बाद, यह साफ है कि दोनों देशों के रिश्ते अभी तनावपूर्ण हैं। दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच बढ़ते झगड़े, सीमा पर भारी गोलाबारी, और सैनिकों की मौत से स्थिति और भी जटिल हो गई है। अफगानिस्तान ने इस बार पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है कि वे अपनी नीति में बदलाव करें और अफगान सीमा से आतंकवादी गतिविधियों को समाप्त करें।
यह बात भी सामने आई है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर भारी झड़पें और घुसपैठ दोनों देशों के रिश्तों में और भी तनाव पैदा कर सकती हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों ही अपने-अपने सुरक्षा हितों को लेकर बेहद चिंतित हैं, और यह सवाल उठता है कि क्या भविष्य में और भी संघर्ष देखने को मिलेगा।
आखिरकार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते, जिनमें एक तरफ सीमा पर तनाव तो दूसरी तरफ शांति की संभावनाएं हैं, दुनिया की नजरें इन पर लगी हैं। दोनों देशों के अधिकारियों को अपनी कार्रवाई से यह साबित करना होगा कि वे सिर्फ अपनी संप्रभुता की रक्षा नहीं कर रहे, बल्कि क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।

