Muzaffarnagar और आसपास से प्रमुख खबरें

Muzaffarnagar में भाकियू की ऐतिहासिक रातभर महापंचायत, 16 मांगों पर सरकार को संदेश; 23 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना भवन घेराव का ऐलान

Muzaffarnagar BKU Mahapanchayat के दौरान भारतीय किसान यूनियन ने किसानों से जुड़े कई मुद्दों को एक साथ उठाते हुए सरकार के सामने 16 सूत्रीय मांगों का एजेंडा रखा। राजकीय इंटर कॉलेज यानी जीआईसी मैदान में आयोजित इस महापंचायत को संगठन की ओर से पहली बार रातभर चलने वाली विशाल पंचायत के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। जीआईसी मैदान के साथ महावीर चौक के आसपास ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और वाहनों की मौजूदगी से शहर में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सामने रखा। गन्ने का मूल्य, चीनी मिलों पर बकाया भुगतान, न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी, कृषि बिजली, उर्वरक की उपलब्धता, कृषि ऋण, आवारा पशु, फसल बीमा, सिंचाई और भूमि अधिग्रहण जैसे विषयों को मांगपत्र में शामिल किया गया।

महापंचायत के दौरान सबसे अधिक चर्चा गन्ने के भाव और किसानों के बकाया भुगतान को लेकर रही। भाकियू ने आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने का लाभकारी मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग रखी। साथ ही पुराने बकाये का ब्याज सहित भुगतान कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

इसी क्रम में चौधरी राकेश टिकैत ने 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित गन्ना भवन पर विशाल पंचायत आयोजित करने का ऐलान किया। इस घोषणा के बाद मुजफ्फरनगर की महापंचायत का अगला चरण लखनऊ में प्रस्तावित कार्यक्रम के रूप में सामने आया है।

जीआईसी मैदान में रातभर चली महापंचायत, दूर-दराज से पहुंचे किसान

मुजफ्फरनगर का जीआईसी मैदान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान संगठनों के बड़े आयोजनों के लिए जाना जाता रहा है। इस बार भारतीय किसान यूनियन की ओर से आयोजित महापंचायत को रातभर चलाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों के साथ पहुंचे।

महापंचायत के लिए जीआईसी मैदान और महावीर चौक के आसपास व्यापक स्तर पर लोगों की मौजूदगी रही। किसानों की संख्या बढ़ने के साथ आसपास के मार्गों पर भी वाहनों का दबाव बढ़ गया। इस कारण महावीर चौक, जानसठ फ्लाईओवर और आर्य समाज रोड पर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं।

आयोजन के दौरान किसान नेताओं ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सामने रखा। मांगों में कुछ विषय राज्य स्तर के थे, जबकि कई मांगों का संबंध केंद्र सरकार की नीतियों और राष्ट्रीय कृषि व्यवस्था से था।

गन्ने के ₹500 प्रति क्विंटल भाव की मांग बनी प्रमुख मुद्दा

महापंचायत में गन्ने के मूल्य को लेकर भाकियू ने स्पष्ट मांग रखी कि नए पेराई सत्र के लिए गन्ने का लाभकारी मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल किया जाए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए गन्ना लंबे समय से कृषि आय का प्रमुख आधार रहा है। ऐसे में गन्ने के मूल्य और चीनी मिलों से भुगतान का मुद्दा क्षेत्रीय किसान राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि नया पेराई सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन गन्ने का भाव अभी घोषित नहीं किया गया है। इसी संदर्भ में संगठन ने ₹500 प्रति क्विंटल की मांग सामने रखी।

इसके साथ ही चीनी मिलों पर किसानों की पुरानी बकाया राशि का भुगतान ब्याज सहित करने की मांग रखी गई। भाकियू के 16 सूत्रीय एजेंडे में गन्ने का मूल्य और भुगतान सबसे प्रमुख विषयों में शामिल रहा।

