Agra में पेट्रोल पंप आवंटन के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, जमीन मालिक की कथित फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से धोखाधड़ी का आरोप
Agra में पेट्रोल पंप आवंटन को लेकर जमीन से जुड़े एक कथित बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि पेट्रोल पंप के लिए जमीन लीज पर लेने के बाद जमीन मालिक की कथित फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर उसका इस्तेमाल किया गया। मामले में अधिवक्ता की शिकायत पर थाना हरीपर्वत में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस जांच में जुट गई है।
इस प्रकरण ने जमीन सौदों, लीज एग्रीमेंट और पेट्रोल पंप आवंटन प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल किए गए और उनकी जानकारी के बिना दस्तावेज तैयार किए गए।
अधिवक्ता ने पुलिस आयुक्त से लगाई गुहार
मामले में आवास विकास कॉलोनी निवासी अधिवक्ता राजेश सिंघल ने पुलिस आयुक्त दीपक कुमार से शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर पुलिस आयुक्त के आदेश पर थाना हरीपर्वत में प्राथमिकी दर्ज की गई।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पेट्रोल पंप आवंटन की प्रक्रिया में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के बिना उनके नाम से पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई, जो पूरी तरह फर्जी है।
जमीन खरीदने के बाद लीज पर देने का हुआ था समझौता
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने मानी भाटिया, रूपाली भाटिया उर्फ रूपाली गुप्ता और तरुण भाटिया से जमीन खरीदकर उसका कब्जा प्राप्त किया था।
इसके बाद शहीद नगर निवासी सबिहा खान ने स्वयं को इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन का वेंडर बताते हुए पेट्रोल पंप आवंटन के लिए जमीन को 20 वर्ष की लीज पर लेने का प्रस्ताव दिया।
अधिवक्ता का कहना है कि इस प्रस्ताव के बाद 22 सितंबर 2023 को दो रजिस्टर्ड लीज डीड तैयार की गईं। इसके अलावा 3 दिसंबर 2025 को भी एक अन्य दस्तावेज निष्पादित किया गया।
किराया नहीं देने और दस्तावेजों पर संदेह के बाद खुला मामला
शिकायतकर्ता का आरोप है कि तय शर्तों के अनुसार किराया भुगतान नहीं किया गया और लगातार मामले को टाला जाता रहा।
इसी बीच उन्हें जानकारी मिली कि उनके नाम से कुछ पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई हैं। इस सूचना के बाद उन्होंने सब रजिस्ट्रार कार्यालय में दस्तावेजों की जांच कराई।
जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं थे। इसके बाद पूरे मामले में धोखाधड़ी की आशंका गहरा गई।
इंडियन ऑयल कार्यालय से मिली अहम जानकारी
अधिवक्ता राजेश सिंघल ने बताया कि उन्होंने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) कार्यालय में भी जानकारी की। वहां से उन्हें बताया गया कि पेट्रोल पंप आवंटन की प्रक्रिया में सभी सहखातेदारों की सहमति आवश्यक होती है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी प्रक्रिया को पूरा दिखाने के लिए कथित रूप से फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई और उसका इस्तेमाल किया गया।
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जमीन और लीज विवादों में बढ़ रहे फर्जीवाड़े के मामले
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में जमीन, लीज और पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े विवादों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
कई मामलों में फर्जी हस्ताक्षर, नकली दस्तावेज और गलत जानकारी के जरिए संपत्तियों से जुड़े सौदे किए जाने के आरोप सामने आते रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन खरीद-फरोख्त और लीज समझौतों में दस्तावेजों की गहन जांच बेहद जरूरी हो गई है।
पुलिस ने शुरू की जांच, दस्तावेज खंगाले जा रहे
थाना प्रभारी हरीपर्वत ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आरोपों की जांच की जा रही है।
पुलिस अब संबंधित दस्तावेजों, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और कथित पावर ऑफ अटॉर्नी की जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि दस्तावेजों में इस्तेमाल किए गए हस्ताक्षर असली हैं या नहीं।
आवश्यकता पड़ने पर दस्तावेजों को फॉरेंसिक जांच के लिए भी भेजा जा सकता है।
पेट्रोल पंप आवंटन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद पेट्रोल पंप आवंटन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स में जमीन से जुड़े दस्तावेजों की कानूनी जांच और सत्यापन बेहद जरूरी होता है। यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है तो इससे लंबी कानूनी लड़ाई और आर्थिक नुकसान की स्थिति पैदा हो सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह
कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी संपत्ति या लीज समझौते से पहले सभी दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन कराना बेहद आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे दस्तावेजों के मामले में हस्ताक्षर, गवाह और रजिस्ट्री प्रक्रिया की पूरी जांच करनी चाहिए ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति पैदा न हो।

