उत्तर प्रदेश

जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद मॉड्यूल में बड़ी खलबली: Dr. Shaheen के PAN–पासपोर्ट ने बढ़ाई एजेंसियों की नींद, सऊदी फंडिंग से लेकर नेटवर्क तक खंगाल रही ATS

फरीदाबाद स्थित जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल की अहम सदस्य मानी जा रही Dr. Shaheen की पहचान, गतिविधियों और वित्तीय रिकॉर्ड ने जांच एजेंसियों के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, शाहीन के PAN कार्ड और पासपोर्ट रिन्यूवल रिकॉर्ड में कई गड़बड़ियां और अस्पष्ट जानकारियां मिली हैं, जिससे उसके नेटवर्क, बैंकिंग कनेक्शन और संभावित आतंकी फंडिंग की कड़ियां जोड़ना कठिन हो रहा है।

यह मामला अब jaish module faridabad की जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।


फरीदाबाद से नया PAN, पहले लखनऊ से पासपोर्ट—शाहीन की पहचान के कई पते

जांच में पता चला है कि—

  • डॉ. शाहीन ने फरीदाबाद से नया PAN कार्ड बनवाया

  • पासपोर्ट का ताज़ा रिन्यूवल उन्होंने छह महीने पहले दिल्ली में कराया

  • इससे पहले उनका पासपोर्ट लखनऊ से रिन्यू हुआ था

इस बदलाव ने एजेंसियों को चौंकाया है, क्योंकि—

  • पुराने PAN कार्ड का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं

  • उसके नाम पर बैंक खातों, निवेश और लेनदेन का पता नहीं चल पा रहा

  • पुराने वित्तीय दस्तावेज़ों की लोकेशन संदिग्ध है

यही वजह है कि jaish module faridabad को समझने में कई कड़ियां अब भी गायब हैं।


सऊदी अरब में चार साल की नौकरी—क्या वहीं खुला फंडिंग का रास्ता?

सूत्रों का दावा है कि शाहीन सऊदी अरब के एक अस्पताल में चार साल कार्यरत रही।
इसी दौरान उसने—

  • स्थानीय बैंक अकाउंट खोले

  • अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर किए

  • भारत लौटने पर नया PAN कार्ड बनवाया

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि—

  • क्या उसकी आय का कोई हिस्सा भारत में आतंकी गतिविधियों की ओर गया?

  • क्या सऊदी बैंक अकाउंट से जैश मॉड्यूल को फंडिंग होती रही?

  • क्या विदेश में बैठकर उसने भारत में ‘स्लीपर सेल सिस्टम’ को एक्टिव किया?

अभी तक उसकी सऊदी फाइल सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि jaish module faridabad में विदेशी फंडिंग की आशंका पहले ही जताई जा चुकी है।


शाहीन का भाई भी जांच के दायरे में—डॉ. परवेज के खातों की गहन छानबीन

शाहीन के भाई डॉ. परवेज का PAN कार्ड लखनऊ से जारी हुआ था।
एजेंसियां अब—

  • परवेज के सभी बैंक खाते

  • बीते वर्षों के आय–व्यय रिकॉर्ड

  • इनकम टैक्स फाइलिंग

  • लखनऊ के मेडिकल सर्कल से उसके संपर्क

सबकी जांच कर रही हैं।

परवेज इंट्रीग्रल यूनिवर्सिटी में काम करता था।
ATS उसके—

  • सहकर्मियों

  • छात्रों

  • और उसके निकट संपर्कों

की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है।
जांच अभी इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है कि क्या परवेज ने विश्वविद्यालय के किसी ग्रुप या स्टूडेंट सेटअप को गलत दिशा में प्रभावित किया।


प्रयागराज में 4 संदिग्धों की पूछताछ—जम्मू-कश्मीर से आए थे चंदा बटोरने

ATS ने प्रयागराज से चार युवकों को पकड़ा, जो—

  • जम्मू-कश्मीर के रहने वाले

  • दान और चंदा इकट्ठा करने

  • और धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों के नाम पर घूम रहे थे