23 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना भवन पर पंचायत का ऐलान

मुजफ्फरनगर की महापंचायत से भाकियू ने अपने अगले बड़े कार्यक्रम की घोषणा भी कर दी। चौधरी राकेश टिकैत ने 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित गन्ना भवन पर विशाल पंचायत आयोजित करने की बात कही।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब संगठन ने गन्ने के नए पेराई सत्र से पहले मूल्य निर्धारण और बकाया भुगतान के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। लखनऊ में प्रस्तावित पंचायत का केंद्र भी गन्ना और किसानों से जुड़े मुद्दे रहेंगे।

संगठन की ओर से इसे आगे की कार्रवाई के रूप में रखा गया है। इसके लिए किसानों की भागीदारी और संगठनात्मक स्तर पर तैयारियों का महत्व रहेगा।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भेजे गए अलग-अलग मांगपत्र

महापंचायत के समापन के बाद भाकियू की ओर से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 16 सूत्रीय मांगपत्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 15 सूत्रीय ज्ञापन भेजा गया।

दोनों मांगपत्रों में किसानों से जुड़े मुद्दों को अलग-अलग स्तर पर रखा गया। राज्य सरकार से संबंधित मांगों में बिजली, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय समस्याओं के विषय शामिल रहे, जबकि केंद्र से संबंधित मांगों में MSP, कृषि नीति, व्यापार समझौते, कृषि ऋण और अन्य राष्ट्रीय स्तर के विषय रखे गए।

इस तरह महापंचायत का एजेंडा केवल गन्ने के मूल्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों को एक साथ शामिल किया गया।

MSP पर कानूनी गारंटी की मांग भी एजेंडे में

भाकियू ने सभी प्रमुख फसलों के लिए लाभकारी मूल्य पर पारदर्शी और मजबूत सरकारी खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। इसके साथ स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार MSP को कानूनी गारंटी देने की मांग भी उठाई गई।

किसानों की ओर से लंबे समय से MSP और सरकारी खरीद की व्यवस्था को लेकर अलग-अलग मंचों पर चर्चा होती रही है। मुजफ्फरनगर की पंचायत में भी यह मुद्दा 16 सूत्रीय मांगों के प्रमुख हिस्से के रूप में सामने आया।

संगठन ने केवल MSP घोषित किए जाने के बजाय सरकारी खरीद को प्रभावी और पारदर्शी बनाने की मांग रखी। मांगपत्र में कृषि उपज के लिए ऐसी व्यवस्था की बात कही गई है, जिसमें किसानों को लाभकारी मूल्य और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हो।

कृषि बिजली मुफ्त और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 300 यूनिट मुफ्त बिजली की मांग

महापंचायत में बिजली से संबंधित मांगें भी प्रमुखता से उठाई गईं। भाकियू ने कृषि कार्यों के लिए पूरी तरह मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की। इसके अलावा ग्रामीण और घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की मांग भी रखी गई।

संगठन ने बिजली संशोधन विधेयक 2025 और स्मार्ट मीटर व्यवस्था को वापस लेने की मांग की। साथ ही बिजली के निजीकरण का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग भी मांगपत्र में शामिल की गई।

बिजली का मुद्दा किसानों के लिए सिंचाई और कृषि लागत से सीधे जुड़ा हुआ है। ट्यूबवेल, सिंचाई पंप और अन्य कृषि कार्यों में बिजली की जरूरत होती है। ऐसे में बिजली की कीमत और उपलब्धता कृषि लागत को प्रभावित करने वाले प्रमुख विषयों में शामिल है।

डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता की मांग

बुवाई के समय खाद और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर भी भाकियू ने मांग रखी। संगठन ने डीएपी, यूरिया और अन्य आवश्यक उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।

