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दुनिया के सबसे बुजुर्ग राष्ट्रपति: Paul Biya और उगांडा के Yoweri Museveni, जिनका सत्ता से नाता कभी नहीं टूटा

दुनिया के सबसे बुजुर्ग राष्ट्रपति की बात करें तो ज़्यादातर लोग Paul Biya का नाम लेते हैं, जो कैमरून के 92 वर्षीय राष्ट्रपति हैं और जिन्होंने अपनी सत्ता को 1982 से आज तक लगातार बनाए रखा है। एक तरफ जहां कैमरून में पॉल बिया की सत्ता से लाजवाब पकड़ है, वहीं दूसरी तरफ उगांडा के Yoweri Museveni ने भी अपनी शक्ति को बरकरार रखा है और अफ्रीकी राजनीति में लंबा समय बिताया है। आइए जानते हैं कि इन दोनों नेताओं की राजनीति में गहरी छाप कैसी रही है, और इनकी सत्ता के तंत्र ने उनके देशों को कैसे प्रभावित किया है।


कैमरून के पॉल बिया: सत्ता का अटूट संबंध

पॉल बिया एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जो राजनीति में स्थिरता और नियंत्रण का पर्याय बन चुका है। कैमरून में पॉल बिया के सत्ता में आने से पहले, इस देश ने कई उतार-चढ़ाव देखे। पॉल बिया ने 1982 में कैमरून के राष्ट्रपति अहमदु अहिजो के इस्तीफे के बाद सत्ता संभाली और इसके बाद उन्होंने लगातार आठ बार राष्ट्रपति चुनाव में भाग लिया और जीत हासिल की।
पॉल बिया की राजनीति पर अगर नज़र डालें तो उनके शासनकाल के दौरान कई विवाद भी उठे हैं। उनकी नीतियों में विरोधियों पर कड़ी कार्रवाई, भ्रष्टाचार के आरोप, और जंगलों में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की आवाज़ दबाना जैसी चर्चाएं रही हैं।

कैमरून में हर सात साल में चुनाव होते हैं, और पॉल बिया ने इन चुनावों में जीत के बाद कार्यकाल की सीमा को खत्म किया, ताकि वे सत्ता में बने रह सकें। उनका कार्यकाल अब तक 92 वर्ष की उम्र तक जारी है, और उन्होंने हाल ही में आठवीं बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ा है। अगर पॉल बिया फिर से जीतते हैं, तो उनका कार्यकाल 99 वर्ष की उम्र में समाप्त होगा, यानी करीब दस साल और!

पॉल बिया की राजनीतिक स्थिति को लेकर कई आलोचनाएँ उठ चुकी हैं। उनका स्वास्थ्य अक्सर चर्चा का विषय रहा है, क्योंकि वे ज्यादातर समय यूरोप में रहते हैं और उनके प्रशासन का नियंत्रण उनके पार्टी के वरिष्ठ नेता और परिवार के सदस्य संभालते हैं। हालांकि, उनकी सरकार पर महंगे इलाज और विदेश यात्राओं पर खर्च करने के आरोप भी लगे हैं, जिनकी कुल लागत 2018 में लगभग 65 मिलियन डॉलर बताई गई थी।
पॉल बिया के सत्ता में बने रहने के बावजूद, कैमरून की गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याएं लगातार बनी रही हैं। विश्व बैंक के अनुसार, कैमरून की लगभग 40% आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है। इसके बावजूद, पॉल बिया ने हमेशा अपनी योजनाओं में युवाओं के लिए रोजगार और गरीबी उन्मूलन की बातें की हैं।


उगांडा के यौरी मुसेवेनी: एक लंबा नेतृत्व

उगांडा का नाम भी अफ्रीकी राजनीतिक लैंडस्केप में लंबे समय से बना हुआ है, और इसका कारण है यहां के राष्ट्रपति यौरी मुसेवेनी का लगभग 40 साल तक सत्ता में रहना।
यौरी मुसेवेनी ने 1986 में उगांडा की सरकार पर कब्जा किया था और तब से लेकर अब तक उन्होंने लगातार सत्ता का संचालन किया है। उनकी सत्ता में बदलाव की कोई संभावना नजर नहीं आती।
यद्यपि मुसेवेनी की सरकार ने देश में विकास और स्थिरता की दिशा में कई कदम उठाए हैं, लेकिन उनका शासन भी आलोचनाओं से अछूता नहीं रहा है। मुसेवेनी पर आरोप है कि उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर किया है, विपक्ष की आवाज़ दबाई है और अपने विरोधियों को सत्ता से बाहर करने के लिए कड़ी कार्रवाई की है।
उनके शासन में उगांडा ने आर्थिक सुधारों, शिक्षा और स्वास्थ्य में कुछ सुधार, और कृषि उत्पादन में वृद्धि जैसे पहलुओं में कुछ सकारात्मक बदलाव देखे हैं, लेकिन उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार और सत्ता की नफरतपूर्ण बढ़ोतरी के आरोप भी लगातार लगते रहे हैं।


दुनिया के सबसे बुजुर्ग राष्ट्रपति और उनका भविष्य

पॉल बिया और यौरी मुसेवेनी दोनों ही अफ्रीका के ऐसे राष्ट्रपति हैं जिनके नाम लंबे समय से राजनीति में गहरे छपे हुए हैं। जहां एक ओर दोनों ने अपने देशों में स्थिरता बनाई, वहीं दूसरी ओर इन दोनों नेताओं पर सत्ता के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं। इनकी सत्ता ने कई सवालों को जन्म दिया है, और लोकतंत्र, मानवाधिकार और विकास की राह पर भी असमंजस बनाए रखा है।
कैमरून और उगांडा में जो शासन और सत्ता की संरचना है, उसे लेकर कई लोगों के मन में यही सवाल है कि क्या समाज में समानता, सामाजिक न्याय और विकास के लिए एक नई दिशा देने का समय नहीं आया?


कैमरून और उगांडा में राजनीतिक बदलाव की आवश्यकता

राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन अगर सत्ता किसी एक व्यक्ति के हाथ में सिमट कर रह जाए, तो इससे लोकतंत्र और विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कैमरून और उगांडा के नागरिक अब अपने भविष्य को लेकर अधिक संवेदनशील और जागरूक हो चुके हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आने वाले वर्षों में इन देशों में नया नेतृत्व उभरता है जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मानवाधिकार के सिद्धांतों का सम्मान करता हो।


पॉल बिया और यौरी मुसेवेनी की तरह अफ्रीका के कई अन्य नेताओं ने भी सत्ता को अपने हाथों में बनाए रखा है, लेकिन क्या यह स्थिरता उनके देशों के लिए एक आदर्श बन सकती है, या फिर समय आ चुका है जब नए नेतृत्व को अवसर मिलना चाहिए? यह सवाल आने वाले वर्षों में और अधिक प्रासंगिक हो सकता है।

 

Shyama Charan Panwar

एस0सी0 पंवार (वरिष्ठ अधिवक्ता) टीम के निदेशक हैं, समाचार और विज्ञापन अनुभाग के लिए जिम्मेदार हैं। पंवार, सी.सी.एस. विश्वविद्यालय (मेरठ)से विज्ञान और कानून में स्नातक हैं. पंवार "पत्रकार पुरम सहकारी आवास समिति लि0" के पूर्व निदेशक हैं। उन्हें पत्रकारिता क्षेत्र में 29 से अधिक वर्षों का अनुभव है। संपर्क ई.मेल- panwar@poojanews.com

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