Muzaffarnagar में किसानों का अनोखा धरना! ट्रैक्टर पर चारपाई-मच्छरदानी लेकर चकबंदी कार्यालय पहुंचे भाकियू टिकैत के किसान, बोले- मांगें पूरी होने तक यहीं डेरा
News-Desk
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किसानों का कहना है कि चकबंदी विभाग से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग लंबे समय से की जा रही है। कई बार अधिकारियों के समक्ष समस्याएं रखे जाने के बावजूद जब अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों को धरना शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
धरने का नेतृत्व भाकियू नेता एवं जिला पंचायत सदस्य पति विकास शर्मा, निवासी रोनी हरजीपुर ने किया। किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
चारपाई और मच्छरदानी लेकर पहुंचे किसान, धरने ने खींचा ध्यान
चकबंदी कार्यालय पर शुरू हुआ यह धरना उस समय चर्चा में आ गया जब किसान अपने ट्रैक्टरों पर चारपाई और मच्छरदानी लेकर पहुंचे।
आमतौर पर धरना-प्रदर्शन में किसान कुछ घंटों के लिए बैठते हैं और मांगों का ज्ञापन देकर वापस लौट जाते हैं। लेकिन इस बार किसानों ने जिस तरह अपने साथ रात में रुकने की तैयारी का सामान पहुंचाया, उससे आंदोलन के लंबे चलने के संकेत साफ दिखाई दिए।
चारपाई और मच्छरदानी साथ लेकर पहुंचना किसानों के इस रुख को दर्शाता है कि वे केवल प्रतीकात्मक प्रदर्शन नहीं करना चाहते। उनका कहना है कि यदि समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो वे कार्यालय परिसर में ही डटे रहेंगे।
ट्रैक्टरों पर लदा सामान बना चर्चा का विषय
किसानों के ट्रैक्टर जब चारपाई, मच्छरदानी और अन्य जरूरी सामान लेकर चकबंदी कार्यालय पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों का ध्यान भी उनकी ओर गया।
किसानों के लिए ट्रैक्टर केवल खेती का साधन नहीं बल्कि आंदोलनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस बार ट्रैक्टरों पर आंदोलन के लिए जरूरी सामान लादकर पहुंचने का अंदाज किसानों की रणनीति का हिस्सा दिखाई दिया।
किसानों ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वे कार्यालय परिसर में रात भी गुजारेंगे और अपनी मांगों के समाधान तक आंदोलन को जारी रखेंगे।
‘इस बार खाली हाथ वापस नहीं लौटेंगे’
धरने पर बैठे किसानों का रुख पहले के मुकाबले अधिक दृढ़ नजर आया।
किसानों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर लंबे समय से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। उनका आरोप है कि अपेक्षित समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे धरना समाप्त करने के लिए तैयार नहीं हैं।
उनका कहना है कि केवल आश्वासन से अब बात नहीं बनेगी। उन्हें जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई चाहिए।
चकबंदी विभाग से जुड़ी समस्याओं को लेकर नाराजगी
धरने का मुख्य मुद्दा चकबंदी विभाग से संबंधित विभिन्न समस्याओं का समाधान बताया गया है।
चकबंदी प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनों के रिकॉर्ड, खेतों के पुनर्गठन और संबंधित अभिलेखों से जुड़े मामलों के कारण किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
जमीन से संबंधित किसी मामले में रिकॉर्ड, सीमांकन, रास्ते, हिस्सेदारी या अन्य प्रक्रिया में विवाद अथवा देरी होने पर उसका सीधा असर किसान की खेती और संपत्ति संबंधी मामलों पर पड़ सकता है।
इसी वजह से किसानों का कहना है कि चकबंदी से संबंधित समस्याओं का समय पर समाधान होना जरूरी है।
किसानों का आरोप- लंबे समय से नहीं हुआ अपेक्षित समाधान
किसानों का कहना है कि उनकी समस्याएं नई नहीं हैं। लंबे समय से इन मामलों के समाधान की मांग उठाई जा रही है।
किसानों के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के बावजूद जब मामलों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई तो आंदोलन करना पड़ा।
हालांकि, किन-किन विशिष्ट प्रकरणों का समाधान लंबित है, इसकी विस्तृत सूची इस सूचना में सामने नहीं आई है। संबंधित मामलों का वास्तविक स्वरूप प्रशासनिक रिकॉर्ड और किसानों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