मांगपत्र में उर्वरक सब्सिडी बहाल रखने तथा कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही गई है। किसानों के लिए समय पर खाद मिलना कृषि चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि बुवाई के दौरान उर्वरक की उपलब्धता प्रभावित होने पर खेती की लागत और संचालन दोनों पर असर पड़ सकता है।

इसी वजह से महापंचायत के एजेंडे में खाद की उपलब्धता को अलग से स्थान दिया गया।

आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान की मांग

किसानों के सामने आवारा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान का मुद्दा भी पंचायत में रखा गया। भाकियू ने ग्राम स्तर पर स्थायी व्यवस्था करने और गौशालाओं के नियमित संचालन की प्रभावी निगरानी की मांग की।

संगठन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशुओं की समस्या से खेती प्रभावित होती है। किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त समय और संसाधन लगाने पड़ते हैं।

इसी को देखते हुए मांगपत्र में केवल अस्थायी व्यवस्था के बजाय ग्राम स्तर पर स्थायी प्रबंध और गौशालाओं की निगरानी की बात कही गई है।

बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की मांग

प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को लेकर भी भाकियू ने अपना एजेंडा रखा। बाढ़, सूखा और ओलावृष्टि जैसी परिस्थितियों में किसानों को तत्काल मुआवजा देने की मांग की गई।

इसके साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा कर सार्वजनिक क्षेत्र पर आधारित अधिक पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग भी सामने रखी गई।

फसल को मौसम संबंधी नुकसान होने पर किसान की पूरी कृषि आय प्रभावित हो सकती है। इसलिए आपदा के बाद समय पर सर्वे, नुकसान का आकलन और मुआवजे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। पंचायत में इसी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की मांग की गई।

नहरों की सफाई और टेल तक पानी पहुंचाने की मांग

सिंचाई व्यवस्था में सुधार भी 16 सूत्रीय एजेंडे का हिस्सा रहा। भाकियू ने नहरों की समय पर सफाई कराने, नहरों के अंतिम छोर यानी टेल तक पानी पहुंचाने और बंद पड़े सरकारी नलकूपों को तत्काल चालू कराने की मांग की।

कृषि क्षेत्र में सिंचाई की उपलब्धता सीधे फसल उत्पादन से जुड़ी होती है। नहरों में पानी की आपूर्ति और सरकारी नलकूपों का संचालन विशेष रूप से उन क्षेत्रों के किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जहां सिंचाई के वैकल्पिक साधन सीमित हैं।

मांगपत्र में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इन बिंदुओं को अलग-अलग शामिल किया गया है।

कृषि ऋण माफी और ब्याजमुक्त ऋण की मांग

किसानों के कर्ज को लेकर भी भाकियू ने व्यापक मांग रखी। छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऋण पुनर्गठन, संपूर्ण कर्ज माफी और ब्याजमुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने की मांग की गई।

इसके साथ कठोर वसूली पर रोक लगाने की मांग भी रखी गई। संगठन ने कृषि ऋण को किसानों की आर्थिक स्थिति के अनुरूप व्यवस्थित करने पर जोर दिया।

कृषि लागत बढ़ने, फसल मूल्य में उतार-चढ़ाव और प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों के बीच किसान ऋण के मुद्दे को लेकर संगठन ने इसे अपने मांगपत्र का प्रमुख हिस्सा बनाया।

मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता और समय पर भुगतान की मांग

कृषि उपज की बिक्री से संबंधित मंडी व्यवस्था को लेकर भी भाकियू ने मांगें रखीं। संगठन ने पारदर्शी तौल, समयबद्ध भुगतान और बिचौलियों के शोषण पर रोक लगाने की मांग की।

किसान के लिए फसल की बिक्री के समय सही तौल और समय पर भुगतान महत्वपूर्ण होता है। मांगपत्र में मंडी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की बात कही गई है।

यह मांग MSP और सरकारी खरीद से जुड़े मुद्दे के साथ भी जुड़ती है, क्योंकि किसान के लिए केवल मूल्य घोषित होना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि वास्तविक खरीद और भुगतान व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है।

