‘मौत का सौदागर’ निकला इंजीनियर! 41 देशों में भेजे 1200 से ज्यादा जहरीले पैकेट, कनाडा कोर्ट में कबूला गुनाह-Kenneth Law Case












Kenneth Law Case ने एक बार फिर दुनिया भर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, डिजिटल नेटवर्क और आत्महत्या को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कनाडा में एक ऐसे व्यक्ति ने अदालत के सामने अपने अपराध स्वीकार किए हैं, जिस पर आरोप है कि उसने वर्षों तक दुनिया के कई देशों में ऐसे लोगों तक घातक रसायन पहुंचाए जो आत्महत्या से संबंधित सामग्री खोज रहे थे।
कनाडा के ओंटारियो प्रांत की न्यूमार्केट कोर्ट में 60 वर्षीय केनेथ लॉ ने 14 मामलों में दोष स्वीकार किया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार उसके द्वारा भेजे गए जहरीले पैकेटों का संबंध अनेक मौतों से जोड़ा गया है। यह मामला केवल कनाडा तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इटली, न्यूजीलैंड समेत दर्जनों देशों की जांच एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच चुका है।
41 देशों में भेजे गए थे 1200 से अधिक पैकेट
जांच अधिकारियों के अनुसार केनेथ लॉ ने कम से कम 1,209 ऐसे पैकेट दुनिया भर के विभिन्न देशों में भेजे थे। जांच में सामने आया कि इन पैकेटों में ऐसे रसायन शामिल थे जिनका दुरुपयोग जानलेवा साबित हो सकता था।
रिपोर्टों के मुताबिक ये पैकेट 41 देशों तक पहुंचे। मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि कई देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस नेटवर्क की जांच में शामिल हुईं।
अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक स्थानीय अपराध नहीं था, बल्कि इंटरनेट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का मामला था।
कोर्ट में पढ़े गए आरोप, हर आरोप पर स्वीकार की भूमिका
न्यूमार्केट स्थित अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने विस्तृत आरोपपत्र प्रस्तुत किया। बताया गया कि आरोपों से संबंधित दस्तावेज 60 पन्नों से अधिक के थे।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश मिशेल फ्यूरस्ट के समक्ष केनेथ लॉ ने कहा कि वह अपने अपराधों की गंभीरता और प्रभाव को समझता है। उसने स्वेच्छा से दोष स्वीकार करते हुए आरोपों में अपनी भूमिका की पुष्टि की।
कोर्ट में एक-एक आरोप पढ़कर सुनाया गया और हर आरोप पर लॉ ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इस दौरान अदालत का माहौल बेहद भावुक हो गया क्योंकि कई पीड़ित परिवार भी मौजूद थे।
सितंबर में सजा पर अंतिम सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
14 पीड़ितों की मौत से जुड़े आरोप, परिवारों की आंखें हुईं नम
कोर्ट में जिन मामलों का उल्लेख किया गया उनमें 16 से 36 वर्ष की आयु के 14 पीड़ित शामिल बताए गए। जब इन मामलों का विवरण अदालत में पढ़ा गया तो कई परिजन भावुक हो गए।
पीड़ित परिवारों ने बताया कि उनके बच्चों और रिश्तेदारों ने जीवन के कठिन दौर में इंटरनेट पर ऐसी सामग्री खोजी थी, जिसके बाद वे इस नेटवर्क के संपर्क में आए।
सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद कई परिजनों की प्रतिक्रिया ने इस मामले की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया। परिवारों का कहना था कि ऑनलाइन उपलब्ध ऐसे नेटवर्क कमजोर मानसिक स्थिति से गुजर रहे लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
ब्रिटेन में दर्जनों मौतों से भी जुड़ा नाम
अदालती कार्यवाही के दौरान यह भी सामने आया कि ब्रिटेन में हुई अनेक मौतों के मामलों में उपयोग किए गए घातक पदार्थों की आपूर्ति से भी केनेथ लॉ का संबंध था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार लॉ ने स्वीकार किया कि ब्रिटेन में 79 मौतों में इस्तेमाल हुए जहरीले पदार्थों की आपूर्ति उससे जुड़ी हुई थी।
इसी कारण यह मामला केवल कनाडा का नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया है।
इंजीनियर से बना अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के निशाने पर आया व्यक्ति
