फिल्मी चक्कर

कृति सेनन के रक्षाबंधन एड विवाद पर Kareena Kapoor ने साधी चुप्पी, माइक मेघना गुलजार की ओर बढ़ाया; बोलीं- सवाल का जवाब डायरेक्टर देंगी

Kriti Sanon Ad Controversy को लेकर बॉलीवुड में चल रही बहस के बीच अब अभिनेत्री करीना कपूर खान से भी सवाल किया गया, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर सीधे प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। फिल्म ‘दायरा’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में जब मीडिया ने Kareena Kapoor से एक्ट्रेसेस के कपड़ों, उनके स्क्रीन रिप्रेजेंटेशन और सोशल मीडिया ट्रोलिंग को लेकर सवाल पूछा, तो करीना ने जवाब देने के बजाय पास में बैठी फिल्म की निर्देशक मेघना गुलजार की ओर इशारा किया और माइक उनकी तरफ बढ़ा दिया।

करीना के इस अंदाज ने इवेंट में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद मेघना गुलजार ने सवाल का जवाब देते हुए कहा कि किसी फिल्म या स्क्रीन पर कलाकार का लुक और पहनावा उसके किरदार और निर्देशक की सोच के अनुसार तय होता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में केवल किसी एक अभिनेता या अभिनेत्री को सवालों के घेरे में खड़ा करना उचित नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम ने कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन से शुरू हुई बहस को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

करीना से पूछा गया- एक्ट्रेस के लिए कपड़ों की सीमाएं क्या होनी चाहिए?

ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान एक पत्रकार ने करीना कपूर से सोशल मीडिया पर महिला कलाकारों के कपड़ों और उनके रिप्रेजेंटेशन को लेकर होने वाली ट्रोलिंग के बारे में सवाल किया।

सवाल में यह जानने की कोशिश की गई कि एक अभिनेत्री के तौर पर सोशल मीडिया की आलोचनाओं के बीच उनकी क्या सीमाएं होनी चाहिए और कलाकारों को अपने पहनावे को लेकर किस तरह का नजरिया रखना चाहिए।

सवाल पूरा होते ही करीना ने खुद जवाब देने के बजाय माइक मेघना गुलजार की तरफ बढ़ा दिया।

करीना के इस इशारे के बाद मेघना ने इस विषय पर अपनी बात रखी।

मेघना गुलजार बोलीं- लुक किरदार और निर्देशक की सोच पर निर्भर

मेघना गुलजार ने कहा कि किसी फिल्म या स्क्रीन पर महिला या पुरुष कलाकार का लुक और पहनावा उस किरदार की जरूरत के अनुसार तय किया जाता है।

उनके मुताबिक, किसी पात्र का स्क्रीन प्रेजेंटेशन निर्देशक की सोच और कहानी की मांग से जुड़ा होता है।

मेघना ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे मामलों में सिर्फ किसी एक कलाकार से सवाल पूछना या उसे कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।

उनकी टिप्पणी को मौजूदा बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां अभिनेत्रियों के कपड़ों और उनके सार्वजनिक प्रतिनिधित्व को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं।

कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन से शुरू हुआ था विवाद

Kriti Sanon Ad Controversy की शुरुआत जीवा यानी GIVA ज्वेलरी के 36 सेकंड के रक्षाबंधन विज्ञापन से हुई थी।

इस विज्ञापन में कृति सेनन को ऑफ-व्हाइट ब्रालेट स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट पहने हुए दिखाया गया था।

विज्ञापन का उद्देश्य रक्षाबंधन के अवसर पर ज्वेलरी को प्रमोट करना था, लेकिन इसके सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने कृति के पहनावे पर सवाल उठाए।

आलोचना करने वाले लोगों का कहना था कि रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और पारंपरिक त्योहार से जुड़े विज्ञापन में इस तरह का आधुनिक पहनावा उपयुक्त नहीं है।

वहीं दूसरी ओर, कृति के समर्थकों ने इसे व्यक्तिगत पसंद और बदलते फैशन के संदर्भ में देखा।

यहीं से सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग विचार आमने-सामने आ गए।