किसान आंदोलनों से जुड़े मुकदमे वापस लेने की मांग

भाकियू ने किसान आंदोलनों के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा कराने और उन्हें वापस लेने की मांग भी रखी।

मांगपत्र में कहा गया है कि ऐसे मामलों की समीक्षा की जाए और जिन मामलों में वापसी का आधार बनता हो, उनमें कार्रवाई की जाए। यह मुद्दा संगठन की राजनीतिक और प्रशासनिक मांगों में शामिल रहा।

डीजल, बीज और कृषि उपकरणों की लागत पर चिंता

कृषि लागत को लेकर भी पंचायत में आवाज उठाई गई। भाकियू ने डीजल, बीज, कीटनाशक और कृषि उपकरणों की बढ़ती कीमतों पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की।

खेती में लागत कई स्तरों पर आती है। खेत की तैयारी से लेकर बुवाई, सिंचाई, खाद, कीटनाशक, कटाई और परिवहन तक किसानों को अलग-अलग खर्च उठाने पड़ते हैं। ऐसे में कृषि लागत और फसल मूल्य के बीच संतुलन का मुद्दा किसानों की आय से जुड़ा रहता है।

महापंचायत के एजेंडे में इस विषय को शामिल करते हुए कृषि लागत कम करने की मांग सामने रखी गई।

चार श्रम संहिताओं और कई नीतियों को वापस लेने की मांग

भाकियू ने किसानों और कृषि मजदूरों के हितों से जुड़े कई नीतिगत मुद्दे भी उठाए। संगठन ने चारों श्रम संहिताओं, बीज विधेयक, राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति और राष्ट्रीय सहकारिता नीति को वापस लेने की मांग रखी।

ये मुद्दे गन्ने और कृषि मूल्य से आगे बढ़कर कृषि व्यवस्था और ग्रामीण श्रम से संबंधित व्यापक नीतिगत विषयों तक पहुंचते हैं।

मांगपत्र में संगठन ने ऐसी नीतियों को वापस लेने की मांग की है जिन्हें वह किसानों और कृषि मजदूरों के हितों के प्रतिकूल मानता है।

भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास पर भी उठी आवाज

भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास को लेकर भाकियू ने कहा कि उचित मुआवजे और पुनर्वास के बिना किसानों की बेदखली या बुलडोजर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

संगठन ने भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के सख्ती से पालन की मांग की। इस मांग का संबंध उन किसानों और भूमि मालिकों से है जिनकी जमीन किसी परियोजना या अन्य उद्देश्य के लिए अधिग्रहित की जाती है।

मांगपत्र में उचित मुआवजा और पुनर्वास को महत्वपूर्ण शर्त के रूप में रखा गया है।

मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर भी भाकियू का रुख

किसान पंचायत के एजेंडे में अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ा विषय भी शामिल रहा। भाकियू ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसे किसी भी मुक्त व्यापार समझौते को स्वीकार न करने की मांग की, जिसे संगठन भारतीय कृषि और डेयरी के लिए नुकसानदेह मानता है।

इसके अलावा विदेशी दुग्ध उत्पादों के आयात पर रोक लगाने की मांग भी रखी गई।

यह मुद्दा खास तौर पर कृषि और डेयरी उत्पादों के घरेलू बाजार, किसानों की आय और विदेशी उत्पादों से संभावित प्रतिस्पर्धा से जुड़ा है।

ग्रामीण रोजगार और न्यूनतम मजदूरी की मांग

मांगपत्र में ग्रामीण रोजगार से जुड़ी मांग भी शामिल की गई। भाकियू ने वीबी जीराम जी के अंतर्गत न्यूनतम 200 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने और ₹700 प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग रखी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि मजदूरों और छोटे किसानों की आय एक-दूसरे से जुड़ी होती है। इसलिए रोजगार और मजदूरी से संबंधित मांग को भी किसान संगठन के एजेंडे में स्थान दिया गया।