जानकारी के अनुसार केनेथ लॉ पहले इंजीनियर के रूप में काम कर चुका था। वह टोरंटो के एक होटल में कुक के रूप में भी कार्य कर चुका था।
जांचकर्ताओं के मुताबिक उसने इंटरनेट आधारित कई वेबसाइटों और ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग करके ऐसे लोगों तक पहुंच बनाई जो आत्महत्या से जुड़ी जानकारी खोज रहे थे।
अधिकारियों का आरोप है कि उसने अपने कारोबार को सामान्य दिखाने के लिए कई अन्य उत्पाद भी सूचीबद्ध किए थे। इनमें खाद्य उत्पादों और अन्य वस्तुओं के नाम शामिल किए जाते थे ताकि उसका वास्तविक उद्देश्य छिपा रहे।
पहचान छिपाने के लिए अपनाए गए थे अलग-अलग तरीके
जांच में सामने आया कि पैकेटों की पैकेजिंग और ऑनलाइन प्रस्तुति इस तरह की जाती थी कि पहली नजर में किसी को संदेह न हो।
बताया गया कि कुछ उत्पादों को सामान्य खाद्य सामग्री या अन्य वस्तुओं की तरह प्रदर्शित किया जाता था। पैकेटों पर चेतावनी संबंधी संदेश भी लिखे जाते थे, जिनमें उपयोग की जिम्मेदारी उपभोक्ता पर होने की बात कही जाती थी।
अधिकारियों का आरोप है कि इसके साथ विस्तृत निर्देश भी उपलब्ध कराए जाते थे, जिससे इन पदार्थों का दुरुपयोग आसान हो जाता था।
गिरफ्तारी के समय खातों में मिले करोड़ों रुपये
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तारी के समय केनेथ लॉ से जुड़े विभिन्न ऑनलाइन कारोबारी खातों में बड़ी रकम मौजूद थी।
अधिकारियों ने बताया कि उसके शॉपिफाई और पेपाल खातों में लगभग 2.05 करोड़ रुपये के बराबर धनराशि जमा थी। यह आंकड़ा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि यह गतिविधि लंबे समय से और बड़े पैमाने पर संचालित की जा रही थी।
वित्तीय लेनदेन की जांच भी इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
दर्दनाक घटनाएं जिन्होंने झकझोर दिया अदालत को
सुनवाई के दौरान कई ऐसे मामलों का विवरण सामने आया जिसने अदालत में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
एक मामले में बताया गया कि जहरीला पदार्थ लेने के बाद एक युवक ने अपने माता-पिता से मदद मांगी। उसकी हालत तेजी से बिगड़ती गई और बाद में उसकी मौत हो गई।
एक अन्य मामले में 29 वर्षीय व्यक्ति ने खुद आपातकालीन सेवा को फोन कर बताया कि उसने जहरीला पदार्थ ले लिया है। रिकॉर्ड के अनुसार उसने सहायता की गुहार लगाई थी। बचाव दल पहुंचने तक उसकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी और बाद में अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।
ब्रिटेन के एक मामले में भी पीड़ित ने आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी थी, लेकिन चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
Kenneth Law Case के सामने आने के बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और निगरानी तंत्र पर भी बहस तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट पर उपलब्ध कुछ खतरनाक सामग्री और संदिग्ध नेटवर्क तक लोगों की पहुंच को रोकने के लिए और अधिक प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है।
कई देशों में इस मामले के बाद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, डिजिटल भुगतान सेवाओं और संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की मॉनिटरिंग को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे लोगों को समय पर सहायता और परामर्श उपलब्ध कराना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखना।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना चेतावनी का मामला
कनाडा में चल रहा यह मुकदमा दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों, साइबर जांचकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। यह मामला दिखाता है कि इंटरनेट के माध्यम से संचालित अवैध गतिविधियां किस तरह सीमाओं को पार कर वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाल सकती हैं।
जांच एजेंसियां अब यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि ऐसे नेटवर्क कितने समय से सक्रिय थे, कितने लोग प्रभावित हुए और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कौन से कदम उठाए जा सकते हैं।