कंगना रनोट ने बिना नाम लिए कृति के विज्ञापन पर उठाए सवाल

विवाद बढ़ने के दौरान अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए विज्ञापन की आलोचना की थी। उन्होंने कृति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को इसी विज्ञापन से जोड़कर देखा गया।

कंगना ने अपनी पोस्ट में महिलाओं के पास मौजूद अलग-अलग फैशन विकल्पों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया था कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार के दौरान भाई को राखी बांधते समय अत्यधिक रिवीलिंग कपड़े पहनने की जरूरत क्यों होनी चाहिए।

उनकी टिप्पणी ने विवाद को और ज्यादा चर्चा में ला दिया।

सोशल मीडिया पर इसके बाद कंगना के समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।

कृति सेनन ने भी दिया था स्पष्ट जवाब

कंगना की टिप्पणी के बाद कृति सेनन ने अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखा।

कृति ने कहा कि त्योहार का अर्थ केवल व्यक्ति के कपड़ों से निर्धारित नहीं होता। उनके मुताबिक, किसी परंपरा के प्रति व्यक्ति की भावनाएं और उस परंपरा का अर्थ अधिक महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने रक्षाबंधन को सुरक्षा और आपसी रिश्ते का त्योहार बताते हुए कहा कि वह और उनकी बहन एक-दूसरे को राखी बांधती हैं और दोनों यह मानती हैं कि महिलाएं भी एक-दूसरे की उतनी ही रक्षा कर सकती हैं जितनी किसी भाई से अपेक्षा की जाती है।

कृति ने इस बहस को महिलाओं के पहनावे पर नियंत्रण से जोड़ते हुए सवाल किया कि आखिर महिलाओं को यह बताना कब बंद किया जाएगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि समय के साथ एथनिक फैशन बदलता रहा है, लेकिन किसी महिला की संस्कृति के प्रति सम्मान को केवल उसके कपड़ों से नहीं मापा जाना चाहिए।

‘संस्कृति कपड़ों से नहीं, सोच और भावनाओं से’

कृति के बयान का मूल तर्क यही था कि किसी महिला के पहनावे को उसकी संस्कृति या परंपरा के प्रति सम्मान का अंतिम पैमाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने रक्षाबंधन के भावनात्मक पक्ष पर जोर दिया और कहा कि परंपराओं का संबंध व्यक्ति की भावनाओं और उनके अर्थ से है।

उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई।

एक वर्ग ने कृति के विचारों का समर्थन किया, जबकि दूसरे वर्ग ने कहा कि विज्ञापन बनाते समय त्योहार की पारंपरिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखना चाहिए था।

राहुल गांधी ने किया था कृति का समर्थन

विवाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम भी सामने आया। उन्होंने कृति की पोस्ट को री-शेयर करते हुए महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद का समर्थन किया।

राहुल गांधी ने कहा था कि कोई महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां जाती है, यह उसकी अपनी पसंद का विषय है।

उन्होंने महिलाओं के कपड़ों और जीवनशैली की ऑनलाइन निगरानी या ‘पुलिसिंग’ का विरोध किया और अपनी पोस्ट में ‘Smash the Patriarchy’ हैशटैग का इस्तेमाल किया।

इसके बाद यह विवाद केवल बॉलीवुड या विज्ञापन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, परंपरा और सार्वजनिक छवि को लेकर व्यापक सोशल मीडिया बहस का हिस्सा बन गया।

विवाद बढ़ने के बाद GIVA ने विज्ञापन हटाया

विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने के बाद ज्वेलरी ब्रांड GIVA की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया।

ब्रांड ने विवाद के बीच माफी मांगी और विज्ञापन को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया।

विवाद में विज्ञापन में कृति के पहनावे के अलावा पेट डॉग को राखी बांधने के दृश्य को लेकर भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

ब्रांड द्वारा विज्ञापन हटाए जाने के बाद विवाद की तीव्रता कुछ कम हुई, लेकिन इससे जुड़ी बहस सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में जारी रही।

अब करीना कपूर के सामने आया सवाल

इसी पृष्ठभूमि में जब करीना कपूर से एक अभिनेत्री के रूप में कपड़ों और सोशल मीडिया ट्रोलिंग को लेकर सवाल पूछा गया, तो उनका सीधे जवाब नहीं देना भी चर्चा का विषय बन गया।

