Ram Mandir चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच तेज, पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह से 20 मिनट पूछताछ; दानराशि, नोटों की गिनती और नियुक्तियों पर उठे सवाल
अयोध्या स्थित Ram Mandir के चढ़ावे में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले की जांच अब एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित नई विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने मामले से जुड़े अहम गवाह माने जा रहे ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह से पूछताछ की है।
शुक्रवार को अयोध्या के सीओ आशुतोष तिवारी ने वीडियो कॉल के माध्यम से महिपाल सिंह से करीब 20 मिनट तक बातचीत की और उनका बयान दर्ज किया। पूछताछ के दौरान वर्ष 2021 से अब तक की वित्तीय गतिविधियों, मंदिर में आने वाली दानराशि, नकदी की गिनती तथा कथित अनियमितताओं से जुड़े कई पहलुओं पर जानकारी ली गई।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि महिपाल सिंह इससे पहले भी तत्कालीन एसआईटी के सामने अपना बयान दर्ज करा चुके हैं। अब नई एसआईटी उनके पुराने बयानों के साथ-साथ ताजा पूछताछ में सामने आए तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान कर सकती है।
राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े मामले में नई एसआईटी की एंट्री
राम मंदिर के चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जांच का सिलसिला पहले भी चल चुका है। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तत्कालीन एसआईटी का गठन किया गया था।
महिपाल सिंह 27 जुलाई को इसी तत्कालीन एसआईटी के समक्ष अपना बयान दर्ज करा चुके थे। जांच के बाद तत्कालीन एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दी थी। हालांकि, यह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लखनऊ आईजी जोन के नेतृत्व में नई एसआईटी का गठन किया गया। अब नई टीम ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए उन लोगों से जानकारी जुटानी शुरू की है, जो मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और चढ़ावे से जुड़े कामकाज के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी रखते हैं।
महिपाल सिंह से वीडियो कॉल पर हुई करीब 20 मिनट पूछताछ
शुक्रवार को हुई पूछताछ में अयोध्या के सीओ आशुतोष तिवारी ने वीडियो कॉल के जरिए महिपाल सिंह का बयान दर्ज किया।
करीब 20 मिनट चली इस पूछताछ में वर्ष 2021 से लेकर अब तक की वित्तीय गतिविधियों और चढ़ावे की गिनती से संबंधित बिंदुओं पर जानकारी ली गई।
पुलिस के अनुसार वीडियो कॉल के माध्यम से दर्ज किए गए बयान की रिकॉर्डिंग और उसमें सामने आए तथ्यों को विवेचना का हिस्सा बनाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर जांच के दौरान इन तथ्यों को न्यायालय के समक्ष भी प्रस्तुत किया जा सकता है।
हालांकि, किसी व्यक्ति की ओर से लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करते। आरोपों की पुष्टि दस्तावेजों, रिकॉर्ड, संबंधित व्यक्तियों के बयान और जांच के अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
दानराशि की गिनती को लेकर महिपाल सिंह ने लगाए गंभीर आरोप
पूछताछ के दौरान महिपाल सिंह ने दानराशि की गणना की प्रक्रिया को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए।
उनके अनुसार नकदी की गिनती के समय रजिस्टर में दर्ज नोटों के बंडलों और वास्तविक रूप से कंटेनर में रखे जाने वाले नोटों की संख्या में अंतर किया जाता था।
यह आरोप जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि मंदिर में आने वाली नकदी की गिनती, रिकॉर्डिंग, पैकिंग, बैंक तक पहुंचाने और जमा कराने की प्रक्रिया में कई स्तर शामिल होते हैं।
ऐसे में एसआईटी के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि रिकॉर्ड में दर्ज रकम और वास्तविक नकदी के बीच कोई अंतर था या नहीं और यदि अंतर था तो उसकी वजह क्या थी।
बैंक कर्मचारियों और रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका पर भी आरोप
महिपाल सिंह ने अपने बयान में बैंक कर्मचारियों और रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए हैं।
उनकी ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। जांच एजेंसी इन दावों को संबंधित रिकॉर्ड और अन्य व्यक्तियों के बयानों के साथ मिलाकर देख सकती है।
यदि किसी वित्तीय लेनदेन या नकदी जमा प्रक्रिया में अनियमितता का कोई दस्तावेजी प्रमाण मिलता है तो जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है।
फिलहाल एसआईटी के सामने सबसे अहम चुनौती आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के बीच संबंध स्थापित करने की होगी।
नोटों के बंडल और रजिस्टर में दर्ज संख्या का विवाद क्या है?
