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Karn Sharma ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट को कहा अलविदा, 20 साल के करियर पर लगा विराम; 3 अलग टीमों के साथ लगातार 3 IPL खिताब जीतने का बनाया था अनोखा रिकॉर्ड

Karn Sharma : भारतीय क्रिकेट के अनुभवी लेग स्पिनर कर्ण शर्मा ने इंटरनेशनल और घरेलू क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। 38 वर्षीय कर्ण ने करीब दो दशक लंबे क्रिकेट करियर के बाद खेल को अलविदा कहने का फैसला किया। भारत की जर्सी में उनका सफर भले ही ज्यादा लंबा नहीं रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में उन्होंने कई ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जो उन्हें भारतीय क्रिकेट के खास खिलाड़ियों की सूची में जगह देती हैं।

कर्ण शर्मा ने भारत के लिए एक टेस्ट, दो वनडे और एक टी-20 इंटरनेशनल मुकाबला खेला। 2014 में उन्होंने लगभग एक ही दौर में क्रिकेट के तीनों अंतरराष्ट्रीय फॉर्मेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। हालांकि इसके बाद उन्हें दोबारा टीम इंडिया में खेलने का अवसर नहीं मिला।

कर्ण ने यूपी टी20 लीग में कानपुर सुपरस्टार्स की ओर से खेलने के बाद अपने क्रिकेट करियर को विराम देने का फैसला किया है। वह 25 अगस्त को लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में मेरठ मेवरिक्स के खिलाफ अपना आखिरी मुकाबला खेलेंगे। इसके बाद लगभग 20 साल लंबा उनका घरेलू क्रिकेट सफर आधिकारिक रूप से समाप्त हो जाएगा।

कानपुर सुपरस्टार्स के साथ खेला आखिरी टूर्नामेंट

संन्यास की घोषणा से पहले कर्ण शर्मा यूपी टी20 लीग में कानपुर सुपरस्टार्स का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

लीग में उनका आखिरी मुकाबला 25 अगस्त को लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में मेरठ मेवरिक्स के खिलाफ प्रस्तावित है।

यही मुकाबला उनके लंबे क्रिकेट करियर का अंतिम मैच होगा।

38 साल की उम्र में क्रिकेट से विदाई लेने का कर्ण का फैसला ऐसे समय आया है जब उन्होंने भारतीय क्रिकेट के अलग-अलग स्तरों पर लगभग दो दशक तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

2014 में एक ही साल में तीनों फॉर्मेट में भारत के लिए डेब्यू

कर्ण शर्मा के अंतरराष्ट्रीय करियर की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने 2014 में भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में पदार्पण किया।

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में अपना एकमात्र टेस्ट मैच खेला। उस मुकाबले में कर्ण ने दोनों पारियों में दो-दो विकेट हासिल किए।

टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने का मौका मिलना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन कर्ण का अंतरराष्ट्रीय सफर अपेक्षाकृत छोटा रहा।

इसी वर्ष उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम में अपना एकमात्र टी-20 इंटरनेशनल मुकाबला भी खेला। इस मैच में उन्होंने इंग्लैंड के बल्लेबाज जो रूट को आउट किया था।

श्रीलंका के खिलाफ खेले दोनों वनडे

2014 में ही कर्ण शर्मा ने श्रीलंका के खिलाफ अपने दोनों वनडे इंटरनेशनल मुकाबले खेले।

इस तरह एक ही वर्ष में वह भारत के लिए टेस्ट, वनडे और टी-20 इंटरनेशनल में उतरने वाले खिलाड़ियों में शामिल हो गए।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें लंबा मौका नहीं मिला।

2015 में जिम्बाब्वे दौरे के लिए भी उनका चयन हुआ था, लेकिन चोट के कारण वह टीम से बाहर हो गए। इसके बाद कर्ण को दोबारा भारतीय टीम की जर्सी पहनने का मौका नहीं मिला।

चार अंतरराष्ट्रीय मैचों का छोटा लेकिन यादगार सफर

भारत के लिए कर्ण शर्मा का अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड संख्या के लिहाज से बहुत बड़ा नहीं है।

उन्होंने कुल एक टेस्ट, दो वनडे और एक टी-20 इंटरनेशनल मैच खेला।

लेकिन उनके लिए इन चार मुकाबलों की अहमियत अलग थी। घरेलू क्रिकेट और IPL में लगातार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारत के तीनों फॉर्मेट में पदार्पण करने का अवसर मिला।