एटीएस की गहन पूछताछ के बाद—

  • Jammu & Kashmir पुलिस से सत्यापन हुआ

  • कोई आपराधिक गतिविधि नहीं मिली

  • इसके बाद सभी को छोड़ दिया गया

हालांकि, ATS ने इस कार्रवाई को jaish module faridabad के संदर्भ में संभावित कनेक्शन की जांच का हिस्सा बताया है।


सहारनपुर से अमरोहा तक 14 डॉक्टरों से पूछताछ—कई मेडिकल नेटवर्क रडार पर

फरीदाबाद मॉड्यूल के संपर्क में रहे—

  • सहारनपुर

  • मुरादाबाद

  • अमरोहा

  • और पश्चिम यूपी के कई अन्य जिलों

के करीब 14 डॉक्टरों से ATS पूछताछ कर चुकी है।

इन डॉक्टरों का संपर्क—

  • कश्मीरी डॉक्टरों

  • लखनऊ मेडिकल सर्कल

  • और शाहीन–परवेज नेटवर्क

से रहा था।
हालांकि अब तक उनकी गतिविधियों में कोई संदिग्ध संकेत नहीं मिला और किसी को हिरासत में नहीं लिया गया।


ATS छह और कश्मीरी डॉक्टरों की तलाश में—जम्मू-कश्मीर पुलिस को भेजा इनपुट

फरीदाबाद मॉड्यूल की जांच में ATS को छह कश्मीरी मूल के डॉक्टरों के नाम मिले हैं, जो—

  • परवेज के संपर्क में थे

  • कुछ मेडिकल समूहों में सक्रिय थे

  • और संभवतः विदेश यात्राओं में भी शामिल थे

सूत्र बताते हैं कि—

  • इनमें से दो डॉक्टर तीन साल पहले इस्लामाबाद भी गए

  • उनकी विदेश यात्रा के उद्देश्य की जांच की जा रही है

  • जम्मू-कश्मीर पुलिस को ट्रेसिंग में मदद के लिए अनुरोध भेजा गया है

यह सभी नाम अब jaish module faridabad की मुख्य जांच में शामिल हो चुके हैं।


क्या फरीदाबाद मॉड्यूल एक बड़े नेटवर्क की सिर्फ शुरुआत है?

विश्लेषकों का कहना है कि—

  • डॉक्टर्स, मेडिकल स्टाफ और विदेशी नौकरी वाले व्यक्तियों का जैश मॉड्यूल में शामिल होना बेहद संवेदनशील मसला है

  • PAN–पासपोर्ट में गड़बड़ियां यह दिखाती हैं कि पहचान छिपाने की कोशिश हुई

  • सऊदी से फंडिंग की कड़ी सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है

  • डॉक्टर नेटवर्क का उपयोग आतंकी लॉजिस्टिक्स या सपोर्ट सिस्टम के लिए किया जाना संभव है

ATS अभी हर एंगल की बारीकी से जांच कर रही है, क्योंकि यह मॉड्यूल अकेला नहीं बल्कि बड़े नेटवर्क की एक शाखा हो सकता है।


डॉ. शाहीन के PAN और पासपोर्ट रिकॉर्ड में सामने आई गड़बड़ियों ने ‘jaish module faridabad’ की जांच को और पेचीदा बना दिया है। सऊदी में चार साल की नौकरी, लखनऊ और फरीदाबाद से अलग-अलग डॉक्यूमेंट, भाई डॉ. परवेज का मेडिकल नेटवर्क और कश्मीरी डॉक्टरों का संपर्क—ये सभी तत्व मिलकर इस मॉड्यूल को कई दिशाओं से जोड़ते हैं। ATS लगातार बैंक अकाउंट, विदेश यात्राओं और मेडिकल सर्कल की गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि विदेशी फंडिंग और आतंकी नेटवर्क की सच्चाई सामने लाई जा सके।

 

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