ई-रिक्शा चलाने वाली ‘हरिया’ निकली जासूसी नेटवर्क की अहम कड़ी: मीरा ठाकुर की गिरफ्तारी से खुला बड़ा राज, 10 दिन तक मायके वालों को भी नहीं थी खबर -Kaushambi
News-Desk
7 min read
espionage arrest UP, Hariyaa Mathura news, ISI spy network India, Kaushambi, kaushambi news, Meera thakur, Meera Thakur spy case, national security India, sensitive locations surveillance, sleeper cell investigation, spy racket India, UP Police ActionKaushambi कौशांबी पुलिस द्वारा जासूसी के आरोप में गिरफ्तार की गई मीरा ठाकुर उर्फ हरिया की गिरफ्तारी की जानकारी उसके मायके वालों को पूरे 10 दिन बाद मिली, जिससे परिवार पूरी तरह स्तब्ध रह गया।
परिवार को शुरू में शक था कि घरेलू विवाद के चलते उसके पति ने उसे उठवाया होगा, लेकिन रविवार को पुलिस की ओर से मिली आधिकारिक जानकारी ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। तब सामने आया कि मीरा किसी निजी विवाद में नहीं बल्कि देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोपों में गिरफ्तार की गई है।
सादा कपड़ों में आए लोगों ने रात में ले जाकर बढ़ा दी थी आशंका
मीरा के भाई निरोतम ने बताया कि 13 मार्च की रात चार से पांच लोग सादा कपड़ों में आए और मीरा को अपने साथ ले गए। इस घटना के बाद परिवार में चिंता और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
परिवार को लगा कि यह कार्रवाई पुलिस की ओर से पति के कहने पर की गई होगी। इसी आशंका के चलते अगले ही दिन वे सदर बाजार थाने पहुंचे और मीरा के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन पुलिस ने हिरासत में होने से इनकार कर दिया। इससे परिवार की बेचैनी और बढ़ गई।
10 दिनों तक थाने और रिश्तेदारों के चक्कर लगाते रहे परिजन
मायके वालों ने लगातार कई दिनों तक पुलिस थानों और रिश्तेदारों से संपर्क किया, लेकिन कहीं से भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।परिवार के लोग लगातार उसकी तलाश करते रहे और तहरीर भी दी गई, लेकिन मामले की गंभीरता और गोपनीयता के कारण उन्हें वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पाया।
जब रविवार को कौशांबी पुलिस ने बताया कि मीरा को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, तब जाकर पूरे परिवार को असली सच्चाई का पता चला।
दोनों बेटियां नानी के पास, परिवार पूरी तरह हैरान
Meera Thakur espionage case सामने आने के बाद परिवार के सदस्य भावनात्मक रूप से टूट गए हैं। मीरा की दो बेटियां, जिनकी उम्र सात और दस वर्ष बताई जा रही है, फिलहाल अपनी नानी के पास रह रही हैं।
परिवार के अनुसार मीरा का मायके में आना-जाना बहुत कम था और पिछले आठ महीनों से वह अपने पति से अलग रह रही थी।
मैकेनिक से ई-रिक्शा चालक बनी मीरा की जिंदगी का दूसरा चेहरा
जांच में सामने आया कि मीरा पहले मैकेनिक का काम करती थी। वर्ष 2012 में उसकी शादी आगरा के खेरिया मोड़ निवासी मुकेश के साथ हुई थी।शादी के दो साल बाद दोनों ने अपना मकान बेचकर औरंगाबाद में रहना शुरू किया। वहां मीरा ने किराये की दुकान लेकर मैकेनिक का काम शुरू किया। धीरे-धीरे घरेलू विवाद बढ़ने लगे और पति अलग रहने लगा।
जेल से रिहा होने के बाद उसने ई-रिक्शा खरीदा और इसी के जरिए अपनी आजीविका चलाने लगी।
असलहा तस्करी के मामले में पहले भी जा चुकी थी जेल
यह भी सामने आया है कि वर्ष 2025 में दिल्ली पुलिस ने उसे हथियार तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था।उस मामले में जेल से बाहर आने के बाद उसने ई-रिक्शा चलाना शुरू किया, लेकिन अब उस पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का गंभीर आरोप लगा है।जांच एजेंसियों का मानना है कि उसके पुराने आपराधिक संपर्कों का संबंध वर्तमान जासूसी नेटवर्क से भी हो सकता है।