खास तौर पर टेस्ट क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड जैसे बड़े मैदान पर पदार्पण उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा।

चोट ने रोका टीम इंडिया में वापसी का रास्ता

2015 में जिम्बाब्वे दौरे के लिए कर्ण शर्मा का चयन हुआ था।

यह उनके लिए भारतीय टीम में अपनी जगह मजबूत करने का अवसर हो सकता था, लेकिन चोट ने उनकी योजनाओं पर पानी फेर दिया।

वह दौरे से बाहर हो गए और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी नहीं कर सके।

इसके बावजूद उन्होंने घरेलू क्रिकेट और IPL में अपना सफर जारी रखा।

घरेलू क्रिकेट में करीब 20 साल लंबा सफर

कर्ण शर्मा का असली प्रभाव घरेलू क्रिकेट में दिखाई देता है।

उन्होंने 2007-08 सीजन में फर्स्ट क्लास, लिस्ट-A और टी-20 क्रिकेट में पदार्पण किया था।

करीब 20 वर्षों तक वह अलग-अलग घरेलू टीमों के लिए खेलते रहे।

उन्होंने रेलवे, आंध्र और विदर्भ जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया और घरेलू क्रिकेट में लगातार अपना योगदान दिया।

उनका करियर केवल लेग स्पिन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बल्लेबाजी में भी उपयोगी पारियां खेलीं और अपने पहले रणजी ट्रॉफी मुकाबले में ही शतक लगाया।

डेब्यू रणजी मैच में ही शतक

कर्ण शर्मा के घरेलू क्रिकेट करियर की शुरुआत ही शानदार रही।

अपने पहले रणजी ट्रॉफी मैच में उन्होंने शतक लगाया।

एक गेंदबाज के रूप में पहचान बनाने वाले खिलाड़ी का प्रथम श्रेणी क्रिकेट के पदार्पण मुकाबले में शतक लगाना उनके ऑलराउंड क्रिकेट कौशल को दर्शाता है।

हालांकि आगे चलकर उनकी मुख्य पहचान लेग स्पिनर के तौर पर मजबूत हुई।

2012-13 में BCCI का बेस्ट अंडर-25 क्रिकेटर अवॉर्ड

2012-13 रणजी सीजन कर्ण शर्मा के करियर के महत्वपूर्ण पड़ावों में रहा।

उन्होंने उस सीजन में तीन रणजी मैचों में 21 विकेट हासिल किए।

उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें BCCI के बेस्ट अंडर-25 क्रिकेटर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान उनके लिए उस दौर में बड़ी उपलब्धि था और इसी तरह के प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजर में पहुंचाया।

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 270 विकेट

कर्ण शर्मा के घरेलू क्रिकेट आंकड़े उनके लंबे और प्रभावी करियर की कहानी बताते हैं।

उन्होंने 97 फर्स्ट क्लास मैचों में 270 विकेट हासिल किए।

लिस्ट-A क्रिकेट में उनके नाम 123 मुकाबलों में 153 विकेट हैं।

वहीं टी-20 क्रिकेट में उन्होंने 191 मैच खेलकर 168 विकेट अपने नाम किए।

ये आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने क्रिकेट के तीनों घरेलू फॉर्मेट में लंबे समय तक अपनी उपयोगिता बनाए रखी।

IPL में बनाया ऐसा रिकॉर्ड जिसे भूलना मुश्किल

कर्ण शर्मा का नाम IPL इतिहास में एक खास रिकॉर्ड के कारण भी दर्ज है।

वह लगातार तीन सीजन में तीन अलग-अलग टीमों के साथ IPL खिताब जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने थे।

उन्होंने 2016 में सनराइजर्स हैदराबाद के साथ IPL ट्रॉफी जीती।

इसके अगले साल 2017 में मुंबई इंडियंस के साथ चैंपियन बने।

फिर 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ खिताब जीत लिया।

लगातार तीन साल तीन अलग टीमों के साथ IPL चैंपियन बनना अपने आप में बेहद दुर्लभ उपलब्धि है।

2016 में सनराइजर्स हैदराबाद के साथ पहला IPL खिताब

कर्ण शर्मा ने 2016 में सनराइजर्स हैदराबाद के साथ अपना पहला IPL खिताब जीता।

यह टीम का भी पहला IPL खिताब था।

कर्ण की गेंदबाजी ने टीम के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्होंने स्पिन विकल्प के रूप में अपना योगदान दिया।