महिपाल सिंह द्वारा उठाया गया सबसे अहम मुद्दा नकदी की गिनती और उसके रिकॉर्ड से जुड़ा बताया जा रहा है।
उनके आरोप के मुताबिक रजिस्टर में नोटों के बंडलों की संख्या कुछ और दर्ज होती थी, जबकि कंटेनर में रखे जाने वाले नोटों की संख्या में कथित तौर पर अंतर किया जाता था।
यदि जांच में ऐसा कोई अंतर सामने आता है तो यह जानना जरूरी होगा कि वह अंतर किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में हुआ।
क्या यह रिकॉर्डिंग की गलती थी, गिनती में मानवीय त्रुटि थी या जानबूझकर कोई अंतर किया गया था—इन सभी संभावनाओं की जांच एसआईटी के दायरे में आ सकती है।
2021 से अब तक की वित्तीय गतिविधियां जांच के केंद्र में
नई एसआईटी की पूछताछ में वर्ष 2021 से अब तक की वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित जानकारी लिए जाने की बात सामने आई है।
इस अवधि के दौरान दानराशि की प्राप्ति, नकदी की गिनती, उसके रिकॉर्ड, बैंक में जमा होने की प्रक्रिया और मंदिर निर्माण से जुड़े खर्च जैसे मुद्दे जांच के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं।
वित्तीय मामलों की जांच में केवल मौखिक बयान पर्याप्त नहीं होते। आम तौर पर रिकॉर्ड, रसीदें, बैंक लेनदेन, लेखा पुस्तिकाएं, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जैसे पहलुओं का मिलान किया जाता है।
ऐसे में महिपाल सिंह के बयान के बाद जांच टीम उपलब्ध दस्तावेजों की भी पड़ताल कर सकती है।
मंदिर निर्माण के खर्च को लेकर भी महिपाल सिंह ने उठाए सवाल
महिपाल सिंह ने केवल चढ़ावे की गिनती तक अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि मंदिर निर्माण से जुड़े खर्च को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
मंदिर निर्माण जैसी बड़ी परियोजना में बड़ी मात्रा में वित्तीय लेनदेन और विभिन्न मदों में खर्च होता है। ऐसे में किसी भी कथित अनियमितता की जांच के लिए भुगतान से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित स्वीकृतियों का परीक्षण महत्वपूर्ण हो जाता है।
एसआईटी उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी को अन्य दस्तावेजों के साथ मिलाकर देख सकती है।
यह स्पष्ट होना बाकी है कि जांच में उनके आरोपों के समर्थन में किस तरह के दस्तावेज या अन्य साक्ष्य सामने आते हैं।
ट्रस्ट में नियुक्तियों को लेकर भी महिपाल सिंह के सवाल
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। महिपाल सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट में पदाधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
उन्होंने पूर्व कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि को महासचिव बनाए जाने पर आपत्ति जताई है।
महिपाल सिंह का कहना है कि जिस अवधि में स्वामी गोविंददेव गिरि कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उसी दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले सामने आए थे।
यह आरोप भी जांच का विषय है और केवल आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। एसआईटी संबंधित कार्यकाल के रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया का परीक्षण कर सकती है।
पुरानी एसआईटी की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं
इस मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि पहले लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित एसआईटी अपनी रिपोर्ट राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप चुकी है, लेकिन रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
ऐसे में नई एसआईटी की जांच को लेकर लोगों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि पिछली जांच में क्या तथ्य सामने आए थे और नई जांच उन तथ्यों को किस तरह आगे बढ़ाती है।
नई टीम के सामने पहले से मौजूद रिपोर्ट, पुराने बयान और नए साक्ष्यों के बीच तालमेल स्थापित करना भी महत्वपूर्ण होगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी जांच की गंभीरता
नई एसआईटी का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ है। इसलिए जांच की प्रक्रिया को लेकर स्वाभाविक रूप से गंभीरता बढ़ गई है।
नई टीम के सामने अब मामले से जुड़े आरोपों की तथ्यात्मक जांच करने की जिम्मेदारी है। इसमें उन सभी व्यक्तियों से पूछताछ, दस्तावेजों का परीक्षण और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान शामिल हो सकता है, जिनकी भूमिका जांच के दौरान सामने आती है।
जांच के अंतिम परिणाम के बारे में अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
महिपाल सिंह पहले भी दे चुके हैं बयान
महिपाल सिंह इस मामले में पहली बार सामने नहीं आए हैं। वह 27 जुलाई को तत्कालीन एसआईटी के समक्ष भी अपना बयान दर्ज करा चुके हैं।
अब नई एसआईटी द्वारा दोबारा उनके बयान लिए जाने से यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी उनके पास मौजूद जानकारी को विस्तार से समझना चाहती है।
पुराने और नए बयानों में समानता या अंतर भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
यदि उनके पास किसी कथित अनियमितता से संबंधित दस्तावेज या अन्य ठोस जानकारी है तो वह जांच के दौरान महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
बयान की रिकॉर्डिंग भी जांच का हिस्सा बनेगी
पुलिस के अनुसार वीडियो कॉल के माध्यम से दर्ज किए गए महिपाल सिंह के बयान की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है।
जांच के दौरान बयान में बताए गए तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। किसी भी आरोप को आगे बढ़ाने से पहले उसके समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी होगा।
यदि आवश्यकता महसूस हुई तो जांच एजेंसी संबंधित व्यक्तियों से दोबारा पूछताछ भी कर सकती है।
अब जांच किन सवालों के जवाब तलाश सकती है?
राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े इस मामले में जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सवालों पर ध्यान दिया जा सकता है।
सबसे पहला सवाल यह होगा कि मंदिर में आने वाली नकदी की गिनती किस प्रक्रिया के तहत की जाती थी और उसका रिकॉर्ड कैसे तैयार होता था।
दूसरा सवाल यह कि रजिस्टर में दर्ज रकम और बैंक में जमा रकम के बीच कोई अंतर था या नहीं।
तीसरा सवाल यह कि नकदी की पैकिंग, कंटेनर में रखने और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की जिम्मेदारी थी।
चौथा सवाल यह कि महिपाल सिंह द्वारा लगाए गए बैंक कर्मचारियों और रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव से जुड़े आरोपों के समर्थन में क्या कोई दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं।
इसके अलावा मंदिर निर्माण से जुड़े खर्चों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों की भी जांच किए जाने की संभावना है।
आरोप और जांच के नतीजे में फर्क समझना जरूरी
मामला संवेदनशील है और इससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ बड़ी वित्तीय व्यवस्था भी जुड़ी हुई है। इसलिए जांच से जुड़े आरोपों को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।
महिपाल सिंह ने जो बातें जांच टीम के सामने रखी हैं, वे फिलहाल उनके आरोप और दावे हैं। इनकी पुष्टि जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी है।
किसी भी व्यक्ति की भूमिका या जिम्मेदारी तभी तय मानी जाएगी जब जांच में उसके खिलाफ पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य सामने आएं तथा संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी हो।
राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था पर भी रहेगी नजर
जांच आगे बढ़ने के साथ राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था से जुड़े रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
दानराशि की गणना से लेकर बैंक में जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण यह समझने में मदद कर सकता है कि कथित अनियमितता वास्तव में हुई थी या आरोप किसी प्रक्रिया संबंधी भ्रम या रिकॉर्ड की विसंगति पर आधारित हैं।
इसी तरह मंदिर निर्माण के खर्चों की जांच में स्वीकृत बजट, भुगतान और संबंधित दस्तावेजों का मिलान महत्वपूर्ण हो सकता है।
जांच आगे बढ़ने पर और लोगों से हो सकती है पूछताछ
महिपाल सिंह के बयान के बाद जांच का दायरा केवल उन्हीं तक सीमित रहेगा, ऐसा जरूरी नहीं है।
यदि पूछताछ के दौरान किसी अन्य व्यक्ति का नाम सामने आता है या कोई दस्तावेज किसी नई भूमिका की ओर संकेत करता है तो एसआईटी संबंधित लोगों से भी जानकारी ले सकती है।
बैंक कर्मचारियों, ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों, नकदी गिनने की प्रक्रिया में शामिल लोगों और वित्तीय रिकॉर्ड संभालने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है, यदि साक्ष्य इसकी आवश्यकता दिखाते हैं।
अयोध्या में अब जांच के अगले कदम पर नजर
महिपाल सिंह से हुई करीब 20 मिनट की पूछताछ के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एसआईटी आगे किन दस्तावेजों और व्यक्तियों पर ध्यान केंद्रित करती है।
नई एसआईटी के सामने एक ओर पुराने जांच रिकॉर्ड और पूर्व एसआईटी की रिपोर्ट है, वहीं दूसरी ओर महिपाल सिंह के नए बयान और उनके द्वारा लगाए गए आरोप हैं।
इन सभी तथ्यों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण करने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल जांच जारी है और कथित चढ़ावा चोरी, दानराशि की गिनती, वित्तीय रिकॉर्ड, मंदिर निर्माण के खर्च तथा ट्रस्ट में नियुक्तियों से जुड़े सवालों पर एसआईटी की पड़ताल को आगे की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।

