Nepal में कांवड़ यात्रा के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा: 2 की मौत, 4 जिलों तक फैला तनाव, सुनसरी-सिराहा में कर्फ्यू, सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर
Nepal के तराई क्षेत्र में गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा कर दी है। भारतीय सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले में कांवड़ यात्रा के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया। हिंसा में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। हालात को नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासन ने सुनसरी और सिराहा जिलों के कई संवेदनशील क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू कर दिया है तथा अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
हिंसा की घटनाओं ने नेपाल के तराई-मधेश क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन, आगजनी और पथराव की घटनाएं सामने आई हैं। सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रही हैं।
कांवड़ यात्रा के दौरान कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार को कांवड़िये कोसी बैराज से जल लेकर अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे। इसी दौरान यात्रा में बज रहे डीजे और लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई।
शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच केवल कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही समय में विवाद बढ़ गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते स्थिति हिंसक झड़प में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटनास्थल पर दोनों समुदायों के बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए, जिसके बाद पथराव और हिंसक झड़पें शुरू हो गईं।
पुलिस ने पहले समझाने की कोशिश की, फिर करनी पड़ी फायरिंग
नेपाल पुलिस के अनुसार प्रारंभिक चरण में दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराने का प्रयास किया गया।
हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पहले हवाई फायरिंग की। अधिकारियों के अनुसार एक पुलिस अधिकारी ने तीन हवाई फायर किए, लेकिन इसके बावजूद हिंसा नहीं रुकी।
स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख रात लगभग 10:45 बजे पुलिस ने गोली चलाई।
गोली लगने से ओम प्रकाश मेहता की मौके पर मृत्यु हो गई। बाद में उपचार के दौरान जयप्रकाश मेहता ने भी दम तोड़ दिया। इस प्रकार इस घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई।
पथराव में पुलिसकर्मी भी घायल
हिंसक झड़प के दौरान पुलिस बल भी हमले का शिकार हुआ।
पुलिस के अनुसार पथराव में एक पुलिस इंस्पेक्टर सहित आठ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घायल पुलिसकर्मियों को उपचार उपलब्ध कराया गया है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसपास के थानों के अतिरिक्त पुलिस बल और आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) की अतिरिक्त टुकड़ियों को भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया।
सुनसरी और सिराहा के कई इलाकों में लगाया गया कर्फ्यू
हिंसा फैलने के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सुनसरी और सिराहा जिलों के कई संवेदनशील क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू कर दिया।
इसके साथ ही सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है।
प्रशासन लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील कर रहा है।
तराई-मधेश क्षेत्र के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन
हिंसा की घटना के बाद पूरे तराई-मधेश क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले।
कई स्थानों पर लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। कुछ इलाकों में मशाल जुलूस निकाले गए, जबकि कई जगहों पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
धनुषा जिले के जनकपुर सहित कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ देखी गई। कुछ स्थानों पर यात्रियों के साथ मारपीट और तनाव की घटनाओं की भी जानकारी सामने आई।
गृह मंत्री ने किया घटनास्थल का दौरा
नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरूंग गुरुवार शाम बिराटनगर पहुंचे।
वहां से उन्होंने सीधे सुनसरी जिले के कप्तानगंज पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और स्थानीय प्रशासन तथा सुरक्षा अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
तीन साल पहले ही दी गई थी संभावित तनाव की चेतावनी
हालिया हिंसा के बाद नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों की एक पुरानी रिपोर्ट फिर चर्चा में आ गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लगभग तीन वर्ष पहले नेपाल की सीमा सुरक्षा एवं दंगा नियंत्रण बल आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) ने सरकार को एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपी थी।
इस रिपोर्ट में तराई और मधेश क्षेत्र में धार्मिक तथा जातीय आधार पर तनाव बढ़ने की आशंका व्यक्त की गई थी।
रिपोर्ट में कथित रूप से सुझाव दिया गया था कि सरकार समय रहते राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए, ताकि भविष्य में बड़े स्तर पर सामाजिक तनाव की स्थिति न बने।
रिपोर्ट में क्या जताई गई थी चिंता?
रिपोर्ट के अनुसार कुछ क्षेत्रों में समाज को धार्मिक और जातीय आधार पर विभाजित करने के प्रयासों को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता बताई गई थी।
बताया गया कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सामाजिक संवाद, प्रशासनिक सतर्कता और स्थानीय स्तर पर विश्वास निर्माण जैसे कदम आवश्यक होंगे।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया था कि दक्षिण एशिया के अन्य हिस्सों में हुई सांप्रदायिक हिंसा से सबक लेते हुए नेपाल को समय रहते निवारक कदम उठाने चाहिए।
स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर
नेपाल प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल लगातार तैनात हैं।
संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त गश्त की जा रही है तथा स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने नागरिकों से संयम बनाए रखने, अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।
सीमा से सटे क्षेत्रों पर भी बढ़ी सतर्कता
सुनसरी और अन्य प्रभावित जिले भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां सीमा क्षेत्र पर भी अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तनाव का प्रभाव अन्य क्षेत्रों तक न फैले और कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल करना, प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा स्थिति को सामान्य बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाना है।