यह उनके IPL करियर का पहला बड़ा टीम खिताब था।

2017 में मुंबई इंडियंस के साथ फिर बने चैंपियन

2016 के बाद कर्ण शर्मा मुंबई इंडियंस का हिस्सा बने।

2017 में मुंबई इंडियंस ने IPL का खिताब जीता और कर्ण लगातार दूसरे साल चैंपियन टीम का हिस्सा बने।

एक ही खिलाड़ी का लगातार दूसरे वर्ष अलग टीम के साथ IPL ट्रॉफी जीतना पहले ही दुर्लभ था।

लेकिन कर्ण यहीं नहीं रुके।

2018 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ तीसरी लगातार ट्रॉफी

2018 में कर्ण शर्मा चेन्नई सुपर किंग्स के साथ जुड़े।

चेन्नई ने उस सीजन शानदार वापसी करते हुए IPL खिताब जीता।

इस तरह कर्ण ने लगातार तीसरे साल IPL ट्रॉफी अपने नाम की—और वह भी लगातार तीन अलग-अलग टीमों के साथ।

2016 में सनराइजर्स हैदराबाद, 2017 में मुंबई इंडियंस और 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स।

यही रिकॉर्ड कर्ण शर्मा के IPL करियर की सबसे बड़ी पहचान बन गया।

2021 में चौथी IPL ट्रॉफी भी जीती

कर्ण शर्मा ने 2021 में भी चेन्नई सुपर किंग्स के साथ IPL खिताब जीता।

इस तरह उनके नाम कुल चार IPL ट्रॉफियां हो गईं।

उनका IPL सफर अलग-अलग टीमों और अलग-अलग भूमिकाओं के साथ आगे बढ़ता रहा, लेकिन उनकी सबसे खास पहचान लगातार चैंपियन टीमों का हिस्सा बनने की रही।

2025 में मुंबई इंडियंस के लिए खेला आखिरी IPL मैच

कर्ण शर्मा का आखिरी IPL मैच 2025 में मुंबई इंडियंस के लिए रहा।

इसके बाद उन्होंने घरेलू स्तर पर अपना क्रिकेट जारी रखा और यूपी टी20 लीग में कानपुर सुपरस्टार्स की ओर से मैदान पर उतरे।

अब 25 अगस्त को मेरठ मेवरिक्स के खिलाफ मुकाबले के बाद उनका प्रतिस्पर्धी क्रिकेट करियर पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

2014 IPL ऑक्शन में अनकैप्ड भारतीय के लिए लगी थी बड़ी बोली

कर्ण शर्मा का IPL करियर केवल ट्रॉफियों के कारण ही चर्चा में नहीं रहा।

2014 IPL ऑक्शन में सनराइजर्स हैदराबाद ने उन्हें 3.75 करोड़ रुपये में खरीदा था।

उस समय वह IPL नीलामी में सबसे महंगे अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी बने थे।

यह बोली उस समय उनके प्रदर्शन और संभावनाओं पर फ्रेंचाइजियों के भरोसे को दर्शाती थी।

बाद में उनके करियर में कई बड़े IPL खिताब जुड़े।

कर्ण की कहानी बताती है कि IPL में निरंतरता कितनी महत्वपूर्ण है

IPL में एक सीजन अच्छा खेलना अलग बात है, लेकिन लगातार अलग-अलग टीमों के साथ चैंपियन बनना बेहद कठिन है।

कर्ण शर्मा ने इस मामले में असाधारण निरंतरता दिखाई।

उन्होंने ऐसी टीमों के साथ खेला जो अलग-अलग परिस्थितियों और रणनीतियों के साथ मैदान में उतरती थीं।

फिर भी वह लगातार विजेता टीमों का हिस्सा बने रहे।

कर्ण शर्मा के अलावा किन खिलाड़ियों ने लगातार तीन खिताब जीते?

IPL में लगातार तीन सीजन चैंपियन टीम का हिस्सा बनने वाले खिलाड़ियों की सूची में कर्ण शर्मा के अलावा फिल सॉल्ट और सुयश शर्मा का नाम भी शामिल है।

फिल सॉल्ट और सुयश शर्मा ने 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ IPL खिताब जीता।

इसके बाद दोनों 2025 और 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की लगातार दो चैंपियन टीमों का हिस्सा रहे।

हालांकि कर्ण की उपलब्धि की खासियत यह है कि उनकी लगातार तीन ट्रॉफियां तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजियों के साथ आईं।

मेरठ से निकला लेग स्पिनर, भारतीय टीम तक पहुंचा

कर्ण शर्मा का संबंध मेरठ से है।

उत्तर प्रदेश के इस क्रिकेट क्षेत्र ने भारतीय क्रिकेट को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों दिए हैं और कर्ण भी इसी क्रिकेट संस्कृति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे।

