Canada में बुजुर्ग दंपत्ति की निर्मम हत्या मामले में भारतीय मूल के तीन युवक दोषी करार, कोर्ट बोला- ‘पैसों के लिए की गई थी हत्या’
News-Desk
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British Columbia Court, Canada, Canada Court, crime news, Indo Canadian News, International Crime News, Murder Case, एबॉट्सफोर्ड हत्या मामला, कनाडा न्यूज़, कोर्ट फैसला, फर्स्ट डिग्री मर्डर, भारतीय मूल आरोपीCanada की एक अदालत ने 2022 में हुए बुजुर्ग दंपत्ति की निर्मम हत्या मामले में भारतीय मूल के तीन युवकों को दोषी करार दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह हत्याएं सोची-समझी साजिश के तहत आर्थिक लाभ के लिए की गई थीं और आरोपियों ने जानबूझकर इस वारदात को अंजाम दिया।
यह मामला कनाडा के Abbotsford शहर का है, जहां एक बुजुर्ग दंपत्ति अपने घर में मृत पाए गए थे। इस मामले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और लंबे समय तक यह जांच एजेंसियों के लिए बड़ा चुनौतीपूर्ण केस बना रहा।
घर के अंदर मृत मिले थे अर्नोल्ड और जोआन डी जोंग
अदालती दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 9 मई 2022 को 77 वर्षीय अर्नोल्ड डी जोंग और उनकी 76 वर्षीय पत्नी जोआन डी जोंग अपने घर में मृत पाए गए थे। दोनों एबॉट्सफोर्ड के ग्रामीण इलाके में रहते थे।
जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो घर के अंदर का दृश्य बेहद भयावह था। जांच में सामने आया कि दोनों के हाथ-पैर रस्सियों से बंधे हुए थे। पति अर्नोल्ड डी जोंग के सिर और चेहरे को डक्ट टेप से लपेटा गया था, जिससे दम घुटने के कारण उनकी मौत हुई। वहीं पत्नी जोआन डी जोंग का गला रेता गया था।
अदालत ने इस पूरी घटना को “बेहद क्रूर और योजनाबद्ध अपराध” बताया।
तीनों आरोपियों को फर्स्ट-डिग्री मर्डर का दोषी पाया गया
इस मामले में Gurkarn Singh, Abhijeet Singh और Khushveer Toor के खिलाफ मुकदमा चलाया गया था।
ब्रिटिश कोलंबिया सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस Brenda Brown ने फैसला सुनाते हुए कहा कि तीनों आरोपी इस हत्या में पूरी तरह शामिल थे और उन्होंने जानबूझकर अपराध को अंजाम दिया।
कोर्ट ने कहा, “मैं प्रत्येक आरोपी को इन हत्याओं में इच्छुक, जानकार और सक्रिय भागीदार मानती हूं।”
अदालत ने सजा सुनाने की तारीख 28 मई तय की है।
बचाव पक्ष ने कहा- डकैती के दौरान हुई गलती, कोर्ट ने खारिज किया दावा
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि यह हत्याएं पूर्व नियोजित नहीं थीं और डकैती के दौरान गलती से मौत हो गई थी। आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उनका हत्या करने का इरादा नहीं था।
हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के सबूतों और घटनास्थल की परिस्थितियों को देखते हुए माना कि हत्या पूरी योजना के साथ की गई थी और इसका मकसद आर्थिक फायदा हासिल करना था।
कोर्ट ने साफ कहा कि अपराध की प्रकृति और पीड़ितों के साथ की गई बर्बरता यह साबित करती है कि यह केवल चोरी की घटना नहीं थी।
डीएनए और फॉरेंसिक सबूत बने सबसे बड़ा आधार
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कई महत्वपूर्ण सबूत पेश किए, जिन्होंने आरोपियों को अपराध से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। इनमें घटनास्थल से मिला डीएनए, रस्सियां और संदिग्धों के वाहन से बरामद धातु का बेसबॉल बैट शामिल था।
फॉरेंसिक जांच में मिले साक्ष्यों ने यह साबित किया कि आरोपी घटनास्थल पर मौजूद थे और हत्या के बाद वहां से सामान लेकर फरार हुए।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक और डीएनए जांच ने इस मामले को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभाई।
पहले दंपत्ति के घर में कर चुके थे काम
अदालत में यह भी बताया गया कि तीनों आरोपी पहले एक क्लीनिंग कंपनी के जरिए दंपत्ति के घर पर काम कर चुके थे। इस वजह से उन्हें घर की बनावट, सामान और दिनचर्या की जानकारी थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपियों ने इसी जानकारी का फायदा उठाते हुए बाद में घर में घुसकर वारदात को अंजाम दिया। हत्या के बाद वे क्रेडिट कार्ड, चेकबुक और पावर वॉशर सहित कई कीमती सामान लेकर फरार हो गए थे।
इस खुलासे ने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया, क्योंकि पीड़ित दंपत्ति आरोपियों पर भरोसा करते थे।
कनाडा में भारतीय मूल के लोगों से जुड़े मामलों पर बढ़ी चर्चा
इस फैसले के बाद कनाडा में भारतीय मूल के लोगों से जुड़े आपराधिक मामलों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि समुदाय के कई संगठनों ने कहा है कि कुछ व्यक्तियों के अपराध के आधार पर पूरे समुदाय को नहीं देखा जाना चाहिए।
सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी होती है ताकि अपराधियों को सजा मिले और निर्दोष लोगों पर गलत प्रभाव न पड़े।
बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल
इस घटना ने कनाडा में बुजुर्ग लोगों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है that अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक अपराधियों के निशाने पर जल्दी आ सकते हैं, खासकर जब अपराधियों को उनकी दिनचर्या और घर की जानकारी हो।
स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने बुजुर्ग नागरिकों के लिए सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