सोनाली नदी पर मजबूत बांध और पुरकाजी को तहसील बनाने की मांग

महापंचायत में स्थानीय मुद्दों को भी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मांगों के साथ शामिल किया गया। खादर क्षेत्र को बाढ़ से स्थायी रूप से बचाने के लिए सोनाली नदी पर मजबूत बांध बनाने की मांग रखी गई।

इसके साथ पुरकाजी को अलग तहसील का दर्जा देने की मांग भी प्रमुख स्थानीय मुद्दों में शामिल रही।

खादर क्षेत्र में बाढ़ और जलभराव की समस्या का स्थानीय कृषि और जनजीवन पर असर पड़ने की बात किसान संगठन लंबे समय से उठाते रहे हैं। इसी संदर्भ में सोनाली नदी पर मजबूत बांध की मांग महापंचायत के स्थानीय एजेंडे में रखी गई।

पुरकाजी को पृथक तहसील का दर्जा देने की मांग का संबंध क्षेत्रीय प्रशासनिक व्यवस्था से है। भाकियू ने इसे भी सरकार के सामने प्रमुख स्थानीय मांग के रूप में रखा।

महापंचायत के दौरान शहर में यातायात प्रभावित

रातभर चली महापंचायत का असर मुजफ्फरनगर शहर की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा। महावीर चौक, जानसठ फ्लाईओवर और आर्य समाज रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लगने की जानकारी सामने आई।

बड़ी संख्या में किसानों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के पहुंचने के कारण शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ा। प्रशासन और पुलिस के लिए भीड़ और यातायात को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण रहा।

एसपी ट्रैफिक अतुल कुमार चौबे के नेतृत्व में पुलिस बल ने रूट डायवर्जन की व्यवस्था की। शिव चौक, मीनाक्षी चौक और राणा चौक के रास्ते बसों और भारी वाहनों का आवागमन कराने का प्रयास किया गया, ताकि प्रभावित मार्गों पर यातायात को सामान्य किया जा सके।

16 मांगों में स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय मुद्दों तक का विस्तार

भाकियू की इस महापंचायत की मांगों को देखा जाए तो इसका एजेंडा केवल गन्ने के भाव तक सीमित नहीं रहा। ₹500 प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य और बकाया भुगतान जैसे क्षेत्रीय किसान मुद्दों के साथ MSP की कानूनी गारंटी, कृषि ऋण, बिजली, उर्वरक, फसल बीमा, मंडी व्यवस्था और कृषि लागत जैसे विषय भी शामिल किए गए।

इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, मुक्त व्यापार समझौते, श्रम संहिताएं और राष्ट्रीय कृषि नीतियों जैसे विषय भी मांगपत्र का हिस्सा बने।

वहीं सोनाली नदी पर बांध और पुरकाजी को तहसील बनाने जैसी स्थानीय मांगों ने महापंचायत के एजेंडे को स्थानीय प्रशासनिक समस्याओं से भी जोड़ दिया।

अब 23 अक्टूबर के लखनऊ कार्यक्रम पर नजर

मुजफ्फरनगर की महापंचायत के बाद भाकियू ने 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित गन्ना भवन पर विशाल पंचायत का कार्यक्रम घोषित किया है। ऐसे में अब संगठन के अगले कदम का केंद्र लखनऊ रहेगा।

सबसे प्रमुख मुद्दों में गन्ने का मूल्य, बकाया भुगतान और आगामी पेराई सत्र से जुड़े फैसले रहेंगे। इसके अलावा महापंचायत में उठाई गई अन्य मांगों को भी आगे के कार्यक्रम में शामिल किए जाने की संभावना संगठन के मौजूदा एजेंडे से स्पष्ट होती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 16 सूत्रीय मांगपत्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 15 सूत्रीय ज्ञापन भेजे जाने के बाद अब इन मांगों पर सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई और प्रतिक्रिया पर भी किसानों की नजर रहेगी।

