Muzaffarnagar तहसील में ई-पंजीकरण व्यवस्था के खिलाफ अधिवक्ताओं का जोरदार प्रदर्शन, ‘पासपोर्ट मॉडल’ पर संपत्ति पंजीकरण का किया विरोध
News-Desk
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तहसील परिसर में आयोजित धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में संघर्ष समिति के सदस्य और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से प्रस्तावित व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान प्रणाली में सुधार की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन ऐसा कोई भी बदलाव नहीं होना चाहिए जिससे आम जनता और इस क्षेत्र से जुड़े हजारों लोगों के हित प्रभावित हों।
धरना स्थल पर जुटे विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि
धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता संजय शिवम एडवोकेट ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी हेमन्त कुमार अरोरा एडवोकेट ने संभाली। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सरकार के प्रस्तावित निर्णयों पर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं और कहा कि इस विषय पर व्यापक स्तर पर संवाद और विचार-विमर्श आवश्यक है।
धरना स्थल पर पूरे दिन विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे और उपस्थित लोगों से एकजुट रहकर आंदोलन को मजबूत बनाने का आह्वान किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह संघर्ष केवल एक पेशे या संगठन का नहीं बल्कि उन सभी लोगों का है जो वर्षों से इस व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं और जनता को सेवाएं प्रदान करते आए हैं।
योगेन्द्र काम्बोज ने कहा— ई-पंजीकरण प्रणाली का पुरजोर विरोध जारी रहेगा
संघर्ष समिति के सदस्य योगेन्द्र काम्बोज एडवोकेट ने धरना स्थल से संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा संपत्ति पंजीकरण को पासपोर्ट की तर्ज पर संचालित करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित ई-पंजीकरण प्रणाली को लेकर कई व्यावहारिक और तकनीकी सवाल मौजूद हैं। उनके अनुसार संपत्ति पंजीकरण एक संवेदनशील कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें दस्तावेजों की जांच, पक्षकारों की पहचान और विभिन्न विधिक पहलुओं का ध्यान रखा जाता है।
योगेन्द्र काम्बोज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी परिस्थिति में वे ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेंगे जिसे वे जनता और संबंधित पेशेवरों के हितों के प्रतिकूल मानते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
दस्तावेज लेखक संघ ने जताई बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका
धरना प्रदर्शन में दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष अशोक त्यागी ने भी सरकार की प्रस्तावित नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश सरकार संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह पेपर-लेस और पासपोर्ट प्रणाली की तर्ज पर संचालित करती है तो इससे हजारों लोगों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने आशंका जताई कि नई व्यवस्था लागू होने की स्थिति में दस्तावेज लेखन और संबंधित कार्यों से जुड़े लोगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी नई तकनीकी प्रणाली के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
अशोक त्यागी ने सरकार से आग्रह किया कि वह इस विषय पर संबंधित संगठनों और विशेषज्ञों से चर्चा कर व्यावहारिक समाधान तलाशे, ताकि जनता और पेशेवर वर्ग दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।
ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
तहसील सदर बार संघ के अध्यक्ष हाजी कमरूजमा एडवोकेट ने अपने संबोधन में वर्तमान ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब से बैनामा पंजीकरण प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है, तब से लोगों को कई प्रकार की तकनीकी और प्रक्रियागत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले जो कार्य अपेक्षाकृत कम समय में पूरा हो जाता था, अब कई बार लंबा समय लेने लगा है। उनके अनुसार तकनीकी समस्याओं, सर्वर संबंधी बाधाओं और अन्य प्रशासनिक कारणों के चलते लोगों को अतिरिक्त समय और संसाधन खर्च करने पड़ते हैं।
हाजी कमरूजमा ने कहा कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वह जनता के लिए अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक हो। यदि नई व्यवस्था लोगों की परेशानियां बढ़ाती है तो उसके विभिन्न पहलुओं की समीक्षा आवश्यक हो जाती है।
वक्ताओं ने एकजुट संघर्ष का दिया संदेश
धरना प्रदर्शन के दौरान प्रमोद चौधरी, विनोद शर्मा, सैय्यद हसन अकबर जैदी, शशिकान्त शर्मा, सतीश शर्मा, विजय कुमार और सवित कुमार सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने संगठनात्मक एकता पर जोर देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं बल्कि अपनी चिंताओं और सुझावों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना है। उन्होंने सभी अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प विक्रेताओं और सहयोगी वर्गों से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी बनाए रखने का आह्वान किया।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक रहे मौजूद
धरना स्थल पर किशनचन्द काम्बोज, रंजीत त्यागी, विवेक कुमार, मोहम्मद खुर्रम, धर्मेन्द्र कुमार, मनोज पाल, सुशील त्यागी, शुभ गोयल और पंकज जिंदल सहित अनेक अधिवक्ता उपस्थित रहे। वहीं विजय माहेश्वरी, संजय कपूर, दीपक कुमार और विजयपाल सहित कई दस्तावेज लेखक भी आंदोलन में शामिल हुए।
इसके अलावा स्टाम्प विक्रेता, टाइपिस्ट, मुंशी तथा इस व्यवसाय से जुड़े अन्य लोगों ने भी बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह आंदोलन केवल आज का नहीं बल्कि भविष्य में व्यवस्था से जुड़े संभावित प्रभावों को लेकर भी है।
संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था को लेकर बहस हुई तेज
तहसील परिसर में चल रहा यह आंदोलन अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था में तकनीकी बदलावों और प्रशासनिक सुधारों को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बनता जा रहा है। एक ओर सरकार प्रक्रियाओं को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में प्रयासरत है, वहीं दूसरी ओर इस क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संगठन अपने अनुभवों और चिंताओं को सामने रख रहे हैं।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। फिलहाल आंदोलनकारी संगठनों ने संकेत दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

