उत्तर प्रदेश

फेसबुक Honey Trap में फंसा नौसेना का जवान! आईएसआई हैंडलर को युद्धपोत की लोकेशन भेजने के आरोप में आदर्श उर्फ लकी गिरफ्तार

Naval Honey Trap Case ने देश की सुरक्षा एजेंसियों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है। सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा रचे गए कथित हनी ट्रैप जाल में फंसकर भारतीय नौसेना के एक जवान ने संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा कर दी। इस मामले में उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने नौसेना में तैनात जवान आदर्श कुमार उर्फ लकी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर दोस्ती के बाद आईएसआई के हैंडलर को युद्धपोत से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं, तस्वीरें और लोकेशन भेजीं।

यह मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से चल रहे जासूसी नेटवर्क को लेकर गंभीर जांच शुरू कर दी है।


कोच्चि में तैनात नौसैनिक की गिरफ्तारी

जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी आदर्श कुमार उर्फ लकी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के कागारौल थाना क्षेत्र के चीतपुर गांव का रहने वाला है। वह भारतीय नौसेना में तैनात था और उसकी पोस्टिंग केरल के कोच्चि स्थित दक्षिणी नेवल कमांड में थी।

सोमवार को उत्तर प्रदेश एटीएस की टीम ने उसे गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे लखनऊ लाया गया और अदालत में पेश किया गया। कोर्ट में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कथित तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े हैंडलर को युद्धपोतों से संबंधित जानकारी साझा की थी।


सोशल मीडिया से शुरू हुआ संपर्क

जांच में सामने आया है कि आरोपी नौसैनिक का संपर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से हुआ था। शुरुआत में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक महिला की आईडी के जरिए दोस्ती का सिलसिला शुरू हुआ।

बताया गया कि यह आईडी कथित रूप से आईएसआई के एक हैंडलर द्वारा संचालित की जा रही थी। महिला की प्रोफाइल पर आकर्षक तस्वीरें और फर्जी जानकारी दी गई थी, जिससे सैन्य कर्मियों को आसानी से जाल में फंसाया जा सके।

दोस्ती बढ़ने के बाद दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला व्हाट्सएप और मैसेंजर तक पहुंच गया। इसके बाद आरोपी और कथित महिला के बीच वॉइस कॉल और वीडियो कॉल भी होने लगे।


तीन साल पहले हनी ट्रैप में फंसा था आरोपी

जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी करीब तीन साल पहले हनी ट्रैप का शिकार बना था। इंस्टाग्राम पर “आशी” नाम से बनाई गई एक आईडी के जरिए उससे संपर्क किया गया।

धीरे-धीरे बातचीत दोस्ती में बदल गई और फिर कथित हैंडलर ने उससे भरोसा जीत लिया। इसके बाद उससे नौसेना से जुड़ी जानकारी और युद्धपोतों की तस्वीरें भेजने के लिए कहा गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कई बार युद्धपोत की तस्वीरें और उनकी लोकेशन भेजी थीं।


सूचनाओं के बदले खाते में भेजे जाते थे पैसे

एटीएस सूत्रों के अनुसार आरोपी को गोपनीय सूचनाएं साझा करने के बदले पैसे भी दिए जाते थे।

बताया जा रहा है कि आरोपी के बैंक खाते में कई बार में हजारों रुपये भेजे गए थे। इन पैसों का उपयोग वह अपने निजी शौक पूरे करने के लिए करता था।

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस लेनदेन में और कौन-कौन लोग शामिल थे।


शादी के बाद दुबई गया था हनीमून पर

सूत्रों के मुताबिक आरोपी की हाल ही में शादी हुई थी और वह अपनी पत्नी के साथ हनीमून मनाने दुबई गया था

विदेश से लौटने के बाद ही सुरक्षा एजेंसियों ने उसे हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।

जांच में सामने आया कि पिछले दो वर्षों से एटीएस और नौसेना की खुफिया इकाइयां उसके बारे में गुप्त रूप से जानकारी जुटा रही थीं।


फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सक्रिय है हनी ट्रैप नेटवर्क

जांच एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने सोशल मीडिया के जरिए जासूसी का एक संगठित नेटवर्क तैयार कर रखा है।

इस नेटवर्क में कई युवतियों को एजेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। उनके नाम से फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी प्रोफाइल बनाई जाती हैं।

इन प्रोफाइल में आकर्षक तस्वीरें और फर्जी पहचान डाली जाती है। इसके बाद सैन्य कर्मियों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर उनसे संपर्क स्थापित किया जाता है।

धीरे-धीरे बातचीत दोस्ती में बदल जाती है और फिर संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।


हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग के तरीके

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में दो प्रमुख तरीके अपनाए जाते हैं।

पहला तरीका यह होता है कि कथित महिला एजेंट सैन्य कर्मियों से दोस्ती बढ़ाकर उनसे भावनात्मक संबंध बनाने की कोशिश करती है। इस दौरान प्यार भरी बातें और निजी बातचीत के जरिए भरोसा जीता जाता है।

दूसरे तरीके में कई बार अश्लील वीडियो कॉल या निजी बातचीत के जरिए व्यक्ति को हनी ट्रैप में फंसा लिया जाता है। बाद में इन रिकॉर्डिंग्स के जरिए उसे ब्लैकमेल कर संवेदनशील जानकारी हासिल की जाती है।


पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह पहला मामला नहीं है जब सोशल मीडिया के जरिए हनी ट्रैप का इस्तेमाल कर गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई हो।

करीब एक साल पहले फिरोजाबाद की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में कार्यरत चार्जमैन रविंदर को भी एटीएस ने गिरफ्तार किया था। उस पर भी गोपनीय सूचनाएं लीक करने का आरोप लगा था।

बताया गया था कि उसे “नेहा शर्मा” नाम की एक कथित हैंडलर ने फेसबुक के माध्यम से अपने जाल में फंसाया था।

उस समय ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में गगनयान मिशन से संबंधित उपकरणों का निर्माण हो रहा था, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील परियोजना थी।


सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता

इस मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। अधिकारियों को आशंका है कि आदर्श कुमार की तरह कुछ अन्य सैन्य कर्मी भी ऐसे जाल में फंस सकते हैं।

इसी कारण इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क का दायरा और भी बड़ा है।


नौसेना में 2021 में हुई थी भर्ती

अधिकारियों के अनुसार आरोपी आदर्श कुमार उर्फ लकी ने वर्ष 2021 में भारतीय नौसेना में नौकरी हासिल की थी

इसके बाद उसकी तैनाती केरल के कोच्चि स्थित दक्षिण नेवल कमांड में की गई थी। वहीं रहते हुए वह सोशल मीडिया के जरिए कथित हैंडलर के संपर्क में आया।


राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले की जांच अब कई एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि सोशल मीडिया के जरिए संचालित इस कथित हनी ट्रैप नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां सैन्य कर्मियों को भी लगातार सतर्क रहने और सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क से बचने की सलाह दे रही हैं, ताकि देश की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी किसी भी तरह से गलत हाथों में न पहुंच सके।

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