युगांडा में Ebola के नए मामलों से बढ़ी चिंता, WHO ने जारी किया हाई अलर्ट
News-Desk
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Africa CDC, Congo Ebola, Ebola, Ebola outbreak, Global Health Crisis, Uganda Health News, WHO news, WHO अलर्ट, World News Hindi, अफ्रीका स्वास्थ्य संकट, इबोला वायरस, युगांडा न्यूजअफ्रीकी देश युगांडा में Ebola वायरस के नए मामले सामने आने के बाद एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। शनिवार को तीन नए संक्रमित मरीज मिलने के बाद देश में इबोला के कुल मामलों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर संक्रमण को रोकने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला जैसे घातक वायरस के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी बेहद गंभीर संकेत मानी जाती है। यही वजह है कि WHO और अफ्रीका CDC लगातार निगरानी और आपात तैयारियों को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
ड्राइवर और स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमित, संपर्क में आने से फैला संक्रमण
युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार नए संक्रमित मामलों में वह ड्राइवर भी शामिल है, जिसने पहले पुष्टि किए गए मरीज को ट्रांसपोर्ट किया था। इसके अलावा एक स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमित पाया गया है, जो संक्रमित मरीज की देखभाल के दौरान वायरस की चपेट में आ गया।
अधिकारियों ने बताया कि संक्रमित स्वास्थ्यकर्मी ने शुरुआती मरीज की सेवा के दौरान वायरस के संपर्क में आने के बाद लक्षण विकसित किए। वहीं लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) से आई एक महिला भी संक्रमित पाई गई है, जो बीमारी के लक्षणों के साथ युगांडा पहुंची थी।
इन मामलों के सामने आने के बाद सीमा क्षेत्रों और अस्पतालों में निगरानी और सख्त कर दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू किया कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग अभियान
युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि संक्रमित मरीजों का इलाज जारी है और उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान कर ली गई है। स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें अब उन सभी लोगों पर करीबी नजर रख रही हैं, जो संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला जैसे वायरस को रोकने में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग बेहद अहम भूमिका निभाती है। अगर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की समय रहते पहचान न हो, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी हाई अलर्ट पर रखा है।
WHO चीफ ने की युगांडा सरकार की सराहना
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने युगांडा सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय की कोशिशों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि संदिग्ध और पुष्टि किए गए मामलों की पहचान, निगरानी और देखभाल के लिए उठाए गए कदम बेहद महत्वपूर्ण हैं।
WHO प्रमुख ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में वायरस को फैलने से रोकने के लिए पूरी सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि WHO, अफ्रीका CDC और क्षेत्रीय साझेदार मिलकर हालात पर काम कर रहे हैं ताकि संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके।
WHO ने बढ़ाया रिस्क लेवल, क्षेत्रीय खतरा हुआ ज्यादा गंभीर
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुक्रवार को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि कांगो और युगांडा में फैलते इबोला संक्रमण ने स्वास्थ्य जोखिम को और बढ़ा दिया है।
टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि WHO ने अब इबोला को लेकर अपने जोखिम मूल्यांकन को बदल दिया है। संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर खतरे को “बहुत ज्यादा”, क्षेत्रीय स्तर पर “ज्यादा” और वैश्विक स्तर पर “कम” बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संक्रमण सीमा पार तेजी से फैलता है, तो यह पूरे अफ्रीकी क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
अफ्रीका CDC ने की एकजुटता की अपील
अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (Africa CDC) ने लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला संक्रमण को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की अपील की है।
अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में लोगों की आवाजाही और कमजोर स्वास्थ्य ढांचे की वजह से संक्रमण फैलने का खतरा अधिक बना हुआ है। ऐसे में देशों के बीच समन्वय और संसाधनों की साझेदारी बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी जैसी स्थितियों में केवल एक देश की कोशिशें पर्याप्त नहीं होतीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग सबसे बड़ा हथियार बनता है।
संयुक्त राष्ट्र ने जारी की करोड़ों डॉलर की आपात सहायता
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के अवर महासचिव और इमरजेंसी रिलीफ कोऑर्डिनेटर टॉम फ्लेचर ने इबोला संकट से निपटने के लिए बड़ी आर्थिक सहायता की घोषणा की है।
उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के सेंट्रल इमरजेंसी रिस्पॉन्स फंड से 60 मिलियन डॉलर तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि कांगो और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से राहत और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
यह फंड अस्पतालों, मेडिकल उपकरणों, दवाओं और आपात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में इस्तेमाल किया जाएगा।
क्या है इबोला वायरस और क्यों है इतना खतरनाक?
इबोला वायरस दुनिया के सबसे खतरनाक वायरल संक्रमणों में गिना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है और गंभीर बुखार, कमजोरी, रक्तस्राव तथा कई अंगों के फेल होने जैसी स्थितियां पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार समय पर इलाज और आइसोलेशन न होने पर इसकी मृत्यु दर बेहद अधिक हो सकती है। अफ्रीका के कई देशों में पहले भी इबोला के बड़े प्रकोप सामने आ चुके हैं, जिनमें हजारों लोगों की जान गई थी।
अफ्रीकी देशों में स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
इबोला के नए मामलों ने एक बार फिर अफ्रीकी देशों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा दिया है। कई सीमावर्ती इलाकों में मेडिकल सुविधाएं सीमित हैं, जिससे संक्रमण नियंत्रण की चुनौती और कठिन हो जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी से निपटने के लिए केवल दवाइयां ही नहीं, बल्कि जनजागरूकता, मेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग और स्थानीय प्रशासन का मजबूत नेटवर्क भी जरूरी होता है।
दुनिया की नजरें अब युगांडा और कांगो पर टिकीं
युगांडा और कांगो में इबोला के बढ़ते मामलों के बाद पूरी दुनिया की नजरें अब अफ्रीकी क्षेत्र पर टिक गई हैं। WHO और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार हालात की समीक्षा कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शुरुआती स्तर पर संक्रमण को नियंत्रित कर लिया गया तो बड़े संकट को रोका जा सकता है। लेकिन लापरवाही की स्थिति में यह वायरस तेजी से फैल सकता है।

