Dharamshala: बुद्ध पूर्णिमा पर धर्मशाला के कालचक्र मंदिर में Dalai Lama की विशेष प्रार्थना, करुणा और अहिंसा का दिया वैश्विक संदेश
Buddha Purnima (वेसाक) के पावन अवसर पर Dharamshala स्थित प्रसिद्ध Kalachakra Temple में भव्य प्रार्थना समारोह आयोजित किया गया, जिसमें तिब्बती आध्यात्मिक गुरु Dalai Lama स्वयं उपस्थित रहे। इस विशेष अवसर पर उन्होंने विश्व शांति, आपसी भाईचारे और समस्त जीवों के कल्याण के लिए विशेष पूजा-अर्चना की।
समारोह के दौरान पूरे मंदिर परिसर में गहरी आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने इस अवसर को मानवता और करुणा के संदेश से जुड़ा ऐतिहासिक क्षण बताया।
नामग्याल मठ के भिक्षुओं ने पारंपरिक अनुष्ठानों से सजाया समारोह
कार्यक्रम के दौरान Namgyal Monastery के भिक्षुओं ने तिब्बती परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच बुद्ध शाक्यमुनि के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और परिनिर्वाण की स्मृति में विशेष प्रार्थनाएं की गईं।
इन अनुष्ठानों ने समारोह को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की और श्रद्धालुओं को बौद्ध दर्शन की गहराई से जोड़ने का अवसर दिया। मंदिर परिसर में उपस्थित लोगों ने सामूहिक प्रार्थना के माध्यम से विश्व में शांति और सद्भाव की कामना की।
‘21वीं सदी का बौद्ध बनें’—दलाई लामा का वैश्विक समुदाय को संदेश
वैश्विक बौद्ध समुदाय को संबोधित करते हुए दलाई लामा ने कहा कि लगभग 2500 वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध द्वारा दिया गया ज्ञान आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस समय था। उन्होंने अनुयायियों से आग्रह किया कि वे केवल नाममात्र के बौद्ध न बनें, बल्कि विचारशील और जागरूक “21वीं सदी के बौद्ध” बनने का प्रयास करें।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल शिक्षाओं को सुनना या पढ़ना पर्याप्त नहीं है। बुद्ध के संदेशों पर गहराई से चिंतन करना और उन्हें दैनिक जीवन में लागू करना ही वास्तविक साधना है।
‘आश्रित उत्पत्ति’ के सिद्धांत पर दिया विशेष जोर
अपने संबोधन में दलाई लामा ने बौद्ध दर्शन के महत्वपूर्ण सिद्धांत “आश्रित उत्पत्ति” पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक जीव एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। इसलिए किसी भी प्राणी को हानि न पहुँचाना ही सच्चा धर्म है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की वैश्विक चुनौतियों—चाहे वे सामाजिक हों, राजनीतिक हों या पर्यावरणीय—का समाधान करुणा और ज्ञान के मार्ग से ही संभव है। यही बुद्ध का वास्तविक संदेश है।
करुणा और अहिंसा को बताया मानवता का सबसे बड़ा आधार 🕊️
दलाई लामा ने अपने संबोधन में कहा कि करुणा और अहिंसा केवल धार्मिक सिद्धांत नहीं, बल्कि मानव जीवन को संतुलित और शांतिपूर्ण बनाने के मूल आधार हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जब लोग इन मूल्यों को अपने व्यवहार में उतारेंगे, तभी विश्व में स्थायी शांति स्थापित हो सकेगी।
उनका संदेश विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया गया, जिन्होंने समारोह में बड़ी संख्या में भाग लिया।
समारोह में आध्यात्मिक शांति और वैश्विक एकता का वातावरण
बुद्ध पूर्णिमा के इस अवसर पर आयोजित सामूहिक प्रार्थनाओं ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलन और मंत्रोच्चारण के माध्यम से मानवता के कल्याण की कामना की।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार ऐसे आयोजन केवल आस्था का प्रदर्शन नहीं होते, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और सहअस्तित्व के संदेश को मजबूत करने का माध्यम भी बनते हैं।
विश्वभर के अनुयायियों को बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं
समारोह के समापन पर दलाई लामा ने सभी बौद्ध अनुयायियों को बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं और संपूर्ण मानवता के लिए मंगलकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने कहा कि करुणा का मार्ग ही ऐसा मार्ग है जो हर हृदय में शांति और सहानुभूति का प्रकाश फैला सकता है।
उनकी इस अपील को उपस्थित श्रद्धालुओं ने मानवता के साझा भविष्य के लिए प्रेरणादायक संदेश के रूप में स्वीकार किया।

