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Azerbaijan European Parliament Dispute: कराबाख विवाद पर यूरोपीय संसद से टकराव, अजरबैजान ने खत्म किया संसदीय सहयोग

Azerbaijan की संसद मिल्ली मजलिस ने यूरोपीय संसद के साथ संसदीय सहयोग समाप्त करने के पक्ष में मतदान कर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम उठाया है। यह निर्णय कराबाख क्षेत्र को लेकर यूरोपीय संसद द्वारा पारित प्रस्ताव और कथित रूप से अजरबैजान विरोधी गतिविधियों के जवाब में लिया गया बताया गया है।

संसद ने प्रस्ताव पारित करते हुए स्पष्ट किया कि अब ईयू-अजरबैजान संसदीय सहयोग समिति में भागीदारी भी समाप्त कर दी जाएगी और विभिन्न स्तरों पर जारी सहयोग को रोकने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


संसद की स्पीकर साहिबा गफारोवा ने दिए कड़े संकेत

अजरबैजान संसद की स्पीकर Sahiba Gafarova ने कहा कि यूरोपीय संसद की हालिया गतिविधियों को लेकर कड़े कदम उठाना आवश्यक हो गया है। उन्होंने संकेत दिया कि यह निर्णय केवल संसदीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक कूटनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा भी हो सकता है।

विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।


‘यूरनेस्ट पार्लियामेंट्री असेंबली’ से बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू

मिल्ली मजलिस ने क्षेत्रीय मंच Euronest Parliamentary Assembly से बाहर निकलने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। यह मंच यूरोपीय संसद और पूर्वी साझेदारी कार्यक्रम से जुड़े देशों की संसदों के बीच सहयोग के लिए स्थापित किया गया था।

इस कदम को दक्षिण काकेशस क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।


ईयू की राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब कर दर्ज कराया विरोध

कराबाख मुद्दे पर पारित प्रस्ताव के बाद अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की राजदूत Mariana Kujundzic को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूरोपीय संसद द्वारा पारित प्रस्ताव में कई बातें पक्षपातपूर्ण और तथ्यहीन हैं, जो निष्पक्षता और संप्रभुता के सिद्धांतों के विपरीत हैं।


प्रस्ताव को संप्रभुता के खिलाफ बताया

अजरबैजान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रस्ताव में वास्तविक स्थिति को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है और यह देशों की क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के खिलाफ है।

सरकार ने यह भी चेतावनी दी कि इस तरह के कदम क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयासों और द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।


कराबाख में अर्मेनियाई लोगों की वापसी के दावे खारिज

बयान में विशेष रूप से कराबाख क्षेत्र में अर्मेनियाई समुदाय की वापसी से जुड़े दावों को पूरी तरह निराधार बताया गया। अजरबैजान का कहना है कि यह उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के समान है।

सरकार के अनुसार 2023 में पुनःएकीकरण योजना प्रस्तुत किए जाने के बावजूद अर्मेनियाई समुदाय ने अपनी इच्छा से क्षेत्र छोड़ दिया था और इसके विपरीत लगाए जा रहे आरोप वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते।


‘युद्धबंदी’ कहे जा रहे लोगों की रिहाई की मांग भी खारिज

अजरबैजान ने उन व्यक्तियों को रिहा करने की मांग को भी अस्वीकार कर दिया जिन्हें यूरोपीय संसद की ओर से युद्धबंदी बताया जा रहा था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि संबंधित व्यक्तियों को अदालतों द्वारा आतंकवाद, तोड़फोड़ और युद्ध अपराध जैसे गंभीर मामलों में दोषी ठहराया गया है।

सरकार ने यह भी कहा कि मानवीय आधार पर पहले ही कई कैदियों को रिहा किया जा चुका है और विश्वास बहाली के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।


ईयू-अजरबैजान संबंधों पर बढ़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि संसदीय सहयोग समाप्त करने का निर्णय यूरोपीय संघ और अजरबैजान के बीच कूटनीतिक संबंधों पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। दक्षिण काकेशस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों के बीच यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच संवाद की दिशा इस विवाद के समाधान में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।


कराबाख मुद्दे को लेकर यूरोपीय संसद और अजरबैजान के बीच बढ़ते मतभेद अब कूटनीतिक स्तर से आगे संसदीय सहयोग तक पहुंच चुके हैं, जिससे दक्षिण काकेशस क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति और ईयू-अजरबैजान संबंधों की दिशा पर आने वाले समय में महत्वपूर्ण असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

 

News-Desk

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