घरेलू क्रिकेट में रेलवे, आंध्र और विदर्भ के लिए खेलने के बाद उन्होंने IPL के मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई।

भारत की टीम में जगह बनाना उनके करियर का बड़ा पड़ाव था।

एक टेस्ट, दो वनडे और एक टी-20—लेकिन IPL में बड़ी पहचान

कर्ण शर्मा के अंतरराष्ट्रीय मैचों की संख्या कम रही, लेकिन इससे उनके पूरे क्रिकेट करियर का आकलन नहीं किया जा सकता।

उनका बड़ा योगदान घरेलू क्रिकेट और IPL में रहा।

विशेष रूप से IPL में चार बार चैंपियन बनने और लगातार तीन अलग टीमों के साथ तीन खिताब जीतने का रिकॉर्ड उनके करियर को खास बनाता है।

कई क्रिकेटरों के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट ही करियर की अंतिम पहचान होती है, लेकिन कर्ण ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अपनी अलग विरासत बनाई।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट डेब्यू का अनुभव

कर्ण ने अपने एकमात्र टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ खेला।

एडिलेड में खेले गए इस मुकाबले में उन्होंने दोनों पारियों में दो-दो विकेट लिए।

टेस्ट क्रिकेट में विदेशी परिस्थितियों में पदार्पण करना किसी भी स्पिनर के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।

कर्ण ने इस मौके पर चार विकेट हासिल किए और अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत प्रभावी तरीके से की।

इंग्लैंड के खिलाफ T20I में जो रूट को किया आउट

कर्ण शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम में अपना एकमात्र टी-20 इंटरनेशनल मैच खेला।

इस मुकाबले में उन्होंने इंग्लैंड के प्रमुख बल्लेबाज जो रूट को आउट किया था।

टी-20 क्रिकेट में किसी बड़े बल्लेबाज का विकेट हासिल करना हमेशा गेंदबाज के लिए यादगार उपलब्धि होती है।

हालांकि इसके बाद कर्ण को भारत की टी-20 टीम में लगातार अवसर नहीं मिल सके।

श्रीलंका के खिलाफ वनडे सफर

2014 में ही कर्ण ने श्रीलंका के खिलाफ अपने दोनों वनडे मुकाबले खेले।

इस तरह उसी साल उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व कर लिया।

यह उपलब्धि उनके करियर के शुरुआती दौर की सबसे उल्लेखनीय बातों में से एक रही।

लेकिन चोट और चयन संबंधी परिस्थितियों के कारण उनका अंतरराष्ट्रीय सफर आगे नहीं बढ़ सका।

चोट के बाद नहीं मिली दोबारा वापसी

जिम्बाब्वे दौरे से बाहर होना कर्ण के अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।

चोट के कारण वह टीम से बाहर हो गए और फिर भारतीय टीम में दोबारा जगह नहीं बना पाए।

इसके बावजूद उन्होंने घरेलू क्रिकेट और IPL में खेलना जारी रखा।

कई खिलाड़ियों के लिए टीम इंडिया से बाहर होने के बाद करियर की गति धीमी पड़ जाती है, लेकिन कर्ण ने फ्रेंचाइजी और घरेलू क्रिकेट में खुद को प्रासंगिक बनाए रखा।

लगभग दो दशक तक लगातार मैदान पर

2007-08 में शुरुआत करने के बाद 2026 तक क्रिकेट खेलना कर्ण शर्मा की फिटनेस और निरंतरता को दर्शाता है।

इस दौरान उन्होंने क्रिकेट के नियमों, फॉर्मेट और रणनीतियों में कई बदलाव देखे।

टी-20 क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव के बीच उन्होंने खुद को इस फॉर्मेट के अनुरूप ढाला।

उनका 191 टी-20 मैचों में 168 विकेट का रिकॉर्ड इसी अनुकूलन क्षमता की तस्वीर पेश करता है।

घरेलू क्रिकेट में तीन टीमों का प्रतिनिधित्व

कर्ण शर्मा ने अपने घरेलू करियर में रेलवे, आंध्र और विदर्भ का प्रतिनिधित्व किया।

अलग-अलग राज्यों और टीमों के लिए खेलने का अनुभव उनके क्रिकेट करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने चयनकर्ताओं और IPL फ्रेंचाइजियों का ध्यान आकर्षित किया।