गन्ना मूल्य से शुरू हुई बहस का दायरा कई मुद्दों तक पहुंचा

मुजफ्फरनगर की महापंचायत में गन्ने का भाव सबसे प्रमुख मुद्दा जरूर रहा, लेकिन मंच से उठाई गई मांगों का दायरा काफी व्यापक था। कृषि लागत, बिजली, सिंचाई, कर्ज, MSP, फसल बीमा और मंडी व्यवस्था जैसे विषय सीधे किसान की आर्थिक स्थिति से जुड़े हैं।

वहीं आवारा पशु, बाढ़, स्थानीय प्रशासनिक सीमाएं और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दे किसानों की रोजमर्रा की समस्याओं से संबंधित हैं। दूसरी ओर व्यापार समझौते, कृषि विपणन नीति और श्रम संहिताएं राष्ट्रीय नीति से जुड़े प्रश्न हैं।

इस तरह भाकियू ने महापंचायत के जरिए कृषि से जुड़े अलग-अलग स्तर के मुद्दों को एक साझा 16 सूत्रीय एजेंडे में रखा।

मुजफ्फरनगर से लखनऊ तक बढ़ेगा किसान मुद्दों का अगला चरण

जीआईसी मैदान में रातभर चली महापंचायत के बाद अब 23 अक्टूबर 2026 की तारीख संगठन के अगले बड़े कार्यक्रम के तौर पर सामने आई है। गन्ना भवन, लखनऊ में प्रस्तावित पंचायत में गन्ने के मूल्य और भुगतान का मुद्दा केंद्र में रहने की बात भाकियू के मौजूदा एजेंडे से स्पष्ट है।

मुजफ्फरनगर में हजारों किसानों की मौजूदगी, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का जमावड़ा, 16 सूत्रीय मांगपत्र और मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापनों ने इस आयोजन को कई स्तरों पर चर्चा में ला दिया है। हालांकि इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या निर्णय या प्रतिक्रिया आती है, यह आगे की प्रक्रिया में स्पष्ट होगा।

फिलहाल भाकियू ने अपनी अगली तारीख तय कर दी है—23 अक्टूबर 2026, लखनऊ का गन्ना भवन। अब देखना होगा कि तब तक गन्ने के नए पेराई सत्र, मूल्य निर्धारण और बकाया भुगतान से जुड़े मुद्दों पर क्या स्थिति बनती है तथा महापंचायत में उठाई गई अन्य मांगों पर शासन की ओर से क्या कदम सामने आते हैं।

मुजफ्फरनगर की महापंचायत के बाद भाकियू ने 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के गन्ना भवन पर विशाल पंचायत का ऐलान किया है। गन्ने का ₹500 प्रति क्विंटल भाव, बकाया भुगतान, MSP की कानूनी गारंटी, कृषि बिजली, कर्ज, खाद, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और स्थानीय प्रशासनिक मांगों समेत 16 प्रमुख मुद्दे संगठन के एजेंडे में हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांगपत्र भेजे जाने के बाद अब इन मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया और आगामी लखनऊ कार्यक्रम पर नजर रहेगी।

News-Desk

News Desk एक समर्पित टीम है, जिसका उद्देश्य उन खबरों को सामने लाना है जो मुख्यधारा के मीडिया में अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं। हम निष्पक्षता, सटीकता, और पारदर्शिता के साथ समाचारों को प्रस्तुत करते हैं, ताकि पाठकों को हर महत्वपूर्ण विषय पर सटीक जानकारी मिल सके। आपके विश्वास के साथ, हम खबरों को बिना किसी पूर्वाग्रह के आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसी भी सवाल या जानकारी के लिए, हमें संपर्क करें: info@poojanews.com

News-Desk has 22877 posts and counting. See all posts by News-Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

2 × three =