मोदी–Jordan रिश्तों की नई इबारत: 7 साल बाद ऐतिहासिक वापसी, IMEC से लेकर व्यापार और विरासत तक क्यों अहम है यह दौरा
Modi Jordan visit एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की त्रिपक्षीय यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। इस बहुपक्षीय दौरे का पहला पड़ाव जॉर्डन है, जहां वे किंग अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर पहुंच रहे हैं। यह दौरा सामान्य राजनयिक औपचारिकता से कहीं आगे माना जा रहा है, क्योंकि इसके पीछे इतिहास, रणनीति, व्यापार और भू-राजनीति के कई गहरे सूत्र जुड़े हुए हैं।
2018 की ट्रांजिट विजिट से 2025 की औपचारिक यात्रा तक का सफर
तारीख थी 10 फरवरी 2018। प्रधानमंत्री मोदी फिलिस्तीन की ऐतिहासिक यात्रा पर जा रहे थे। उस समय भारत से फिलिस्तीन के लिए कोई सीधी उड़ान उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण उनका विमान जॉर्डन की राजधानी अम्मान में उतरा। यह केवल दो घंटे की ट्रांजिट विजिट थी।
आमतौर पर ऐसे अल्प प्रवास में सिर्फ औपचारिक अधिकारी ही मिलते हैं, लेकिन उस दिन तस्वीर कुछ अलग थी। इतने कम समय के बावजूद जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय स्वयं मोदी से मिलने पहुंचे। एयरपोर्ट के पास हुई यह मुलाकात छोटी जरूर थी, लेकिन इसके कूटनीतिक संकेत बेहद बड़े थे।
इस ऐतिहासिक क्षण के महज 15 दिन बाद किंग अब्दुल्ला भारत दौरे पर पहुंचे। तब प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए एयरपोर्ट जाकर उनका स्वागत किया। उस समय इसे भारत-जॉर्डन रिश्तों में विश्वास और सम्मान का बड़ा प्रतीक माना गया।
अब 7 साल बाद Modi Jordan visit फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार एजेंडा और भी व्यापक है।
भारत–जॉर्डन संबंधों के 75 वर्ष: रिश्तों का ऐतिहासिक पड़ाव
भारत और जॉर्डन ने 1950 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। वर्ष 2025 में इन संबंधों के 75 साल पूरे हो रहे हैं। इसी ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी का जॉर्डन दौरा हो रहा है।
इन सात दशकों में दोनों देशों के रिश्ते केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि व्यापार, शिक्षा, रक्षा सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान तक विस्तृत हुए हैं।
आज भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है।
2023-24 में दोनों देशों के बीच 26,033 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ, जिसमें भारत का निर्यात लगभग 13,266 करोड़ रुपये रहा।
दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर (करीब 45,275 करोड़ रुपये) तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है।
व्यापार, निवेश और कच्चे माल की मजबूत कड़ी
Modi Jordan visit का एक बड़ा फोकस आर्थिक सहयोग है। भारत जॉर्डन से रॉक फॉस्फेट और उर्वरक उद्योग के लिए कच्चा माल बड़ी मात्रा में आयात करता है।
वहीं जॉर्डन भारत से—
मशीनरी
पेट्रोलियम उत्पाद
अनाज
रसायन
मीट
ऑटो पार्ट्स
औद्योगिक उपकरण
का आयात करता है।
भारतीय कंपनियों ने जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल सेक्टर में 1.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। यह निवेश न केवल व्यापारिक संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि रोजगार और तकनीकी साझेदारी को भी बढ़ावा देता है।
IMEC कॉरिडोर: दौरे का सबसे रणनीतिक एजेंडा
भारत में G20 समिट 2023 के दौरान पहली बार इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) का ऐलान किया गया था।
यह एक अंतरराष्ट्रीय ट्रेड रूट योजना है, जिसके जरिए भारत का सामान मिडिल ईस्ट होते हुए सीधे यूरोप तक पहुंचेगा।
IMEC को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि 7 अक्टूबर 2023 को हमास-इजराइल संघर्ष के बाद इस परियोजना के भविष्य पर सवाल उठे, लेकिन अब गाजा युद्ध के रुकते ही यह कॉरिडोर फिर चर्चा में है।
Modi Jordan visit के दौरान IMEC पर ठोस बातचीत की उम्मीद जताई जा रही है।
जॉर्डन और इजराइल में अधूरा रेल नेटवर्क
IMEC में भारत, UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजराइल, ग्रीस, इटली, फ्रांस, अमेरिका, जर्मनी और यूरोपीय यूनियन शामिल हैं।
इस प्रोजेक्ट के तहत समुद्री और रेल मार्गों को जोड़कर एक तेज़ और किफायती ट्रेड नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
सऊदी अरब में 1200 किलोमीटर लंबा रेलमार्ग पहले ही तैयार हो चुका है, लेकिन जॉर्डन से इजराइल तक रेल नेटवर्क पर काम बाकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस हिस्से में तेजी लाने के लिए मोदी का यह दौरा निर्णायक साबित हो सकता है।
यूरोप तक भारतीय सामान: 40% समय और 30% लागत की बचत
IMEC को यूरोप और साउथ एशिया को जोड़ने वाला भविष्य का सबसे अहम कॉरिडोर माना जा रहा है।
फिलहाल भारत से यूरोप तक कार्गो स्वेज कैनाल और लाल सागर से होकर जाता है, जो लंबा और भीड़भाड़ वाला मार्ग है।
IMEC की कुल लंबाई लगभग 6000 किलोमीटर है।
अटलांटिक काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार—
भारत से यूरोप तक माल पहुंचाने में 40% समय की बचत
30% तक लागत में कमी
संभव है।
अभी भारत से जर्मनी तक किसी शिप को पहुंचने में लगभग 36 दिन लगते हैं, जबकि IMEC से 14 दिन की बचत होगी।
किंग अब्दुल्ला द्वितीय: ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत
जॉर्डन के राजा किंग अब्दुल्ला द्वितीय को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का सबसे करीबी वंशज माना जाता है। वे हाशिमी राजवंश से आते हैं, जिसका संबंध सीधे बनू हाशिम से जुड़ता है।
इस राजवंश ने करीब 700 वर्षों तक मक्का पर शासन किया।
जॉर्डन एक संवैधानिक राजशाही है, जहां संविधान के अनुसार सत्ता का उत्तराधिकारी हाशिमी वंश से ही होता है और राजगद्दी पिता से बेटे को मिलती है।
मिडिल ईस्ट का ‘नो ऑयल’ देश जॉर्डन
जॉर्डन मिडिल ईस्ट का ऐसा देश है, जहां तेल के भंडार नहीं हैं। हालांकि तेल न होने के बावजूद जॉर्डन के पास फॉस्फेट और पोटाश की भरपूर उपलब्धता है, जो उर्वरक उद्योग के लिए बेहद अहम हैं।यही वजह है कि भारत-जॉर्डन आर्थिक रिश्तों में उर्वरक और खनिज क्षेत्र की भूमिका केंद्रीय बनी हुई है।
Modi Jordan visit: कूटनीति, व्यापार और भविष्य की दिशा
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।
IMEC, व्यापार विस्तार, निवेश और ऐतिहासिक रिश्तों के 75 वर्ष—इन सभी पहलुओं के कारण यह यात्रा आने वाले वर्षों की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है।