कमजोर तबके के युवाओं को जाल में फंसाने का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि मीरा अक्सर कम उम्र और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले युवाओं को अपने संपर्क में लाने की कोशिश करती थी।वह खुद को मुंबई के प्रभावशाली लोगों से जुड़ा हुआ बताकर युवाओं को प्रभावित करती थी। जांच एजेंसियां अब इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि क्या वह युवाओं को जासूसी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश कर रही थी।
‘हरिया’ नाम से इलाके में थी पहचान
सामने आया कि मथुरा के औरंगाबाद इलाके की महादेव नगर कॉलोनी में रहने वाली मीरा ठाकुर को लोग हरिया नाम से जानते थे।वह लंबे समय से ई-रिक्शा चलाकर इलाके में सक्रिय थी और कॉलोनी के लोगों से सामान्य व्यवहार बनाए रखती थी। उसकी गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद स्थानीय लोग भी हैरान रह गए।
ई-रिक्शा चलाने की आड़ में संवेदनशील इलाकों की रेकी की आशंका
जांच एजेंसियों को शक है कि ई-रिक्शा चलाने का काम केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि गतिविधियों को छिपाने का माध्यम भी हो सकता था।बताया जा रहा है कि वह मथुरा के विभिन्न स्थानों पर नियमित रूप से जाती थी और कई संवेदनशील क्षेत्रों के फोटो उसके मोबाइल में मिले हैं।इन फोटो और लोकेशन डाटा की जांच अब सुरक्षा एजेंसियां विस्तार से कर रही हैं।
संवेदनशील छावनी क्षेत्र तक था नियमित आवागमन
यह भी सामने आया है कि वह रिफाइनरी से टैंक चौराहे तक ई-रिक्शा चलाती थी।टैंक चौराहा एक संवेदनशील छावनी क्षेत्र माना जाता है, जहां सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियां होती रहती हैं। ऐसे इलाके में नियमित आवाजाही ने जांच एजेंसियों के संदेह को और मजबूत किया है।
तीन साल पहले कॉलोनी में खरीदा था प्लॉट
स्थानीय निवासियों के अनुसार Meera Thakur espionage case Kaushambi में गिरफ्तार मीरा ने लगभग तीन वर्ष पहले कॉलोनी में प्लॉट खरीदकर मकान बनवाया था।
10 दिन पहले जब कुछ लोग कार से आकर उसे अपने साथ ले गए थे, तब से उसके घर पर ताला लगा हुआ है। इसके बाद से कॉलोनी के लोग लगातार उसके बारे में चर्चा कर रहे थे।
पड़ोसियों के लिए सामान्य महिला, एजेंसियों के लिए संदिग्ध गतिविधियां
पड़ोसियों ने बताया कि मीरा का व्यवहार सामान्य था और वह लोगों को बताती थी कि वह अपनी बेटियों के पालन-पोषण के लिए ई-रिक्शा चलाती है।
लेकिन जब Meera Thakur espionage case Kaushambi सामने आया, तब इलाके के लोग पूरी तरह हैरान रह गए। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि वह इतनी गंभीर गतिविधियों में शामिल हो सकती है।
पति से अलगाव के बाद बदली जीवन की दिशा
करीब आठ महीने पहले पति से अलग होने के बाद मीरा ने स्वतंत्र रूप से रहना शुरू कर दिया था। उसी दौरान उसने ई-रिक्शा खरीदा और नगर निगम से रूट भी आवंटित कराया था।
जांच एजेंसियां इस अवधि को विशेष रूप से महत्वपूर्ण मान रही हैं, क्योंकि इसी दौरान उसके संपर्कों में बदलाव आया बताया जा रहा है।
मोबाइल में मिले संवेदनशील स्थानों के फोटो से बढ़ी जांच की गंभीरता
Meera Thakur espionage case Kaushambi में पुलिस को उसके मोबाइल फोन से कई संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें मिली हैं।
इन तस्वीरों की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह जानकारी किसी संगठित नेटवर्क को भेजी जा रही थी।
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच में खुल सकते हैं और बड़े राज
जांच एजेंसियों का मानना है कि Meera Thakur espionage case Kaushambi केवल एक व्यक्ति तक सीमित मामला नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियां अब उसके संपर्कों, डिजिटल डाटा और वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