धरने का नेतृत्व कर रहे हैं विकास शर्मा
इस प्रदर्शन का नेतृत्व विकास शर्मा निवासी रोनी हरजीपुर कर रहे हैं, जो भाकियू नेता होने के साथ जिला पंचायत सदस्य के पति भी बताए गए हैं।
उनके नेतृत्व में किसानों ने चकबंदी कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगें उठाईं और कार्यालय परिसर में धरना शुरू किया।
किसान नेताओं की कोशिश है कि संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत कर लंबित मामलों का समाधान कराया जाए।
किसानों ने प्रशासन के सामने रखी अपनी मांगें
धरने पर किसानों की मुख्य मांग चकबंदी विभाग से संबंधित समस्याओं के शीघ्र समाधान की है।
किसानों का कहना है कि उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनके मामलों का नियमानुसार निस्तारण किया जाए।
किसानों ने प्रशासन से आग्रह किया कि संबंधित अधिकारियों को मौके पर बुलाकर मामलों की समीक्षा की जाए और जिन मामलों में कार्रवाई संभव है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।
कार्यालय परिसर में ही डेरा डालने की तैयारी
चारपाई और मच्छरदानी लेकर पहुंचे किसानों ने अपने आंदोलन की दिशा स्पष्ट कर दी है।
उनका कहना है कि इस बार मांगों के समाधान तक वे कार्यालय परिसर में ही डटे रहने के लिए तैयार हैं।
यदि धरना लंबा चलता है तो प्रशासन के सामने किसानों के साथ बातचीत कर गतिरोध समाप्त करने की चुनौती बढ़ सकती है।
वहीं किसानों का कहना है कि उन्हें अपने खेत और परिवार छोड़कर आंदोलन करने का शौक नहीं है। वे तभी धरने पर बैठे हैं जब उन्हें अपनी समस्याओं का समाधान अन्य तरीकों से नहीं मिल पाया।
मच्छरदानी क्यों लेकर आए किसान?
मच्छरदानी लेकर आने का सीधा कारण रात में कार्यालय परिसर में रुकने की तैयारी से जुड़ा है।
ग्रामीण और किसान लंबे धरने के दौरान खुले स्थानों पर रात बिताते हैं। ऐसे में मच्छरों और मौसम से बचाव के लिए किसान अपने साथ जरूरी सामान लेकर पहुंचे हैं।
चारपाई भी इसी तैयारी का हिस्सा है।
यह दृश्य इसलिए खास रहा क्योंकि इससे आंदोलन के लंबे चलने की किसानों की तैयारी सार्वजनिक रूप से सामने आ गई।
चकबंदी कार्यालय में कामकाज पर असर की संभावना
किसानों के कार्यालय परिसर में धरना शुरू करने के बाद चकबंदी कार्यालय की सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने की स्थिति बन गई है।
यदि धरना लंबा चलता है तो अधिकारियों और कर्मचारियों को किसानों की मौजूदगी के बीच कार्यालय का कामकाज संचालित करना होगा।
वहीं प्रशासन की प्राथमिकता यह हो सकती है कि किसानों की समस्याओं को सुनकर वार्ता के माध्यम से समाधान की दिशा निकाली जाए और कार्यालय का नियमित काम भी प्रभावित न हो।
प्रशासन और किसान नेताओं के बीच वार्ता की उम्मीद
किसानों के रुख को देखते हुए प्रशासन और भाकियू पदाधिकारियों के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है।
ऐसे आंदोलनों में बातचीत के माध्यम से लंबित प्रकरणों की सूची तैयार कर उनकी स्थिति की समीक्षा करना समाधान की दिशा में पहला कदम हो सकता है।
यदि किसानों को ठोस कार्रवाई का भरोसा मिलता है और संबंधित मामलों में प्रक्रिया शुरू होती है तो आंदोलन समाप्त करने को लेकर भी रास्ता निकल सकता है।
फिलहाल किसानों ने मांगों के समाधान तक धरना जारी रखने की बात कही है।
किसानों का संदेश साफ- सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा
धरने पर किसानों का सबसे स्पष्ट संदेश यही है कि वे अब केवल मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे।
उनका कहना है कि यदि संबंधित मामलों में कार्रवाई शुरू होती है और समाधान की स्पष्ट समयसीमा मिलती है तो स्थिति पर विचार किया जा सकता है।
लेकिन जब तक उन्हें ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रखने की तैयारी है।
चारपाई और मच्छरदानी इसी दृढ़ रुख का प्रतीक बनकर सामने आए हैं।
मुजफ्फरनगर में पहले भी किसान आंदोलनों का रहा है असर
