Rajarama Murder Case में नया मोड़: राकेश तिवारी बोले- ‘एक पल को लगा अपहरण हो गया’, नौ घंटे की पूछताछ के बाद बेगुनाही का दावा
Rajarama murder case ने शनिवार को उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी को लगभग नौ घंटे तक पुलिस हिरासत में रखकर पूछताछ की गई और देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद राकेश तिवारी ने अपनी पूरी आपबीती साझा करते हुए कहा कि हिरासत के शुरुआती क्षणों में उन्हें एक पल के लिए ऐसा लगा मानो उनका अपहरण हो गया हो।
यह बयान न केवल Kanpur के कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया, बल्कि सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीति में भी हलचल मचा गया है।
🔴 हिरासत का पल: ‘बिना बताए गाड़ी में बैठा दिया गया’
राकेश तिवारी के मुताबिक, वह कचहरी से एनआरआई सिटी पहुंचे थे और मिनी बाजार से कुछ सामान खरीदकर बाहर निकले ही थे कि अचानक चार-पांच गाड़ियों से उतरे 20 से 25 लोग उन्हें घेरकर खड़े हो गए। सभी सादी वर्दी में थे। किसी ने कोई पहचान नहीं बताई, सिर्फ इतना कहा कि गाड़ी में बैठिए।
उन्होंने बताया कि गाड़ी में बैठने के बाद उन्होंने एक पुलिसकर्मी को पहचान लिया, तब जाकर समझ आया कि उन्हें हिरासत में लिया गया है। राकेश का दावा है कि गाड़ियों पर पुलिस के स्पष्ट निशान नहीं थे और नंबर प्लेट पर मिट्टी जमी होने से नंबर पढ़े नहीं जा सकते थे।
🔴 परिवार में मची हलचल, पुलिस कमिश्नर तक पहुंची बात
राकेश के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी उनके घर तक नहीं पहुंची थी। बेटे ने जब बार एसोसिएशन के मौजूदा महामंत्री को फोन किया, तब पुलिस कमिश्नर से बात हुई और यह स्पष्ट हुआ कि राकेश को हिरासत में लिया गया है।
राकेश ने कहा कि शहर के किसी भी थाने में उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। उन्होंने दावा किया कि न तो कभी उनके खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई हुई और न ही कोई आपराधिक मुकदमा।
🔴 साजिश का आरोप: ‘मुझे फंसाने की कोशिश’
रिहाई के बाद राकेश तिवारी ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की ओर से उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी भी जांच अधिकारी द्वारा पूछताछ के लिए पहले नहीं बुलाया गया था, बल्कि सीधे हिरासत में लेकर ले जाया गया।
उनका कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया न केवल चौंकाने वाली थी, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाने वाली है।
🔴 नौ घंटे की पूछताछ: हर सवाल का जवाब देने का दावा
पुलिस ने राकेश से लगभग नौ घंटे तक लगातार पूछताछ की। पूछताछ का केंद्र बिंदु अधिवक्ता राजाराम वर्मा की हत्या, उनकी बहू के साथ हुए जमीन के सौदे, राजाराम के बेटे नरेंद्र से राकेश के संबंध और राकेश के ड्राइवर की पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप रहे।
राकेश का कहना है कि उन्होंने हर सवाल का जवाब दिया और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए पुलिस के सामने पूरा पक्ष रखा। साथ ही, उन्होंने जांच अधिकारियों को कुछ अन्य बिंदुओं पर भी विवेचना करने का सुझाव दिया।
🔴 ‘मेरे सामने लिखी गई थी तहरीर’
राकेश तिवारी ने बताया कि जब अधिवक्ता राजाराम वर्मा की हत्या हुई थी, उस समय वह बार एसोसिएशन के महामंत्री थे। सूचना मिलते ही वह तत्कालीन अध्यक्ष बलजीत यादव और उपाध्यक्ष अजय शर्मा के साथ रीजेंसी अस्पताल पहुंचे।
उन्होंने दावा किया कि पुलिस को सूचना दी गई और पोस्टमार्टम हाउस भी गए। राकेश के अनुसार, राजाराम के बेटे ने उन्हीं के सामने तहरीर लिखी थी और फिर थाने जाकर मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस ने बाद में आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा भी कर दिया था।
🔴 जमीन सौदे का विवाद: करोड़ों की डील और निरस्त एग्रीमेंट
राकेश ने बताया कि राजाराम के सौतेले भाई राज बहादुर ने उनके मित्र नवीन मिश्रा से संपर्क कर जमीन बेचने की बात की थी। सौदा लगभग 12 बीघा जमीन का था, जिसकी कीमत करीब 6 करोड़ 80 लाख रुपये तय हुई।
राकेश के अनुसार, उन्होंने 2 करोड़ 75 लाख रुपये का भुगतान कर चार एग्रीमेंट कराए। तय हुआ था कि परिवार से जुड़े मुकदमे खत्म होने के बाद रजिस्ट्री होगी। लेकिन बाद में पैसों की व्यवस्था न होने के कारण उन्होंने केवल 15 बिस्वा जमीन की रजिस्ट्री कराई और बाकी एग्रीमेंट निरस्त करवा दिए, जिसकी रकम उन्हें वापस मिल गई।
🔴 नरेंद्र से रिश्ते और कानूनी पैरवी
राकेश तिवारी ने यह भी कहा कि राजाराम के बेटे नरेंद्र देव के अधिवक्ता भले ही धीरज सैनी थे, लेकिन कई मामलों में वह खुद नरेंद्र की पैरवी करते थे।
उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ और उसे जेल जाना पड़ा, तब भी वह उसके साथ थे और उसे जेसीपी के पास लेकर गए थे।
राकेश का सवाल है कि अगर वह राजाराम की हत्या में शामिल होते, तो नरेंद्र उनसे अपने मुकदमों की पैरवी क्यों करवाता?
🔴 नए आरोप और दबाव की बात
राकेश ने यह भी आरोप लगाया कि नरेंद्र ने पहले दिए गए प्रार्थना पत्रों में उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया था। बाद में अचानक नए प्रार्थना पत्र दिए गए, जिनमें उन पर सवाल उठाए गए।
उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय होना चाहिए कि आखिर किसके दबाव में यह कदम उठाया गया।
🔴 पुलिस का रुख और जांच की दिशा
पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है। उनका कहना है कि जांच प्रक्रिया के तहत सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है और हर व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है, जिसका नाम या भूमिका किसी भी स्तर पर सामने आ रही है।
🔴 कानूनी हलकों में चर्चा
कानपुर के वकीलों और बार एसोसिएशन के सदस्यों के बीच इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज है। कुछ लोग इसे जांच का सामान्य हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे प्रतिष्ठा पर हमला बता रहे हैं।
🔴 आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आने वाले दिनों में और भी लोगों से पूछताछ हो सकती है। जमीन सौदे, पारिवारिक विवाद और पुराने कानूनी रिश्ते—ये सभी बिंदु जांच के केंद्र में रहेंगे।

