आषाढ़ पूर्णिमा पर सारनाथ से डिप्टी CM Keshav Prasad Maurya का संदेश: भगवान बुद्ध के विचार आज भी विश्व को दिखा रहे शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर सारनाथ, वाराणसी में आयोजित विशेष समारोह को संबोधित करते हुए भगवान बुद्ध के सार्वभौमिक संदेश को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि करुणा, अहिंसा, शांति और मानव कल्याण पर आधारित भगवान बुद्ध के विचार हजारों वर्षों बाद भी पूरी मानवता को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। आज जब दुनिया अनेक प्रकार की चुनौतियों, संघर्षों और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, तब भगवान बुद्ध का जीवन-दर्शन वैश्विक समाज को सह-अस्तित्व, सद्भाव और शांति का मार्ग दिखाता है।
आषाढ़ पूर्णिमा को बौद्ध परंपरा में विशेष महत्व प्राप्त है। इसी दिन भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ की पावन भूमि पर अपना प्रथम उपदेश देकर धम्मचक्र प्रवर्तन किया था। इस ऐतिहासिक अवसर की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, बौद्ध अनुयायी, संत, विद्वान और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
भगवान बुद्ध के विचार आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत: केशव प्रसाद मौर्य
अपने संबोधन में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध ने जिस करुणा, सत्य, मैत्री, अहिंसा और मानव सेवा का संदेश दिया था, उसकी प्रासंगिकता आज पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक विश्व कई प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है। सामाजिक असमानता, हिंसा, संघर्ष, वैचारिक मतभेद और वैश्विक तनाव के बीच भगवान बुद्ध के सिद्धांत मानवता को संतुलन, सहिष्णुता और संवाद की राह दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि बुद्ध का संदेश केवल किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के कल्याण का मार्ग प्रस्तुत करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया तक पहुंचा रहा बुद्ध का संदेश
केशव प्रसाद मौर्य ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज अपनी प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को विश्व मंच पर नई पहचान दिला रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भगवान बुद्ध की करुणा, शांति और अहिंसा की अमर विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊर्जा और नई प्रतिष्ठा मिल रही है।
उन्होंने कहा कि भारत केवल अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत नहीं कर रहा, बल्कि पूरी दुनिया के सामने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को व्यवहारिक रूप से प्रस्तुत कर रहा है। यह दर्शन वैश्विक भाईचारे, सहयोग और मानवता की साझा जिम्मेदारी का प्रतीक है।
सारनाथ को UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल होना भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
उप मुख्यमंत्री ने सारनाथ की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सारनाथ का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक स्थल की पहचान नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को वैश्विक स्तर पर मिली स्वीकृति का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से सारनाथ की अंतरराष्ट्रीय पहचान और अधिक मजबूत होगी तथा धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक अध्ययन और वैश्विक बौद्ध समुदाय के लिए इसका महत्व और बढ़ेगा।
यहीं से हुआ था धम्मचक्र प्रवर्तन, बदल गई थी विश्व इतिहास की दिशा
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सारनाथ वही पवित्र भूमि है जहां भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश दिया था।
यहीं से धम्मचक्र प्रवर्तन की शुरुआत हुई और करुणा, सत्य, अहिंसा, मध्यम मार्ग तथा मानव कल्याण का संदेश भारत की सीमाओं से निकलकर एशिया सहित विश्व के अनेक देशों तक पहुंचा।
उन्होंने कहा कि बुद्ध के उपदेशों ने केवल धार्मिक विचारधारा को ही नहीं बल्कि सामाजिक जीवन, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को भी गहराई से प्रभावित किया।
विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और ज्ञान का प्रमुख केंद्र है सारनाथ
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी सारनाथ विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों, शोधकर्ताओं, पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बना हुआ है।
हर वर्ष हजारों देशी और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचकर भगवान बुद्ध से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का दर्शन करते हैं और भारतीय संस्कृति एवं बौद्ध दर्शन का अध्ययन करते हैं।
उन्होंने कहा कि सारनाथ केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं बल्कि विश्व शांति, आध्यात्मिक चिंतन और सांस्कृतिक संवाद का भी प्रमुख केंद्र है।
आषाढ़ पूर्णिमा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
आषाढ़ पूर्णिमा को बौद्ध परंपरा में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसी दिन भगवान बुद्ध ने अपने पांच प्रथम शिष्यों को धम्म का उपदेश देकर धर्मचक्र को गति प्रदान की थी।
बौद्ध अनुयायी इस दिन ध्यान, प्रार्थना, धर्मचर्चा और सेवा कार्यों के माध्यम से भगवान बुद्ध के आदर्शों को स्मरण करते हैं।
भारत के साथ-साथ श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, वियतनाम, नेपाल, भूटान और अन्य अनेक देशों में भी यह दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक
अपने संबोधन में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध का दर्शन केवल इतिहास का विषय नहीं बल्कि वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए मार्गदर्शक है।
उन्होंने कहा कि जब समाज में संवाद, सहिष्णुता, करुणा और परस्पर सम्मान की भावना मजबूत होती है, तभी स्थायी शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। बुद्ध के विचार इसी मानवीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि भगवान बुद्ध के बताए गए मार्ग पर चलकर समाज में सद्भाव, भाईचारा और सेवा की भावना को और मजबूत बनाया जाए।

