ग्लोबल टैरिफ की आंधी में भी सुरक्षित India–US Trade Deal: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रम्प का बड़ा ऐलान, ट्रेड एग्रीमेंट पहले की तरह आगे बढ़ेगा
India US trade deal tariffs पर उठे तमाम सवालों के बीच अमेरिका से एक स्पष्ट और सख्त संदेश सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले और इसके कुछ ही घंटों बाद दुनियाभर पर 10% नया ग्लोबल टैरिफ लगाने के ऐलान के बावजूद भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पहले की तरह आगे बढ़ेगा। यह बात खुद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कही है।
शुक्रवार को ट्रम्प ने कहा कि भारत के साथ होने जा रहे समझौते पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ेगा और यह तय समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़ेगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक व्यापार जगत में अनिश्चितता और असमंजस का माहौल बना हुआ है।
🔴 US Supreme Court के फैसले के बाद भी ट्रम्प का आक्रामक टैरिफ रुख
शुक्रवार को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में पूर्व में लागू कुछ टैरिफ व्यवस्थाओं को रद्द कर दिया। इस फैसले को वैश्विक व्यापार के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन महज तीन घंटे के भीतर ही ट्रम्प ने दुनिया को चौंकाते हुए 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया।
ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि वह एक ऐसे आदेश पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, जिसके तहत सभी देशों पर 10% अतिरिक्त ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा। यह टैरिफ पहले से लागू बेसलाइन टैरिफ के ऊपर होगा, यानी मौजूदा टैक्स के अलावा यह अतिरिक्त बोझ भी जोड़ा जाएगा।
🔴 भारत-अमेरिका डील पर क्यों नहीं पड़ेगा असर
India US trade deal tariffs को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या यह नया 10% ग्लोबल टैरिफ भारत पर भी लागू होगा और क्या इससे द्विपक्षीय समझौते की शर्तें बदलेंगी। ट्रम्प ने अपने बयान में साफ किया कि भारत के साथ होने वाले समझौते पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह अतिरिक्त 10% टैरिफ भारत के लिए पहले से तय 18% दर में समाहित किया जाएगा या अलग से लगाया जाएगा। इस बिंदु पर ट्रम्प ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन संकेत यही हैं कि भारत को रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में अलग रखा जाएगा।
🔴 फरवरी के अंत तक फाइनल होगी अंतरिम ट्रेड डील
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को जानकारी दी कि अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौता फरवरी के अंत तक फाइनल कर लिया जाएगा। मार्च में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर होंगे और अप्रैल से यह समझौता पूरी तरह लागू हो जाएगा।
पीयूष गोयल ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले महीनों में भारत दुनिया के कई बड़े देशों के साथ व्यापारिक समझौतों पर अंतिम मुहर लगाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। यह भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
🔴 23 फरवरी से अमेरिका में अहम बैठक, कानूनी ड्राफ्ट पर काम
23 फरवरी से भारत और अमेरिका के अधिकारी अमेरिका में तीन दिनों की एक बेहद अहम बैठक करेंगे। इस बैठक का उद्देश्य 7 फरवरी को जारी संयुक्त वक्तव्य के आधार पर इस समझौते का कानूनी ड्राफ्ट तैयार करना है।
इस भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के चीफ नेगोशिएटर दर्पण जैन करेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी दौरान टैक्स दरों को 25% से घटाकर 18% करने का आधिकारिक आदेश भी जारी हो सकता है।
🔴 कपड़ा, चमड़ा और जेम्स-ज्वैलरी सेक्टर को बड़ा फायदा
India US trade deal tariffs में संभावित कटौती से भारत के कई श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा और जेम्स-ज्वैलरी जैसे सेक्टर अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।
इन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ने से न सिर्फ विदेशी मुद्रा आय में इजाफा होगा, बल्कि देश में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उद्योग जगत इस समझौते को भारत के निर्यात के लिए एक निर्णायक मोड़ मान रहा है।
🔴 कृषि उत्पाद, GM फूड और रणनीतिक शर्तें
7 फरवरी को जब इस ट्रेड डील का ऐलान किया गया था, तब पीयूष गोयल ने साफ किया था कि भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात की अनुमति मिलेगी। वहीं अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में कोई विशेष टैरिफ छूट नहीं दी गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस समझौते के तहत जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फूड को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है। यह फैसला भारतीय किसानों और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
🔴 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार और 50 हजार करोड़ डॉलर की खरीद
इस अंतरिम समझौते को भारत के लिए एक विशाल अवसर के रूप में देखा जा रहा है। पीयूष गोयल के अनुसार, यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार के दरवाजे खोलेगा।
इसके साथ ही भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 50 हजार करोड़ डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते और मजबूत होंगे।
🔴 नॉन-टैरिफ बैरियर्स हटाने पर खास फोकस
India US trade deal tariffs के साथ-साथ दोनों देशों ने नॉन-टैरिफ बैरियर्स को दूर करने पर भी सहमति जताई है। ये वे बाधाएं होती हैं जो सीधे टैक्स से जुड़ी नहीं होतीं, लेकिन व्यापार को जटिल और महंगा बना देती हैं।
अमेरिकी मेडिकल डिवाइस कंपनियां लंबे समय से भारत में मूल्य निर्धारण नियमों और रजिस्ट्रेशन में देरी जैसी समस्याओं का सामना कर रही थीं। इस समझौते के तहत इन मुद्दों पर भी समाधान खोजने की कोशिश की जाएगी।
🔴 ब्रिटेन और ओमान के साथ भी अप्रैल से नई शुरुआत
भारत की व्यापारिक कूटनीति केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। अप्रैल से ब्रिटेन और ओमान के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने की उम्मीद है।
ब्रिटेन के साथ हुए समझौते के तहत भारत के 99% उत्पादों को जीरो ड्यूटी पर एंट्री मिलेगी, जबकि भारत ब्रिटेन से आने वाली कारों और स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स में कटौती करेगा। ओमान ने भारत के 98% से अधिक उत्पादों पर जीरो ड्यूटी की पेशकश की है, जिससे खाड़ी बाजारों में भारतीय निर्यात को मजबूती मिलेगी।

