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China में बड़े सैन्य अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई: भ्रष्टाचार के आरोपों में जनरल हे वेईदोंग और एडमिरल मियाओ हुआ समेत 7 अधिकारियों को बर्खास्त

China स्तरीय सैन्य अधिकारियों सहित सात अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में सेना और कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिया है। यह कदम चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और नेवी के लिए एक बड़ा संदेश है, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष को और तेज किया गया है। इसमें जनरल हे वेईदोंग और नौसेना के एडमिरल मियाओ हुआ को प्रमुख रूप से बर्खास्त किया गया है। यह कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में शुरू हुई एंटी-करप्शन ड्राइव के तहत सबसे बड़ी मानी जा रही है, जो पहले ही चीन की राजनीतिक और सैन्य मशीनरी में उथल-पुथल मचा चुकी है।

चीनी सैन्य अधिकारियों की बर्खास्तगी: भ्रष्टाचार के आरोपों में बड़ा कदम

रॉयटर्स के मुताबिक, दक्षिणी चीन के एक प्रमुख सैन्य केंद्र में उच्च स्तर पर घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद चीन ने दो प्रमुख सैन्य अफसरों को पद से हटा दिया। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में इस बात की पुष्टि की गई। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया और भ्रष्टाचार की घटनाओं में संलिप्त रहे। इस कदम को राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उस विस्तृत योजना का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य पार्टी और सेना में भ्रष्टाचार की जड़ें उखाड़ना है।

जनरल हे वेईदोंग: शी जिनपिंग का करीबी सहयोगी

हे वेईदोंग चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के उपाध्यक्ष थे, जो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में सबसे बड़े पदों में से एक है। हे वेईदोंग को राष्ट्रपति शी जिनपिंग का करीबी सहयोगी माना जाता था, और दोनों ने 1990 के दशक में फुजियान और झेजियांग प्रांतों में साथ काम किया था। हे वेईदोंग को 2022 में CMC का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जो अक्सर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को ही यह पद दिया जाता है। लेकिन मार्च 2025 के बाद वे सार्वजनिक रूप से कहीं नजर नहीं आए थे, और अब उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते बर्खास्त कर दिया गया है।

नौसेना के एडमिरल मियाओ हुआ: शी के चयनित अधिकारी

दूसरे प्रमुख अधिकारी एडमिरल मियाओ हुआ थे, जो सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के सदस्य थे और पॉलिटिकल वर्क डिपार्टमेंट के डायरेक्टर थे। मियाओ हुआ को राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्यक्तिगत रूप से चुना था, और उनका करियर शी के सत्ता में आने के बाद तेजी से उभरा था। हालांकि, नवंबर 2023 में उनके खिलाफ जांच शुरू की गई, और अब उन्हें भी भ्रष्टाचार के आरोप में पद से हटा दिया गया है।


सेना और पार्टी में भ्रष्टाचार की जड़ें खत्म करने की ओर शी जिनपिंग का मिशन

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई शी जिनपिंग के व्यापक एंटी-करप्शन मिशन का हिस्सा है, जो न केवल पार्टी बल्कि सेना को भी प्रभावित कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों से, शी जिनपिंग ने सेना में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ कई बड़े कदम उठाए हैं। इन कदमों में प्रमुख अफसरों का हटाया जाना, सरकारी अधिकारियों की सख्त जांच और पार्टी के भीतर की गतिविधियों की निगरानी शामिल हैं।

अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल चाइना हब के एक्सपर्ट, वेन-टी सुंग ने कहा, “शी जिनपिंग निश्चित रूप से पार्टी और सेना में भ्रष्टाचार की सफाई कर रहे हैं। अब वह सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में नई नियुक्तियां कर सकेंगे, जिससे उनकी सेना और पार्टी में मजबूत पकड़ होगी।”


दूसरी बड़ी सैन्य बर्खास्तगी: भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई

इससे पहले भी चीन ने सेना और नेवी के कई सीनियर अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में पद से हटा दिया था। इनमें नेवी के चीफ ऑफ स्टाफ वाइस एडमिरल ली हानजुन और चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉरपोरेशन के डिप्टी चीफ इंजीनियर लियू शिपेंग शामिल थे। इन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अन्य वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप थे, जो अब तक की सबसे बड़ी एंटी करप्शन ड्राइव का हिस्सा हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई चीन की सेना को भ्रष्टाचार से मुक्त करने और उसकी शक्ति को बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है, ताकि चीन अपनी सैन्य ताकत को वैश्विक स्तर पर और प्रभावशाली बना सके।


शी जिनपिंग का ध्यान: सैन्य शक्ति को और मजबूत बनाना

चीनी नेतृत्व के मुताबिक, भ्रष्टाचार को खत्म करने से न केवल सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि इससे कम्युनिस्ट पार्टी की वफादारी और स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। शी जिनपिंग का यह कदम एक ओर दिशा में महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को सैन्य और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चलाया है।

चीन की रक्षा नीति में बड़ा बदलाव

चीन लगातार अपनी सैन्य ताकत को आधुनिक बना रहा है। 2024 के रक्षा बजट में चीन ने 7.2% की बढ़त की है, और अब 249 अरब डॉलर (1.78 ट्रिलियन युआन) के सैन्य खर्च के साथ यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट है। यह आंकड़ा भारत के रक्षा बजट से तीन गुना अधिक है, और विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का वास्तविक रक्षा खर्च उस आंकड़े से भी ज्यादा हो सकता है, जो सरकारी रिपोर्ट में दिखाया जाता है।


भारत और अमेरिका से तुलना

चीन के सैन्य खर्च की तुलना करते हुए, अमेरिका का रक्षा बजट लगभग 950 अरब डॉलर के आसपास है, जो चीन के बजट से चार गुना अधिक है। हालांकि, चीन लगातार अपने सैन्य खर्च को बढ़ाने में लगा हुआ है, जबकि अमेरिका पहले से ही अपने रक्षा बजट में एक बड़ी हिस्सेदारी निवेश करता आ रहा है।

चीन का लक्ष्य: ग्लोबल सुपरपावर बनना

चीन का यह सैन्य आधुनिकीकरण, उसके ग्लोबल सुपरपावर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शी जिनपिंग के नेतृत्व में, चीन न केवल अपनी सेना को मजबूत करने में लगा है, बल्कि वह अपनी वैश्विक स्थिति को भी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।


चीन की इस कार्रवाई को न केवल भ्रष्टाचार पर काबू पाने के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन की सैन्य ताकत को भी एक नई दिशा देने का प्रयास है। चीन की एंटी-करप्शन मुहिम से यह साफ होता है कि वहां की राजनीति और सैन्य संरचना में बहुत कुछ बदलने वाला है। इस बार की बर्खास्तगी सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि चीन की सैन्य शक्ति को एक नई दिशा में मजबूत करने का संकेत भी है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस अभियान का क्या असर चीन की शक्ति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ता है।

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