संन्यास का फैसला ऐसे समय आया जब करियर की लंबी पारी पूरी हो चुकी थी

38 वर्ष की उम्र में कर्ण शर्मा ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से विदाई का फैसला किया है।

उनका आखिरी मुकाबला यूपी टी20 लीग में होगा।

यह उनके लिए अपने गृह क्षेत्र उत्तर प्रदेश से जुड़े टूर्नामेंट में क्रिकेट को अलविदा कहने का भावनात्मक अवसर भी हो सकता है।

लखनऊ के इकाना स्टेडियम में मेरठ मेवरिक्स के खिलाफ मुकाबला उनके करियर का अंतिम प्रतिस्पर्धी मैच होगा।

टीम इंडिया में छोटा सफर, लेकिन रिकॉर्डबुक में खास जगह

कर्ण शर्मा का भारतीय टीम के साथ सफर केवल चार अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों तक सीमित रहा।

लेकिन क्रिकेट में किसी खिलाड़ी की पहचान केवल उसके अंतरराष्ट्रीय मैचों की संख्या से नहीं तय होती।

घरेलू क्रिकेट में 270 फर्स्ट क्लास विकेट, 153 लिस्ट-A विकेट और 168 टी-20 विकेट उनके लंबे योगदान को दर्शाते हैं।

इसके साथ चार IPL खिताब और लगातार तीन अलग टीमों के साथ ट्रॉफी जीतने का रिकॉर्ड उनके करियर को खास बनाता है।

कर्ण शर्मा की क्रिकेट कहानी का सबसे चमकदार अध्याय IPL

यदि कर्ण शर्मा के पूरे करियर में एक उपलब्धि चुननी हो, तो उनके लगातार तीन IPL खिताब सबसे अलग नजर आते हैं।

2016—सनराइजर्स हैदराबाद।

2017—मुंबई इंडियंस।

2018—चेन्नई सुपर किंग्स।

तीन साल, तीन टीमें और तीन ट्रॉफियां।

इसके बाद 2021 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ चौथा खिताब।

यह रिकॉर्ड लंबे समय तक IPL के इतिहास में उनकी सबसे खास पहचान बना रहेगा।

अब 25 अगस्त को होगा आखिरी मुकाबला

कर्ण शर्मा के प्रशंसकों के लिए अब 25 अगस्त की तारीख खास हो गई है।

लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में मेरठ मेवरिक्स के खिलाफ यूपी टी20 लीग का मुकाबला उनके क्रिकेट करियर का आखिरी मैच होगा।

इसके साथ वह करीब दो दशक से चली आ रही प्रतिस्पर्धी क्रिकेट यात्रा को विराम देंगे।

भारत के लिए उनका अंतरराष्ट्रीय सफर छोटा रहा, लेकिन घरेलू और IPL क्रिकेट में उन्होंने जो लंबी पारी खेली, वह उनके करियर को एक अलग पहचान देती है।

एक शांत लेकिन बेहद सफल क्रिकेट यात्रा का अंत

कर्ण शर्मा उन खिलाड़ियों में रहे जिन्होंने भारतीय क्रिकेट में लगातार सुर्खियों में रहने के बजाय लंबे समय तक अपना काम किया।

टीम इंडिया में सीमित अवसर मिलने के बावजूद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन जारी रखा। IPL में उन्हें अलग-अलग टीमों का भरोसा मिला और उन्होंने उस भरोसे को चार खिताबों में बदल दिया।

अब जब वह क्रिकेट से विदाई ले रहे हैं, तो उनके करियर की सबसे बड़ी तस्वीर यही है—एक ऐसा लेग स्पिनर जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित अवसरों के बावजूद घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में लंबी और प्रभावी पारी खेली।

कर्ण शर्मा का करीब 20 साल लंबा क्रिकेट सफर अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। 38 वर्षीय लेग स्पिनर ने इंटरनेशनल और घरेलू क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास का ऐलान किया है। भारत के लिए एक टेस्ट, दो वनडे और एक टी-20 खेलने वाले कर्ण की सबसे बड़ी पहचान IPL में बनी, जहां उन्होंने 2016 में सनराइजर्स हैदराबाद, 2017 में मुंबई इंडियंस और 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ लगातार तीन खिताब जीते और 2021 में चेन्नई के साथ चौथी ट्रॉफी भी अपने नाम की। अब 25 अगस्त को लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में मेरठ मेवरिक्स के खिलाफ यूपी टी20 लीग मुकाबला उनके प्रतिस्पर्धी क्रिकेट करियर का आखिरी मैच होगा।

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