उत्तर प्रदेश

Pilibhit- निकाह फर्जीवाड़ा केस में बड़ा मोड़: KGMU डॉक्टर रमीज मलिक के कथित निकाह कराने वाले काजी पर गैर-जमानती वारंट, गिरफ्तारी की तैयारी

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े रेजीडेंट डॉक्टर रमीज मलिक के खिलाफ दर्ज शादी का झांसा, यौन शोषण और कथित धर्म परिवर्तन के मामले में अब कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया है। इस प्रकरण में डॉक्टर का फर्जी निकाह कराने के आरोप में Pilibhit निवासी काजी के खिलाफ लखनऊ कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी किया है, जिससे मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है।


🔴 कोर्ट का सख्त रुख, काजी पर कार्रवाई का आदेश

लखनऊ की अदालत ने पीलीभीत के काजी जाहिद हसन राना के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जांच में सहयोग न करने और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए गिरफ्तारी जरूरी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद लखनऊ की चौक कोतवाली पुलिस ने पीलीभीत पुलिस से औपचारिक सहयोग मांगा है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, लखनऊ पुलिस की एक विशेष टीम जल्द पीलीभीत पहुंच सकती है और काजी की तलाश में दबिश दी जा सकती है। स्थानीय पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि नियमानुसार हर स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जाए।


🔴 कैसे खुली फर्जी निकाह की परतें

यह मामला उस समय सामने आया, जब केजीएमयू में अध्ययनरत एक छात्रा ने चौक कोतवाली, लखनऊ में तहरीर देकर रेजीडेंट डॉक्टर रमीज मलिक पर शादी का झांसा देकर यौन शोषण और कथित धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

इसके बाद पुलिस ने कथित निकाह की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि डॉक्टर मूल रूप से पीलीभीत के न्यूरिया क्षेत्र का रहने वाला है और निकाह भी पीलीभीत में दर्शाया गया था। पुलिस को इनपुट मिला कि यह निकाह शहर कोतवाली क्षेत्र के फीलखाना मोहल्ले में काजी जाहिद हसन राना ने कराया था।


🔴 दस्तावेजों में फर्जीवाड़े का खुलासा

सात जनवरी को लखनऊ पुलिस ने पीलीभीत पुलिस के सहयोग से काजी और कथित गवाह के घर पर छानबीन की। जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि न तो डॉक्टर और न ही युवती निकाह के लिए पीलीभीत आए थे।

पुलिस के अनुसार, काजी और गवाह की भूमिका दिखाते हुए कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए थे। यही से मामला फर्जी निकाह और दस्तावेजी धोखाधड़ी की दिशा में मुड़ गया।


🔴 गवाह की गिरफ्तारी, जांच तेज

इस मामले में मोहल्ले का ही सारिक नामक युवक गवाह बताया गया था। लखनऊ पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर उसे पीलीभीत से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि सारिक से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं, जो काजी की भूमिका की ओर इशारा करती हैं।

गवाह की गिरफ्तारी के बाद ही काजी जाहिद हसन राना का नाम औपचारिक रूप से एफआईआर में जोड़ा गया और कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी कराया गया।


🔴 लखनऊ और पीलीभीत पुलिस का समन्वय

Pilibhit fake nikah case में लखनऊ और पीलीभीत पुलिस के बीच समन्वय बढ़ा दिया गया है। चौक कोतवाली पुलिस ने पीलीभीत कोतवाली को लिखित रूप से सूचित किया है कि काजी की गिरफ्तारी के लिए स्थानीय स्तर पर हर संभव सहायता दी जाए।

पीलीभीत के कोतवाल सत्येंद्र कुमार ने बताया कि कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है और लखनऊ पुलिस के आने पर नियमानुसार पूरी मदद की जाएगी।


🔴 कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि काजी पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी में संलिप्तता साबित होती है, तो उस पर भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराएं लग सकती हैं। गैर-जमानती वारंट यह दर्शाता है कि अदालत इस मामले को हल्के में नहीं ले रही है।


🔴 समाज में गूंज, संवेदनशील मुद्दा बना मामला

Pilibhit fake nikah case केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं रह गया है, बल्कि यह समाज में विश्वास, धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी छू रहा है। सोशल और स्थानीय स्तर पर इस पर चर्चा तेज हो गई है।

कुछ लोग इसे कानून का सख्त पालन मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे सामाजिक ताने-बाने से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि पुलिस और प्रशासन का रुख स्पष्ट है कि जांच तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही आगे बढ़ाई जाएगी।


🔴 आगे क्या? गिरफ्तारी के बाद खुल सकते हैं नए राज

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि काजी की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई नए पहलू सामने आ सकते हैं। यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस तरह के कथित फर्जी निकाह के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था या यह मामला केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित है।

लखनऊ पुलिस ने संकेत दिए हैं कि साक्ष्यों के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।


🔴 प्रशासन की अपील

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच प्रक्रिया को अपना काम करने दें। किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है, इसलिए केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।


KGMU फर्जी निकाह केस में काजी के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट ने इस प्रकरण को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। लखनऊ से लेकर पीलीभीत तक पुलिस की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि मामले की परतें अभी और खुल सकती हैं। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि गिरफ्तारी के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और न्यायिक प्रक्रिया इस संवेदनशील मामले में क्या निष्कर्ष सामने लाती है।

 

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