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Bangladesh का भारत से तीसरी बार दबाव: शेख हसीना का प्रत्यर्पण मांगती आधिकारिक चिट्ठी, ICT की मौत की सजा के बाद राजनीतिक भूचाल तेज

Bangladesh की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल में है। अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस भेजने की औपचारिक मांग तीसरी बार कर दी है। विदेश मामलों के सलाहकार एमडी तौहीद हुसैन ने पुष्टि की कि नई दिल्ली को आधिकारिक पत्र भेजा गया है, जिसमें स्पष्ट तौर पर sheikh hasina extradition का अनुरोध शामिल है।

सरकारी न्यूज एजेंसी BSS के अनुसार यह पत्र 21 नवंबर (शुक्रवार) को भारत भेजा गया और इसे नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के माध्यम से आगे बढ़ाया गया।

यह पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के बीच तनाव और राजनीतिक संवेदनशीलता को और बढ़ाता है, क्योंकि भारत इस पर अब तक कोई स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाया है।


तीसरी चिट्ठी—पहले भी 20 और 27 दिसंबर को प्रत्यर्पण की मांग हो चुकी

बांग्लादेशी अखबार प्रथोम अलो के मुताबिक अंतरिम सरकार इससे पहले भी दो बार भारत को पत्र भेज चुकी है—

  • 20 दिसंबर

  • 27 दिसंबर

दोनों बार भारत से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
अब तीसरी बार भेजे गए पत्र के बाद ढाका में राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है, और इसे sheikh hasina extradition प्रक्रिया को लेकर बढ़ते दबाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

अंतरिम सरकार का दावा है कि भारत–बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के तहत यह भारत की “जिम्मेदारी” है कि वह हसीना को ढाका के हवाले करे।


ICT-BD ने शेख हसीना को सुनाई मौत की सजा—गैरहाजिरी में फैसला

17 नवंबर को बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने शेख हसीना और उनके गृहमंत्री रहे असदुज्जमान खान कमाल को मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई।
यह फैसला गैरहाजिरी में सुनाया गया क्योंकि दोनों नेता देश छोड़कर भारत आ चुके थे।

ट्रिब्यूनल द्वारा लगाए गए आरोप—

  • हत्या के लिए उकसाने

  • हत्या के आदेश देने

  • छात्रों के आंदोलन के दौरान हिंसा का मास्टरमाइंड

  • 5 अलग-अलग मामलों में अभियुक्त

ICT ने फैसले में कहा कि जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं के पीछे शेख हसीना की सीधी भूमिका थी।
इन घटनाओं ने देश को राजनीतिक संकट में धकेल दिया था।

तीसरे आरोपी पूर्व IGP अब्दुल्ला अल ममून को 5 साल सजा हुई है।
वह इस वक्त हिरासत में हैं और सरकारी गवाह बन चुके हैं।


तख्तापलट के बाद भारत में आ गई थीं शेख हसीना—15 महीने से निर्वासन में

5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में सैन्य–राजनीतिक संकट ने तख्तापलट का रूप ले लिया।
इसके तुरंत बाद—

  • शेख हसीना

  • पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान कमाल

दोनों देश छोड़कर भारत आ गए
दोनों लगभग 15 महीने से भारत में ही रह रहे हैं

ढाका की अंतरिम सरकार का कहना है कि जब तक sheikh hasina extradition नहीं होता, तब तक कानूनी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।

साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि असदुज्जमान कमाल भी भारत में ही छिपे हैं, हालांकि इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


ढाका का बड़ा दावा—“संधि के तहत भारत को हसीना को सौंपना ही होगा”

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच जो प्रत्यर्पण संधि है, उसके अनुसार—

  • भारत की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है

  • कि वह ढाका में अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए व्यक्ति को सौंपे

  • और न्याय प्रक्रिया को पूरा होने दे

अंतरिम सरकार ने कहा है कि मामले की गंभीरता देखते हुए भारत को जल्द कदम उठाना चाहिए।
ये बयान स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि sheikh hasina extradition अब केवल कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक और द्विपक्षीय तनाव का केंद्र बन चुका है।


आरोप राजनीतिक या कानूनी?—बांग्ला राजनीति में टकराव चरम पर

हसीना के समर्थकों का कहना है कि—

  • यह मुकदमा राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है

  • नए शासन ने विपक्ष को दबाने की रणनीति अपनाई है

  • इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल का उपयोग राजनीतिक सफाई के लिए किया जा रहा है

वहीं अंतरिम सरकार का दावा है कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुसार हुआ है और किसी भी तरह का राजनीतिक पक्षपात इसमें शामिल नहीं है।

विश्लेषकों का मानना है कि ढाका की लगातार तीन चिट्ठियाँ यह दिखाती हैं कि मामला राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है और आने वाले महीनों में यह भारत–बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित कर सकता है।


भारत की अब तक की चुप्पी—कूटनीतिक गणित जटिल

भारत की ओर से अब तक—

  • न कोई आधिकारिक जवाब

  • न कोई प्रतिक्रिया बयान

  • न प्रत्यर्पण पर कोई संकेत

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत इस मुद्दे पर बेहद सावधानी बरत रहा है, क्योंकि—

  • शेख हसीना भारत की पारंपरिक मित्र रहीं

  • बांग्लादेश में उनकी वापसी से देश में राजनीतिक हिंसा बढ़ सकती है

  • भारत के बंगाल–उत्तर–पूर्व पर इसका प्रभाव पड़ सकता है

इस चुप्पी को एक “रणनीतिक मौन” के रूप में देखा जा रहा है।


बांग्लादेश द्वारा तीसरी बार भेजी गई चिट्ठी के बाद ‘sheikh hasina extradition’ एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की मौत की सजा, तख्तापलट का राजनीतिक इतिहास और भारत की रणनीतिक चुप्पी—इन सबने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखा जाएगा कि क्या भारत प्रत्यर्पण संधि के तहत ठोस कदम उठाता है या मामला कूटनीतिक तनाव में बदलता है।

 

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