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Muzaffarnagar जानसठ में टीबी मरीजों की पीड़ा: 20 किमी दूर इलाज से परेशान ग्रामीणों ने उठाई आवाज, सादपुर से सीएचसी जानसठ में टीबी कैंप शिफ्ट करने की मांग

Muzaffarnagar  जनपद की जानसठ तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम सादपुर के ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर प्रशासन के समक्ष गंभीर चिंता व्यक्त की है। गांव में टीबी और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की समस्याओं को देखते हुए ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि वर्तमान में ग्राम गालिबपुर में संचालित किए जा रहे टीबी जांच एवं उपचार शिविर को तत्काल प्रभाव से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जानसठ में स्थानांतरित कराया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण मरीजों को उपचार और जांच के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ रहा है बल्कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस मामले में शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।


सिर्फ दो किलोमीटर दूर है सीएचसी जानसठ, लेकिन मरीजों को जाना पड़ रहा लगभग 20 किलोमीटर दूर

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम सादपुर से सीएचसी जानसठ की दूरी लगभग दो किलोमीटर है, जबकि वर्तमान में टीबी जांच और उपचार के लिए मरीजों को लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गालिबपुर जाना पड़ता है।

उनका कहना है कि इतनी लंबी दूरी तय करना विशेष रूप से टीबी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहद कठिन है। कई मरीज शारीरिक रूप से इतने कमजोर होते हैं कि नियमित रूप से लंबी यात्रा करना उनके लिए संभव नहीं हो पाता। इसका सीधा असर उनके उपचार की निरंतरता पर पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि यदि जांच और उपचार की सुविधा निकटवर्ती सरकारी अस्पताल में उपलब्ध हो जाए तो मरीजों को समय पर चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी और उनकी परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी।


आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर बढ़ रहा अतिरिक्त बोझ

ग्रामीणों ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि सादपुर गांव में टीबी से प्रभावित अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संबंध रखते हैं। बार-बार 20 किलोमीटर दूर जांच और उपचार के लिए जाना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गया है।

यातायात का खर्च, पूरे दिन का समय और मरीज की शारीरिक स्थिति—इन सभी कारणों से परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार परिजन भी कामकाज छोड़कर मरीज के साथ जाने को मजबूर होते हैं, जिससे उनकी आजीविका भी प्रभावित होती है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य लोगों को उनके निकट बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में मरीजों को दूर भेजना व्यवहारिक दृष्टि से भी उचित नहीं माना जा सकता।


गांव में टीबी मरीजों की संख्या अधिक होने का किया दावा

ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि ग्राम सादपुर में टीबी के मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। ऐसे में गांव के लिए नियमित और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।

उनका कहना है कि यदि मरीज समय पर जांच और दवा नहीं ले पाएंगे तो बीमारी की गंभीरता बढ़ सकती है। टीबी जैसी संक्रामक बीमारी के प्रभावी नियंत्रण के लिए नियमित जांच, समय पर दवा और चिकित्सकीय निगरानी अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।

इसी कारण ग्रामीण चाहते हैं कि जांच एवं उपचार की व्यवस्था ऐसे स्थान पर हो, जहां मरीज आसानी से पहुंच सकें।


उपचार में देरी से बढ़ती हैं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां

ग्रामीणों ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि उपचार और जांच की सुविधा दूर होने के कारण कुछ मरीज समय पर चिकित्सा सेवाएं प्राप्त नहीं कर सके। उन्होंने दावा किया कि गांव की निवासी सोनिया और शब्दकली सहित कुछ मरीजों की मृत्यु हो चुकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य सेवाएं नजदीक उपलब्ध होतीं तो मरीजों को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकती थी। हालांकि इस संबंध में उन्होंने अपनी चिंता और स्थानीय स्तर पर महसूस की गई परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए प्रशासन से स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुलभ बनाने की मांग की है।

इस घटनाक्रम के बाद गांव में चिंता का माहौल है और लोग चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।


सीएचसी जानसठ को बताया सबसे उपयुक्त स्थान

ग्रामीणों का कहना है कि सीएचसी जानसठ सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं से युक्त सरकारी अस्पताल है। यहां प्रशिक्षित चिकित्सक, आवश्यक दवाइयां और जांच संबंधी बुनियादी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।

यदि टीबी जांच एवं उपचार शिविर यहां संचालित किया जाए तो न केवल सादपुर बल्कि आसपास के कई गांवों के मरीजों को भी लाभ मिलेगा। मरीजों को समय पर दवाइयां, चिकित्सकीय परामर्श और नियमित निगरानी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।

उनका मानना है कि इससे टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को भी मजबूती मिलेगी और मरीजों के उपचार में निरंतरता बनी रहेगी।


ग्रामीणों ने एसडीएम से की त्वरित हस्तक्षेप की अपील

ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी से जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अनुरोध किया कि ग्राम गालिबपुर में आयोजित होने वाले टीबी कैंप को तत्काल सीएचसी जानसठ में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए जाएं।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल सादपुर के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के अनेक गांवों के मरीजों के लिए भी राहतकारी सिद्ध होगा। इससे मरीजों का समय, धन और शारीरिक कष्ट तीनों कम होंगे।


स्वास्थ्य विभाग से स्थलीय निरीक्षण कराने की भी मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी अनुरोध किया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गांव का स्थलीय निरीक्षण करें और वास्तविक स्थिति का आकलन करें।

उनका कहना है कि यदि अधिकारी स्वयं गांव में आकर मरीजों की संख्या, उनकी आर्थिक स्थिति और आने-जाने की कठिनाइयों को देखेंगे तो उचित निर्णय लेने में आसानी होगी।

ग्रामीणों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य मरीजों तक सुविधा पहुंचाना है और योजनाओं का लाभ तभी प्रभावी होगा जब सेवाएं आमजन की पहुंच के भीतर हों।


जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है समय पर उपचार

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार टीबी जैसी संक्रामक बीमारी के उपचार में नियमित दवा, समय पर जांच और चिकित्सकीय निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी कारणवश मरीज उपचार बीच में छोड़ देता है या नियमित जांच नहीं करा पाता, तो बीमारी की गंभीरता बढ़ने की आशंका रहती है।

इसी कारण ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को मरीजों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाया जाए, ताकि उपचार प्रक्रिया बाधित न हो और मरीजों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।


ग्रामीणों ने जताई शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद

ग्रामीणों को उम्मीद है कि उपजिलाधिकारी मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करेंगे और मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने के दौरान शकील इस्लाम, हमजा गुलजार, सजिद सहित ग्राम सादपुर के अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि टीबी जांच एवं उपचार शिविर को मरीजों की सुविधा के अनुसार निकटवर्ती सरकारी अस्पताल में संचालित किया जाए, ताकि गंभीर रोगों से जूझ रहे लोगों को समय पर और सुलभ चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।


ग्राम सादपुर के ग्रामीणों द्वारा उठाई गई यह मांग स्वास्थ्य सेवाओं की सुगमता और मरीजों की सुविधा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि टीबी जांच एवं उपचार शिविर को सीएचसी जानसठ में स्थानांतरित किया जाता है तो न केवल सादपुर बल्कि आसपास के अनेक गांवों के मरीजों को भी समय पर जांच, दवा और चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध हो सकेगा। अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन के आगामी निर्णय पर टिकी है, जिससे गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

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