यूट्यूबर बना फरार आरोपी Salim Wastik निकला 1995 के अपहरण-हत्या कांड का दोषी, 31 साल बाद फिंगरप्रिंट से खुला राज
News-Desk
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1995 अपहरण हत्या केस, Ghaziabad Loni kidnapping murder case, कोल्ड केस खुलासा, गाजियाबाद पुलिस कार्रवाई, लोनी क्राइम न्यूज, संदीप वर्मा केस, सलीम वास्तविक गिरफ्तारीGhaziabad के लोनी क्षेत्र से सामने आया एक चौंकाने वाला खुलासा तीन दशक पुराने अपराध को फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है। खुद को यूट्यूबर और सामाजिक कार्यकर्ता बताकर सामान्य जीवन जी रहा एक व्यक्ति Salim Wastik दरअसल 1995 के अपहरण और हत्या कांड का फरार आरोपी निकला। पुलिस रिकॉर्ड से फिंगरप्रिंट मिलान के बाद उसकी पहचान सामने आई और ठीक होने के बाद क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस गिरफ्तारी ने न केवल लंबे समय से लंबित एक गंभीर आपराधिक मामले को नई दिशा दी, बल्कि पीड़ित परिवार के लिए न्याय की उम्मीद भी फिर से जगा दी है।
#BREAKING
दिल्ली में व्यापारी अपहरण-हत्या केस में उम्रकैद पाया आरोपी सलीम वास्तिक 25 साल बाद गिरफ्तार। #DelhiPolice ने उसे #Ghaziabad से पकड़ा —साल 2000 में बेल पर बाहर आने के बाद से नाम-पहचान बदलकर फरार था।
हाल ही में उसी पर हुए जानलेवा हमले के मामले में 2 आरोपी पुलिस एनकाउंटर… pic.twitter.com/pBhq3VHVHs— News & Features Network | World & Local News (@newsnetmzn) April 25, 2026
1995 में हुआ था 13 वर्षीय बच्चे का अपहरण और हत्या
पुलिस के अनुसार वर्ष 1995 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली क्षेत्र से 13 वर्षीय संदीप वर्मा का अपहरण किया गया था। आरोपियों ने बच्चे की रिहाई के बदले 30 हजार रुपये की फिरौती मांगी थी, लेकिन रकम मिलने से पहले ही उसकी हत्या कर दी गई थी।
वारदात के बाद मुख्य आरोपी फरार हो गया और लंबे समय तक उसकी कोई स्पष्ट जानकारी पुलिस को नहीं मिल सकी। मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया, लेकिन जांच रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया था।
पहचान बदलकर तीन दशक तक सामान्य जीवन जीता रहा आरोपी
जांच में सामने आया कि वारदात के बाद आरोपी लगातार अपनी पहचान छुपाकर अलग-अलग शहरों में रह रहा था। कुछ समय तक वह हरियाणा के करनाल और अंबाला में रहा, जहां उसने बेल्ट बनाने का काम किया।
इसके बाद वर्ष 2010 के आसपास वह लोनी क्षेत्र में आकर बस गया और सलीम वास्तविक नाम से नई पहचान बनाकर रहने लगा। यहां उसने नसबंदी कॉलोनी में कपड़ों और छोटे सामान का कारोबार शुरू किया और धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर पहचान बना ली।
सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताता था
लोनी में बसने के बाद उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रियता बढ़ाई और खुद को सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाने वाला व्यक्ति बताना शुरू किया। स्थानीय स्तर पर कई लोग उसे एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और यूट्यूबर के रूप में पहचानने लगे थे।
लंबे समय तक उसकी वास्तविक पहचान सामने नहीं आ सकी, जिससे वह सामान्य नागरिक की तरह जीवन व्यतीत करता रहा।
अस्पताल में फिंगरप्रिंट से खुला 31 साल पुराना राज
पूरे मामले में निर्णायक मोड़ 27 फरवरी 2026 को आया, जब उसके कार्यालय पर दो युवकों ने जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान पुलिस को उसके फिंगरप्रिंट प्राप्त हुए, जिनका मिलान पुराने आपराधिक रिकॉर्ड से किया गया। इसी प्रक्रिया में यह स्पष्ट हुआ कि वही व्यक्ति 1995 के अपहरण और हत्या कांड का फरार आरोपी है।
यह खुलासा सामने आते ही जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं और मामले की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच शुरू की गई।
हमले के बाद चर्चा में आया था नाम, मुठभेड़ में मारे गए हमलावर
हमले की घटना के बाद यह मामला पहले ही सुर्खियों में आ चुका था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों हमलावरों को मुठभेड़ में मार गिराया था, जिसके बाद घायल व्यक्ति की पहचान और पृष्ठभूमि को लेकर जांच तेज कर दी गई।
इसी जांच के दौरान सामने आए फिंगरप्रिंट मिलान ने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी।
क्राइम ब्रांच ने ठीक होने के बाद किया गिरफ्तार
पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय पहले आरोपी के स्वास्थ्य में सुधार का इंतजार किया। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया।
अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है, ताकि वारदात के सभी तथ्य स्पष्ट हो सकें।
मार्शल आर्ट प्रशिक्षण के दौरान हुई थी बच्चे से पहचान
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले एक स्कूल में मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण देता था। इसी दौरान उसकी पहचान संदीप वर्मा से हुई थी। बाद में उसी पहचान का फायदा उठाकर उसने अपहरण की योजना बनाई।
यह पहलू मामले को और अधिक संवेदनशील बना देता है, क्योंकि आरोपी बच्चे के विश्वास का लाभ उठाकर वारदात को अंजाम देने में सफल रहा था।
तकनीकी रिकॉर्ड ने तीन दशक पुराने केस को फिर से जिंदा किया
इस गिरफ्तारी ने यह भी साबित किया कि पुराने मामलों में सुरक्षित रखे गए तकनीकी रिकॉर्ड भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिंगरप्रिंट मिलान जैसी प्रक्रियाएं कई वर्षों बाद भी अपराधियों तक पहुंचने में मददगार साबित हो रही हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की तकनीकी जांच प्रणाली भविष्य में भी कई पुराने मामलों के खुलासे में सहायक हो सकती है।
पीड़ित परिवार को फिर जगी न्याय की उम्मीद
करीब तीन दशक बाद आरोपी की गिरफ्तारी से पीड़ित परिवार के लिए न्याय की उम्मीद फिर मजबूत हुई है। लंबे समय से लंबित इस मामले में अब कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।
स्थानीय स्तर पर भी इस खुलासे को लेकर चर्चा तेज है और लोग इसे पुलिस की महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देख रहे हैं।