करीना ने सवाल को नजरअंदाज करने के बजाय माइक मेघना गुलजार की ओर बढ़ा दिया।

यह प्रतिक्रिया कई मायनों में महत्वपूर्ण थी, क्योंकि सवाल केवल कृति सेनन के विज्ञापन से संबंधित नहीं था बल्कि व्यापक तौर पर अभिनेत्रियों के पहनावे और सोशल मीडिया पर होने वाली आलोचना से जुड़ा था।

करीना ने अपनी जगह निर्देशक को जवाब देने का अवसर दिया।

मेघना गुलजार ने बहस को अलग दिशा दी

मेघना गुलजार का जवाब व्यक्तिगत पसंद बनाम परंपरा की बहस में सीधे पक्ष लेने के बजाय फिल्म निर्माण की प्रक्रिया पर केंद्रित रहा।

उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर कलाकार का लुक उसके किरदार और निर्देशक की सोच से निर्धारित होता है।

यह बात खास तौर पर फिल्मों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी कलाकार का पहनावा कई बार कहानी, समय, स्थान, पात्र की पृष्ठभूमि और निर्देशक की रचनात्मक दृष्टि से तय होता है।

मेघना ने यह भी संकेत दिया कि किसी एक कलाकार से अकेले जवाब मांगना उचित नहीं, क्योंकि स्क्रीन पर दिखाई देने वाली चीजें पूरी रचनात्मक टीम के निर्णय का हिस्सा होती हैं।

बॉलीवुड में कपड़ों को लेकर बहस नई नहीं

अभिनेत्रियों के कपड़ों को लेकर विवाद बॉलीवुड के लिए नया नहीं है।

फिल्मों, विज्ञापनों, फोटोशूट और रेड कार्पेट पर कलाकारों के पहनावे को लेकर समय-समय पर सोशल मीडिया पर बहस होती रही है।

सोशल मीडिया के विस्तार के बाद यह प्रतिक्रिया और तेज हो गई है। किसी विज्ञापन या फिल्म का कोई छोटा वीडियो या तस्वीर कुछ ही समय में लाखों लोगों तक पहुंच सकती है।

इसके बाद दर्शक अपनी पसंद और असहमति खुलकर जाहिर करते हैं।

कई बार आलोचना केवल पहनावे तक सीमित रहती है, जबकि कई मामलों में यह व्यक्तिगत हमलों और ट्रोलिंग में बदल जाती है।

त्योहार और आधुनिक फैशन के बीच टकराव

कृति सेनन के विज्ञापन को लेकर सामने आई बहस का एक महत्वपूर्ण पहलू त्योहार और आधुनिक फैशन के बीच का अंतर भी है।

रक्षाबंधन भारतीय समाज में भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा प्रमुख त्योहार है। इसलिए कुछ लोगों को लगता है कि इससे जुड़े विज्ञापन में पारंपरिक सौंदर्यबोध अधिक उपयुक्त होना चाहिए।

दूसरी ओर, फैशन और विज्ञापन उद्योग लगातार बदल रहा है। ब्रांड अक्सर पारंपरिक अवसरों को आधुनिक फैशन और नए विजुअल स्टाइल के साथ पेश करते हैं।

यही अंतर इस मामले में विवाद का आधार बना।

क्या विज्ञापन में परंपरा और आधुनिकता साथ नहीं आ सकती?

इस विवाद ने एक बड़ा सवाल भी सामने रखा है कि क्या पारंपरिक त्योहारों को आधुनिक फैशन के साथ पेश करना गलत है या यह समय के साथ बदलते सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व का हिस्सा है।

एक पक्ष मानता है कि त्योहार की भावना और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।

दूसरा पक्ष मानता है कि आधुनिक भारतीय महिला की पहचान केवल पारंपरिक पहनावे तक सीमित नहीं है और उसे अपनी पसंद के कपड़े पहनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

इसी टकराव ने कृति के विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया बहस को इतना बड़ा बना दिया।

सोशल मीडिया पर ‘ट्रोलिंग’ बनाम ‘राय’ की सीमा

इस विवाद में एक और मुद्दा सोशल मीडिया ट्रोलिंग का है।

किसी विज्ञापन या कलाकार के पहनावे पर असहमति व्यक्त करना एक बात है, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और लगातार निशाना बनाना दूसरी बात।