मुजफ्फरनगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र है और यहां किसानों से जुड़े मुद्दे अक्सर स्थानीय राजनीति तथा प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र में रहते हैं।
किसानों के लिए भूमि, बिजली, सिंचाई, गन्ना, भुगतान और राजस्व से संबंधित विषय महत्वपूर्ण रहे हैं। चकबंदी भी ग्रामीण भूमि व्यवस्था से सीधे जुड़ा विषय है।
इसी वजह से चकबंदी से जुड़े मामलों पर किसानों की संवेदनशीलता स्वाभाविक है।
जमीन से जुड़े विवादों में चकबंदी की भूमिका महत्वपूर्ण
चकबंदी का उद्देश्य कृषि भूमि के बिखरे हुए टुकड़ों को व्यवस्थित करने और ग्रामीण भूमि व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाने से जुड़ा है।
लेकिन प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड, कब्जे, रास्ते, हिस्सेदारी या सीमांकन को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।
किसानों के लिए ऐसे मामलों का समय पर और नियमानुसार समाधान बेहद महत्वपूर्ण होता है।
यदि किसी किसान का मामला लंबे समय तक लंबित रहता है तो खेती, भूमि उपयोग और अन्य संपत्ति संबंधी कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
किसानों की रणनीति पर सबकी नजर
इस बार किसानों की रणनीति पहले से अलग दिखाई दे रही है। वे अपने साथ रात में रुकने का पूरा इंतजाम लेकर पहुंचे हैं।
इससे संकेत मिलता है कि आंदोलन को लंबा खींचने की तैयारी की गई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन किसानों की मांगों पर किस स्तर पर कार्रवाई करता है और क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है।
धरने में आगे बढ़ सकती है किसानों की संख्या
यदि शुरुआती दौर में मांगों पर कार्रवाई नहीं होती तो किसान संगठनों के आंदोलनों में अक्सर अन्य किसान भी जुड़ सकते हैं।
हालांकि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि धरने का विस्तार किस स्तर तक होगा।
इसका स्वरूप प्रशासन और किसान नेताओं के बीच होने वाली बातचीत तथा संबंधित मामलों में उठाए जाने वाले कदमों पर निर्भर करेगा।
किसानों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा समय पर समाधान
किसानों की नाराजगी का मूल कारण समस्याओं के समाधान में देरी बताया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन से जुड़े मामले कई बार परिवार और खेती दोनों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए किसान चाहते हैं कि ऐसे मामलों को लंबित रखने के बजाय दस्तावेजों और नियमों के आधार पर जल्द निर्णय लिया जाए।
यदि संबंधित विभाग मामलों की समीक्षा कर समाधान की प्रक्रिया तेज करता है तो आंदोलन को समाप्त कराने में मदद मिल सकती है।
अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी निगाहें
चकबंदी कार्यालय में किसानों का धरना शुरू होने के बाद अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है।
एक तरफ किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका नियमानुसार समाधान करना है, वहीं दूसरी ओर कार्यालय के सामान्य कामकाज को भी सुचारु बनाए रखना है।
किसानों ने अपने रुख से स्पष्ट कर दिया है कि वे इस बार जल्द वापस जाने के मूड में नहीं हैं।
चारपाई और मच्छरदानी लेकर पहुंचना महज एक दृश्य नहीं बल्कि आंदोलन की गंभीरता का संकेत भी माना जा रहा है।
मुजफ्फरनगर में किसान आंदोलन ने पकड़ा अलग रंग
मुजफ्फरनगर के चकबंदी कार्यालय पर भाकियू टिकैत का यह धरना फिलहाल क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ट्रैक्टरों पर चारपाई, मच्छरदानी और जरूरी सामान लेकर पहुंचे किसानों ने बता दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो वे रात-दिन कार्यालय परिसर में डटे रहेंगे।
किसानों की मांग चकबंदी विभाग से संबंधित समस्याओं के समाधान की है। उनका कहना है कि लंबे समय से समस्याएं उठाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद धरना शुरू करना पड़ा।
अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन किसानों के साथ कब और किस स्तर पर वार्ता करता है तथा लंबित मामलों के समाधान को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

