Muzaffarnagar के सचिन सैनी की सफलता की मिसाल: 525 बकरियों से शुरू किया आधुनिक गोट फार्म, अब लाखों की आय के साथ ग्रामीणों को भी दे रहे रोजगार
Dr. S.K. Agarwal
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goat farming, किसान सफलता की कहानी, गोट फार्म, ग्रामीण रोजगार, पशुपालन विभाग, बकरी पालन, बरबरी बकरी, बीटल बकरी, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, सचिन सैनीयदि दृढ़ इच्छाशक्ति, सही योजना और सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग किया जाए तो खेती और पशुपालन भी बेहतर आय का मजबूत माध्यम बन सकते हैं। इसकी प्रेरणादायक मिसाल Muzaffarnagar जनपद की बुढ़ाना तहसील के ग्राम पलड़ी निवासी सचिन सैनी ने पेश की है। वर्षों तक सैनिटरी व्यवसाय से जुड़े रहने के बाद उन्होंने आधुनिक बकरी पालन को अपना नया व्यवसाय बनाया और आज वे न केवल लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन चुके हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर शुरू किए गए उनके इंडियन गोट फार्म में आज 600 से अधिक बकरियां हैं और भविष्य में बकरी के दूध से पनीर तथा खोया तैयार कर मूल्य संवर्धन (Value Addition) की दिशा में भी काम करने की योजना है।
सैनिटरी व्यवसाय से आधुनिक बकरी पालन तक का सफर
ग्राम पलड़ी, पोस्ट पलड़ी, तहसील बुढ़ाना निवासी सचिन सैनी, पुत्र राकेश सैनी, वर्ष 2001 से सैनिटरी व्यवसाय से जुड़े हुए थे। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि भारत सरकार पशुपालन और विशेष रूप से बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है।
इस जानकारी ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने पारंपरिक व्यवसाय के साथ-साथ आधुनिक बकरी पालन अपनाने का निर्णय लिया और इस क्षेत्र में विशेषज्ञ प्रशिक्षण एवं तकनीकी जानकारी प्राप्त करने के लिए संबंधित संस्थानों का भ्रमण किया।
प्रशिक्षण के बाद शुरू किया इंडियन गोट फार्म
बकरी पालन की वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त करने के बाद सचिन सैनी ने बरबरी और बीटल नस्ल की बकरियों के पालन का निर्णय लिया। उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission – NLM) योजना के अंतर्गत 10 जनवरी 2023 को ऑनलाइन आवेदन किया।
आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद 22 मई 2024 को उनका प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। योजना के अंतर्गत 525 बकरियों के पालन की स्वीकृति मिली तथा उन्हें 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ प्राप्त हुआ।
सचिन सैनी बताते हैं कि सरकारी सहायता मिलने से परियोजना शुरू करना काफी आसान हो गया और आर्थिक बोझ भी कम हुआ।
30 लाख रुपये के बैंक ऋण से तैयार किया आधुनिक फार्म
सरकारी सब्सिडी के अलावा परियोजना को विकसित करने के लिए सचिन सैनी ने बैंक से लगभग 30 लाख रुपये का ऋण भी लिया।
इस धनराशि से उन्होंने आधुनिक फार्म शेड, चरागाह, पशुओं के रहने की वैज्ञानिक व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का निर्माण कराया।
उन्होंने बरबरी नस्ल की बकरियां मथुरा से तथा बीटल नस्ल की बकरियां पंजाब से खरीदकर अपने फार्म में पालन शुरू किया।
वैक्सीनेशन और डीवर्मिंग पर विशेष ध्यान
सचिन सैनी का कहना है कि आधुनिक बकरी पालन में पशुओं का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण होता है।
फार्म पर बकरियों के पहुंचते ही उन्होंने स्वयं उनकी डीवर्मिंग (कृमिनाशक उपचार) और वैक्सीनेशन कराया। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण उनकी बकरियां स्वस्थ रहती हैं और उत्पादन क्षमता भी बेहतर बनी रहती है।
