India-Taliban बैठक: जयशंकर और मुत्तकी की मुलाकात में काबुल दूतावास खोलने का ऐलान
India-Taliban/नई दिल्ली: भारत ने अफगानिस्तान में अपने कूटनीतिक मिशन को फिर से दूतावास में बदलने का ऐलान कर दिया है। यह घोषणा विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी के साथ दिल्ली में हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान की।
जयशंकर ने कहा कि 2021 में तालिबान सत्ता में आने के बाद भारत ने काबुल में अपना दूतावास बंद कर दिया था, लेकिन 2022 में व्यापार, चिकित्सा सहायता और मानवीय उद्देश्यों के लिए एक छोटा तकनीकी मिशन खोला गया था। अब इसे भारतीय दूतावास का दर्जा दिया जाएगा।
दिल्ली में मुलाकात की अनोखी पहलू – कोई झंडा नहीं
बैठक के दौरान किसी भी देश का झंडा इस्तेमाल नहीं किया गया। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि भारत ने अभी तक तालिबान सरकार को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी है। मुत्तकी की यह दिल्ली यात्रा अगस्त 2021 के बाद पहली मंत्री स्तर की यात्रा मानी जा रही है।
जयशंकर बोले – अफगानिस्तान के विकास में भारत की गहरी रुचि
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत को अफगानिस्तान के विकास में गहरी रुचि है। उन्होंने आतंकवाद से निपटने के लिए दोनों देशों द्वारा की जा रही साझा कोशिशों की भी सराहना की। जयशंकर ने मुत्तकी को बताया कि भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने ऐलान किया कि तकनीकी मिशन को अब भारतीय दूतावास का दर्जा मिलेगा, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे।
मुत्तकी ने जताई भारत के प्रति कृतज्ञता
अमीर खान मुत्तकी ने भारत को धन्यवाद देते हुए कहा कि हाल ही में अफगानिस्तान में आए भूकंप में भारत सबसे पहले मदद पहुंचाने वाला देश था। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान भारत को एक करीबी दोस्त मानता है।
झंडे का प्रोटोकॉल बना चुनौती
भारत ने तालिबान-शासित अफगानिस्तान को अभी तक मान्यता नहीं दी है। इसलिए काबुल में भारतीय दूतावास में तालिबान का झंडा फहराने की अनुमति नहीं दी गई है। वर्तमान में यहां इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान का झंडा लगाया जाता है।
इससे पहले जनवरी 2025 में दुबई में विदेश सचिव विक्रम मिस्री और मुत्तकी के बीच बैठक के दौरान भी कोई झंडा नहीं लगाया गया था। अब जब मुलाकात दिल्ली में हो रही है, तो यह कूटनीतिक दृष्टि से बड़ी चुनौती बन गई है।
मुत्तकी की भारत यात्रा – राजनीति से संस्कृति तक
मुलाकात केवल राजनीतिक नहीं है। मुत्तकी 11 अक्टूबर को सहारनपुर के दारुल उलूम देवबंद जाएंगे। यह मदरसा विश्व में मुस्लिम समाज के लिए विचारधारा और आंदोलन का केंद्र माना जाता है।
12 अक्टूबर को मुत्तकी आगरा में ताजमहल का दौरा करेंगे। इसके बाद नई दिल्ली में उद्योग और व्यापार प्रतिनिधियों के साथ बैठक में शामिल होंगे।
राजनीतिक स्तर पर सबसे अहम मुलाकात 10 अक्टूबर को हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री जयशंकर से होगी। वहीं, मुत्तकी की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी अलग से बैठक की संभावना है। इसमें सुरक्षा, आतंकवाद निरोध, मानवीय सहायता और वीजा संबंधी मुद्दे चर्चा में होंगे।
भारत अब तालिबान को गंभीरता से ले रहा
इंटरनेशनल मामलों के विशेषज्ञ एसोसिएट प्रोफेसर राजन राज (JNU) के अनुसार, भारत की यह पहल यह संदेश देती है कि वह तालिबान सरकार को गंभीरता से ले रहा है और उसे अफगानिस्तान के प्रतिनिधि संस्था के तौर पर स्वीकार कर रहा है।
वे कहते हैं कि अफगानिस्तान में अब तालिबान का शासन स्थिर दिखाई दे रहा है और भारत को यह एहसास हो गया है कि तालिबान लंबे समय तक सत्ता में रह सकता है।
भारत के साथ तालिबान दोस्ती के फायदे
राजन के अनुसार, भारत के जरिए अफगानिस्तान अपने ऊपर लगे आर्थिक और कारोबारी प्रतिबंधों को कम कर सकता है। इसके अलावा, भारत की मदद से अफगानिस्तान में बुनियादी ढांचे और राहत कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।
भारत की यह कूटनीतिक पहल न केवल अफगान जनता के लिए, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत के हितों के लिए भी अहम है।