अभिनेत्रियों के लिए सोशल मीडिया आज प्रमोशन और दर्शकों से सीधे संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन यही प्लेटफॉर्म कई बार आलोचना और ट्रोलिंग का कारण भी बन जाता है।

मेघना गुलजार की टिप्पणी को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है कि किसी कलाकार के स्क्रीन लुक पर सवाल उठाने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह रचनात्मक निर्णय किस संदर्भ में लिया गया है।

करीना का जवाब न देना भी बना चर्चा का विषय

करीना कपूर ने इस सवाल पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की। उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय मेघना गुलजार को बोलने का संकेत दिया।

यह स्पष्ट नहीं है कि करीना ने जानबूझकर विवाद से दूरी बनाए रखने के लिए ऐसा किया या उन्होंने इस विषय पर निर्देशक की राय को अधिक उपयुक्त माना।

हालांकि, उनका यह छोटा-सा इशारा भी सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का हिस्सा बन गया।

कृति विवाद ने फिर छेड़ी बड़ी बहस

कृति सेनन का विज्ञापन अब भले ही हटाया जा चुका है, लेकिन उससे उठे सवाल अभी भी व्यापक हैं।

महिलाओं के कपड़े, त्योहारों की सांस्कृतिक छवि, विज्ञापन की रचनात्मक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत पसंद और सोशल मीडिया ट्रोलिंग—इन सभी मुद्दों पर अलग-अलग राय सामने आई है।

कंगना रनोट ने जहां विज्ञापन के पहनावे पर सवाल उठाया, वहीं कृति ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संस्कृति को कपड़ों से अलग करके देखने की बात कही।

राहुल गांधी ने कृति के पक्ष में महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का समर्थन किया और अब करीना के सामने इसी व्यापक मुद्दे पर सवाल उठने के बाद मेघना गुलजार ने रचनात्मक प्रक्रिया के संदर्भ में जवाब दिया।

बॉलीवुड में बहस अभी खत्म नहीं हुई

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि मामला केवल एक ज्वेलरी विज्ञापन का नहीं रह गया है।

यह बहस इस सवाल तक पहुंच गई है कि सार्वजनिक मंच पर महिलाओं के पहनावे को लेकर समाज की अपेक्षाएं क्या होनी चाहिए और कलाकारों की व्यक्तिगत एवं रचनात्मक स्वतंत्रता की सीमा कहां तक है।

एक तरफ त्योहारों की पारंपरिक छवि और दर्शकों की भावनाएं हैं, दूसरी ओर बदलती फैशन संस्कृति और व्यक्तिगत पसंद।

इसी वजह से Kriti Sanon Ad Controversy लगातार चर्चा में बनी हुई है।

 

कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब करीना कपूर खान तक पहुंच गया है। फिल्म ‘दायरा’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में जब करीना से अभिनेत्रियों के कपड़ों और सोशल मीडिया ट्रोलिंग को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय माइक निर्देशक मेघना गुलजार की ओर बढ़ा दिया। मेघना ने कहा कि फिल्मों या स्क्रीन पर किसी महिला या पुरुष कलाकार का लुक और पहनावा उसके किरदार तथा निर्देशक की सोच के अनुसार तय होता है और ऐसे मामलों में केवल किसी एक कलाकार को सवालों के घेरे में रखना उचित नहीं है। विवाद की शुरुआत GIVA ज्वेलरी के रक्षाबंधन विज्ञापन से हुई थी, जिसमें कृति सेनन ऑफ-व्हाइट ब्रालेट स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट में नजर आई थीं। सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने इसकी आलोचना की, जिसके बाद कंगना रनोट ने भी विज्ञापन के पहनावे पर सवाल उठाया। कृति ने जवाब देते हुए कहा कि संस्कृति और परंपरा को केवल कपड़ों से नहीं मापा जाना चाहिए। राहुल गांधी ने भी उनकी व्यक्तिगत पसंद का समर्थन किया था। विवाद बढ़ने के बाद GIVA ने माफी मांगते हुए विज्ञापन अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया।

 

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