600 से अधिक बकरियां, दूध और बच्चों की बिक्री से बढ़ रही आय
शुरुआत में 525 बकरियों से शुरू हुए इस फार्म में आज 600 से अधिक बकरियां हैं तथा उनके बच्चे भी लगातार बढ़ रहे हैं।
सचिन सैनी बताते हैं कि बकरी पालन में केवल बच्चों की बिक्री ही नहीं, बल्कि दूध उत्पादन से भी अच्छी आय प्राप्त होती है। वर्तमान में वे बकरी का शुद्ध दूध आधुनिक मशीनों की सहायता से निकालकर जरूरतमंद लोगों तक उपलब्ध कराते हैं।
उनके अनुसार बकरी के दूध की मांग विशेष रूप से स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों वाले लोगों के बीच अधिक रहती है।
बकरी के दूध से पनीर और खोया बनाने की तैयारी
सचिन सैनी अब अपने व्यवसाय को अगले स्तर पर ले जाने की योजना बना रहे हैं।
उन्होंने बताया कि भविष्य में बकरी के दूध से पनीर और खोया तैयार कर बाजार में उतारने की योजना है। इससे उत्पाद का मूल्य बढ़ेगा और आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार डेयरी उत्पादों के माध्यम से मूल्य संवर्धन करने से पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
जैविक खाद से भी हो रही अतिरिक्त कमाई
सचिन सैनी केवल दूध और बकरियों की बिक्री तक सीमित नहीं हैं।
वे बकरियों के गोबर से जैविक खाद तैयार करते हैं, जिसकी स्थानीय किसानों में अच्छी मांग है। उनके अनुसार जैविक खाद की बिक्री से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 1 से 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।
इससे फार्म का अपशिष्ट भी उपयोगी उत्पाद में बदल जाता है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
ग्रामीणों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
सचिन सैनी की सफलता से प्रभावित होकर उनके गांव के कई लोगों ने भी बकरी पालन शुरू किया है।
उन्होंने बताया कि कई ग्रामीण उनके फार्म से 10 से 20 बकरियां खरीदकर अपना स्वयं का बकरी पालन व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। उनका मानना है कि जिन किसानों के पास खेती योग्य भूमि कम है या नहीं है, उनके लिए बकरी पालन कम लागत में शुरू होने वाला लाभदायक व्यवसाय साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि एक बकरी सामान्यतः एक से चार बच्चों को जन्म देती है, जिससे पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है और आय में भी लगातार वृद्धि होती है।
सरकारी योजनाओं और पशुपालन विभाग का मिला भरपूर सहयोग
सचिन सैनी ने अपनी सफलता का श्रेय भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और पशुपालन विभाग को दिया।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत मिली सब्सिडी, बैंक ऋण सुविधा, तकनीकी मार्गदर्शन और विभागीय सहयोग ने उनके व्यवसाय को नई दिशा दी।
उन्होंने विशेष रूप से मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेंद्र गुप्ता के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि समय-समय पर मिले तकनीकी मार्गदर्शन और निरीक्षण से फार्म को सफलतापूर्वक विकसित करने में मदद मिली।
आधुनिक तकनीक के साथ गुणवत्तापूर्ण बकरी पालन का लक्ष्य
सचिन सैनी का लक्ष्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उच्च गुणवत्ता वाली नस्लों का संरक्षण और बेहतर बकरों एवं बकरियों के बच्चों का उत्पादन करना है।
उनका मानना है कि यदि वैज्ञानिक पद्धति, संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और उचित प्रबंधन अपनाया जाए तो बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
वे भविष्य में अधिक किसानों को आधुनिक बकरी पालन से जोड़ने और इस क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं जागरूकता फैलाने की दिशा में भी कार्य करना चाहते हैं।

