Muzaffarnagar के युवा कलाकार तुषार शर्मा ने रचा विश्व रिकॉर्ड, रीसाइकिल पेपर से बनाया 34 इंच का भगवान जगन्नाथ रथ
News-Desk
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यह उपलब्धि न केवल तुषार शर्मा की रचनात्मक प्रतिभा का प्रमाण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, भारतीय संस्कृति और पारंपरिक कला के प्रति उनके समर्पण को भी वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाली उपलब्धि मानी जा रही है।
17 दिनों की मेहनत से तैयार हुआ 34 इंच का हस्तनिर्मित भगवान जगन्नाथ रथ
गांधी कॉलोनी निवासी तुषार शर्मा ने बताया कि इस विशेष कलाकृति को तैयार करने में उन्हें लगातार 17 दिनों तक मेहनत करनी पड़ी। रथ का निर्माण पूरी तरह रीसाइकिल किए गए पेपर और मैगजीन पाइप्स से किया गया है।
उन्होंने बताया कि रथ का प्रत्येक भाग हाथों से तैयार किया गया है। इसमें किसी प्रकार की तैयार मशीनरी या औद्योगिक सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। रथ की पारंपरिक संरचना, बारीक नक्काशी, संतुलित अनुपात और आकर्षक डिजाइन इसे सामान्य पेपर क्राफ्ट से अलग पहचान प्रदान करते हैं।
इस कलाकृति में भारतीय पारंपरिक रथ की शैली को यथासंभव वास्तविक स्वरूप देने का प्रयास किया गया है, जिससे इसकी कलात्मक सुंदरता और अधिक प्रभावशाली बन गई है।
विश्व स्तर पर मिली मान्यता, बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने किया सम्मानित
Tushar Sharma Jagannath Rath को विश्व स्तर पर पहचान तब मिली, जब बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड श्रेणी में शामिल करते हुए प्रमाणपत्र जारी किया।
यह सम्मान इस आधार पर प्रदान किया गया कि यह एक व्यक्ति द्वारा तैयार की गई दुनिया की सबसे बड़ी हस्तनिर्मित पेपर रथ कलाकृति है। इस उपलब्धि के साथ तुषार शर्मा का नाम अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड धारकों की सूची में शामिल हो गया है।
कला प्रेमियों का मानना है कि इस प्रकार की उपलब्धियां स्थानीय प्रतिभाओं को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
तुषार शर्मा का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल एक आकर्षक कलाकृति तैयार करना नहीं था, बल्कि भगवान जगन्नाथ की आस्था, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी समाज तक पहुंचाना था।
उन्होंने बताया कि आज के समय में रीसाइकिल सामग्री का उपयोग बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। यदि बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं से भी सुंदर और उपयोगी कलाकृतियां तैयार की जा सकती हैं तो इससे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संदेश जाता है।
उनका मानना है कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का प्रभावी साधन भी हो सकती है।
अब तैयार होगा श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर का विस्तृत मॉडल
विश्व रिकॉर्ड हासिल करने के बाद तुषार शर्मा अब एक और महत्वाकांक्षी परियोजना पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनका अगला लक्ष्य श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर का विस्तृत मॉडल तैयार करना है।
विशेष बात यह होगी कि यह मॉडल भी पूरी तरह रीसाइकिल किए गए पेपर और मैगजीन पाइप्स से तैयार किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगी।
पांच वर्षों से पेपर आर्ट में कर रहे हैं लगातार नवाचार
तुषार शर्मा पिछले लगभग पांच वर्षों से पेपर आर्ट के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अनेक ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्मारकों तथा व्यक्तित्वों की आकर्षक कलाकृतियां तैयार की हैं।
उनकी कला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अधिकांश मॉडल रीसाइकिल सामग्री से तैयार किए जाते हैं और उनमें सूक्ष्म बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
राम मंदिर से व्हाइट हाउस तक, कई प्रसिद्ध मॉडल कर चुके हैं तैयार
विश्व रिकॉर्ड बनाने से पहले भी तुषार शर्मा अपनी अनेक उल्लेखनीय कलाकृतियों के कारण पहचान बना चुके हैं। उन्होंने रीसाइकिल पेपर से—
- राम मंदिर
- इंडिया गेट
- लाल किला
- महात्मा गांधी का चरखा
- व्हाइट हाउस
- गोल्डन टेंपल
- बद्रीनाथ धाम
- केदारनाथ धाम
- क्रिसमस ट्री
- शिवलिंग
- तथा अनेक महापुरुषों के मॉडल और चित्र
तैयार किए हैं।
उनकी कलाकृतियां अपनी कलात्मक बारीकी, पारंपरिक स्वरूप और रचनात्मक प्रस्तुति के कारण समय-समय पर लोगों की सराहना प्राप्त करती रही हैं।
स्थानीय प्रतिभा ने बढ़ाया मुजफ्फरनगर का गौरव
तुषार शर्मा की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि मुजफ्फरनगर के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है। स्थानीय स्तर पर कला के क्षेत्र में कार्य करने वाले युवाओं के लिए यह उपलब्धि प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।
कला विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानीय कलाकारों को उचित मंच और प्रोत्साहन मिले तो वे अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन कर सकते हैं।
रीसाइकिल कला के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल
आज जब पर्यावरण संरक्षण वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है, ऐसे समय में रीसाइकिल सामग्री से तैयार की गई कलाकृतियां सतत विकास और संसाधनों के पुनः उपयोग का सकारात्मक संदेश देती हैं।
तुषार शर्मा की यह उपलब्धि दर्शाती है कि रचनात्मक सोच, धैर्य और समर्पण के साथ बेकार समझी जाने वाली सामग्री को भी उत्कृष्ट कलाकृति में बदला जा सकता है। इससे नई पीढ़ी को भी पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिलती है।

