‘गटर छाप’ टिप्पणी पर बढ़ा सियासी और फिल्मी घमासान: राखी सावंत ने Kangana Ranaut पर बोला हमला, सांसद ने भी दी सफाई
News-Desk
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इस बीच सोशल मीडिया पर कंगना रनोट के बयान को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर कई लोग उनकी टिप्पणी की आलोचना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग उनके बयान को संदर्भ सहित देखने की बात भी कह रहे हैं। विवाद बढ़ने के बाद कंगना रनोट ने भी सफाई जारी करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी पीढ़ी को निशाना नहीं बनाया था, बल्कि केवल कुछ व्यवहारों की आलोचना की थी।
राखी सावंत ने वीडियो जारी कर कंगना पर साधा निशाना
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राखी सावंत ने कंगना रनोट की टिप्पणी को महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
राखी ने कहा कि देश की लड़कियों और महिलाओं के बारे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए क्योंकि उनके बयानों का व्यापक प्रभाव पड़ता है।
राखी सावंत ने वीडियो में कंगना रनोट के फिल्मी करियर और निजी जीवन पर भी व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं। साथ ही उन्होंने चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर कंगना रनोट के साथ हुई थप्पड़ मारने की घटना का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा मिलने के कारण इस तरह के बयान देना आसान है, लेकिन आम लोगों की भावनाओं को भी समझना चाहिए। राखी ने दावा किया कि ऐसे बयानों से जनता में नाराजगी बढ़ सकती है।
क्या था कंगना रनोट का विवादित बयान?
पूरा विवाद कंगना रनोट द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक इंस्टाग्राम स्टोरी से शुरू हुआ।
इस स्टोरी में उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन का जिक्र करते हुए नई पीढ़ी की कुछ भारतीय महिलाओं की सोच और व्यवहार पर सवाल उठाए थे।
कंगना ने लिखा था कि कुछ महिलाएं स्वतंत्र और करियर उन्मुख महिलाओं की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस स्वतंत्रता के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को स्वीकार नहीं करना चाहतीं।
उन्होंने यह भी कहा था कि वास्तविक रूप से स्वतंत्र महिलाएं अपने फैसलों की जिम्मेदारी स्वयं उठाती हैं और अपने निर्णयों का परिणाम भी स्वीकार करती हैं।
‘गटर छाप’ शब्द को लेकर बढ़ा विवाद
इसी पोस्ट में कंगना रनोट ने नई पीढ़ी की कुछ महिलाओं के संदर्भ में “गटर छाप” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर विवाद तेज हो गया।
उनकी टिप्पणी पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने आपत्ति जताई और इसे महिलाओं के प्रति अनुचित भाषा बताया।
वहीं कुछ समर्थकों ने तर्क दिया कि कंगना का निशाना किसी पूरी पीढ़ी पर नहीं बल्कि केवल कुछ व्यवहारों पर था।
छात्र प्रदर्शन पर भी की थी टिप्पणी
इस विवाद से पहले कंगना रनोट ने छात्र प्रदर्शनों को लेकर भी सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी।
उन्होंने लिखा था कि उन्होंने अपने जीवन में एक साथ इतनी “बदसूरती” कभी नहीं देखी और कुछ छात्र प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल की जा रही भाषा पर सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी पूछा था कि नई पीढ़ी की परवरिश किस प्रकार हो रही है और समाज किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इन टिप्पणियों के बाद भी सोशल मीडिया पर व्यापक बहस देखने को मिली थी।
ट्रोलिंग बढ़ने पर कंगना रनोट ने दी सफाई
बयान पर बढ़ते विवाद और आलोचना के बाद कंगना रनोट ने अपना पक्ष भी सार्वजनिक किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पूरी Gen-Z पीढ़ी या सभी महिलाओं को निशाना बनाना नहीं था।
कंगना के अनुसार उनकी टिप्पणी केवल सड़क पर दिखाई देने वाले अश्लील और अनैतिक व्यवहार के विरोध में थी।
उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि बच्चों का समय से पहले यौनिकरण (Sexualisation) हो और समाज में बढ़ती कुछ प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त करना उनका उद्देश्य था।
उनका कहना था कि उनके बयान को व्यापक संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया गया।
स्वतंत्रता और जिम्मेदारी पर क्या था कंगना का तर्क?
अपने सोशल मीडिया संदेश में कंगना रनोट ने कहा था कि वास्तविक रूप से स्वतंत्र महिलाएं कठिन निर्णय लेने का साहस रखती हैं।
उनके अनुसार ऐसी महिलाएं—
- अपने विचार खुलकर रखती हैं।
- परंपराओं से अलग रास्ता चुनती हैं।
- अपने निर्णयों की जिम्मेदारी स्वयं लेती हैं।
- परिवार पर बोझ डालने के बजाय अपने फैसलों का परिणाम स्वीकार करती हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कुछ आधुनिक जीवनशैली संबंधी व्यवहारों की आलोचना भी की थी, जिस पर सबसे अधिक विवाद हुआ।
सौरव दास ने भी जताई थी नाराजगी
कंगना रनोट के छात्र प्रदर्शन संबंधी बयानों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने उनकी आलोचना करते हुए कहा था कि उनकी अपनी पार्टी भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेती, इसलिए अन्य लोगों को भी उनके बयानों को अधिक महत्व नहीं देना चाहिए।
इस टिप्पणी पर कंगना रनोट ने भी प्रतिक्रिया दी और सौरव दास को लेकर तीखा जवाब दिया।
पहले भी कई बयानों को लेकर चर्चा में रही हैं कंगना
कंगना रनोट इससे पहले भी कई बार अपने सार्वजनिक बयानों को लेकर विवादों में रह चुकी हैं।
विभिन्न अवसरों पर उनके बयान—
- किसानों के आंदोलन,
- राहुल गांधी पर टिप्पणी,
- भारत की आजादी को लेकर बयान,
- सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों
को लेकर व्यापक चर्चा और विवाद का विषय बने थे।
समर्थकों का मानना है कि कंगना अपने विचार बेबाकी से रखती हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि कई बार उनकी भाषा और शब्दों का चयन विवाद को जन्म देता है।
सोशल मीडिया पर दो हिस्सों में बंटी राय
इस पूरे विवाद के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी बंटी हुई दिखाई दीं।
एक वर्ग ने राखी सावंत के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को महिलाओं के लिए सम्मानजनक भाषा का उपयोग करना चाहिए।
दूसरे पक्ष का कहना है कि कंगना रनोट ने किसी पूरी पीढ़ी को नहीं बल्कि केवल कुछ विशेष व्यवहारों की आलोचना की थी और उनके बयान को संदर्भ सहित समझा जाना चाहिए।
इस विवाद ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक संवाद की मर्यादा और सोशल मीडिया पर नेताओं व सार्वजनिक हस्तियों की भाषा को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

