ईरान में सत्ता समीकरण बदले? राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के अधिकार सीमित होने का दावा, सुरक्षा और परमाणु नीति पर नई चर्चा तेज
News-Desk
7 min read
Iran news, IRGC, Masoud Pezeshkian, अंतरराष्ट्रीय समाचार, अमेरिका ईरान वार्ता, अहमद वाहिदी, ईरान, मध्य पूर्व, मसूद पजशकियान, मुजतबा खामेनेई, सुप्रीम लीडर, हूती विद्रोही, होर्मुज जलडमरूमध्यमध्य पूर्व की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। ईरान में राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के अधिकारों में कथित कटौती को लेकर नई रिपोर्ट सामने आई है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे रणनीतिक मामलों में राष्ट्रपति की भूमिका सीमित किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इस संबंध में ईरानी सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े अहम निर्णयों में अब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिका और अधिक प्रभावशाली मानी जा रही है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह ईरान की सत्ता संरचना और नीति निर्माण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका के साथ संभावित वार्ता जैसे रणनीतिक विषयों पर राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की भूमिका सीमित कर दी गई है।
दावे के अनुसार, इन संवेदनशील मामलों में अब IRGC के कमांडर अहमद वाहिदी की सलाह और निर्णय को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका अर्थ यह बताया जा रहा है कि ऐसे मामलों में राष्ट्रपति की मंजूरी अंतिम निर्णय का आधार नहीं रहेगी।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की आधिकारिक संस्थाओं ने इस विषय पर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।
राष्ट्रपति की नाराजगी और इस्तीफे की चर्चाएं
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि राष्ट्रपति मसूद पजशकियान लंबे समय से इस बात से असंतुष्ट थे कि उनकी सरकार को कई महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्णयों से दूर रखा जा रहा है।
बताया गया है कि उन्होंने पहले इस्तीफा देने की इच्छा भी जताई थी। हालांकि, इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, बाद में सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से स्पष्ट संकेत दिया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में निर्णय सैन्य नेतृत्व और सुरक्षा संस्थाओं की सलाह के अनुरूप लिए जाएंगे।
ईरान की सत्ता व्यवस्था को समझना क्यों जरूरी है
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था अन्य देशों से काफी अलग मानी जाती है। यहां राष्ट्रपति सरकार का निर्वाचित प्रमुख होता है, लेकिन रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सर्वोच्च अधिकार सुप्रीम लीडर के पास होते हैं।
इसके अलावा IRGC भी देश की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में प्रभावशाली भूमिका निभाता है। यही कारण है कि ईरान में नीति निर्माण केवल निर्वाचित सरकार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई संस्थाएं इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसी पृष्ठभूमि में सामने आई यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।
अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अभी भी असमंजस
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
संभावित वार्ता की तारीख और स्थान तय नहीं हो सका है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान और कतर संभावित मेजबान देशों के रूप में चर्चा में हैं और दोनों देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।
यदि यह वार्ता होती है तो इसका असर परमाणु समझौते, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है।
नई रणनीति पर चर्चा: सीधी जंग नहीं, आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार ईरान अब प्रत्यक्ष सैन्य टकराव के बजाय आर्थिक और सामरिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर अधिक ध्यान दे रहा है।
बताया जा रहा है कि समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों पर प्रभाव डालकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की लागत बढ़ाने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी रणनीति अपनाई जाती है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर फिर बढ़ा तनाव
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि IRGC ने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ रहे एक MQ-9 रीपर ड्रोन को एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से मार गिराया है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ड्रोन किस देश का था और इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी उपलब्ध नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार पर प्रभाव डाल सकता है।
अमेरिका भी तलाश रहा नए विकल्प
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका की सैन्य संस्था सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपने विश्लेषकों से ईरान पर दबाव बढ़ाने के नए विकल्पों पर सुझाव मांगे हैं।
बताया जा रहा है कि विभिन्न रणनीतिक विकल्पों का मूल्यांकन किया जा रहा है ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिकी हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत सार्वजनिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद बदला समुद्री मार्ग
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है।
रिपोर्ट के अनुसार, यमन के हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद छह सऊदी सुपरटैंकरों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब मार्ग के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से होकर लंबा समुद्री रास्ता अपनाया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जहाजों को लंबे मार्ग अपनाने पड़ते हैं तो परिवहन लागत, बीमा खर्च और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर दुनिया की नजर
ईरान, अमेरिका, इजराइल, खाड़ी देशों और क्षेत्रीय संगठनों के बीच जारी घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
परमाणु कार्यक्रम, समुद्री सुरक्षा, तेल आपूर्ति, क्षेत्रीय संघर्ष और कूटनीतिक वार्ताएं आने वाले समय में पश्चिम एशिया की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में किसी भी नए निर्णय या कूटनीतिक पहल का असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
क्या आगे बढ़ सकती है कूटनीतिक गतिविधियां?
हालिया घटनाक्रम के बीच यह संभावना भी जताई जा रही है कि विभिन्न देशों की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
हालांकि, वार्ता कब और कहां होगी, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बयानों और कूटनीतिक गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।

