भारत जूनियर विमेंस एशिया कप के फाइनल में: Supriya की हैट्रिक से साउथ कोरिया को 5-1 से हराया, चीन-जापान विजेता से होगा मुकाबला
News-Desk
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Hockey Asia Cup, hockey news, India Hockey, India Junior Women’s Hockey, india vs south korea, Indian women hockey, Junior Women’s Asia Cup, South Korea Hockey, sports news, Supriyaचीन में खेले जा रहे जूनियर विमेंस एशिया कप में भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए साउथ कोरिया को 5-1 से करारी शिकस्त दी। सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा और लगातार आक्रमण करते हुए कोरियाई टीम को वापसी का मौका नहीं दिया।
इस शानदार जीत के साथ भारत ने टूर्नामेंट के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। मुकाबले की सबसे बड़ी स्टार ड्रैग फ्लिकर Supriya रहीं, जिन्होंने पेनल्टी कॉर्नर के जरिए तीन गोल दागकर शानदार हैट्रिक पूरी की। उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
भारत अब खिताबी मुकाबले में चीन और जापान के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से भिड़ेगा। यानी अब भारतीय टीम के सामने एशिया कप का खिताब जीतने की आखिरी चुनौती होगी।
पहले क्वार्टर में भारत ने बनाई बढ़त
सेमीफाइनल मुकाबले में भारत और साउथ कोरिया दोनों ने शुरुआत में काफी सतर्कता के साथ खेल दिखाया। दोनों टीमों ने शुरुआती मिनटों में एक-दूसरे की रणनीति को समझने की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे भारतीय टीम ने मैच पर अपना नियंत्रण मजबूत करना शुरू कर दिया।
भारत को पहली बड़ी सफलता 13वें मिनट में मिली। मधु सिदर ने शानदार फील्ड गोल करते हुए गेंद को कोरियाई गोल पोस्ट में पहुंचाया। इस गोल के साथ भारत ने 1-0 की बढ़त हासिल कर ली।
पहला गोल मिलने के बाद भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और बढ़ गया। टीम ने गेंद पर कब्जा बनाए रखते हुए साउथ कोरिया के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाना शुरू कर दिया।
सुप्रिया ने पेनल्टी कॉर्नर को बनाया हथियार
दूसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने कोरियाई गोल पर हमले तेज कर दिए। लगातार दबाव का फायदा भारत को 17वें मिनट में मिला, जब टीम को पेनल्टी कॉर्नर हासिल हुआ।
ड्रैग फ्लिकर सुप्रिया ने इस मौके को बिल्कुल भी गंवाया नहीं। उन्होंने शानदार ड्रैग फ्लिक के जरिए गेंद को गोल में पहुंचा दिया और भारत की बढ़त 2-0 हो गई।
सुप्रिया का यह पहला गोल था, लेकिन मुकाबले में उनका प्रभाव यहीं खत्म नहीं होने वाला था। आगे चलकर उन्होंने दो और गोल करते हुए अपनी टीम को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
सुखवीर के गोल से भारत 3-0 आगे
भारत ने इसके बाद भी आक्रामक खेल जारी रखा। 21वें मिनट में भारतीय टीम ने एक और बेहतरीन मूव बनाया। भारतीय विंगर ने कोरियाई गोल के 23 मीटर के क्षेत्र के भीतर हवा में आई गेंद को शानदार तरीके से नियंत्रित किया और इसके बाद सर्कल के अंदर बेहतरीन क्रॉस दिया।
इस क्रॉस पर सुखवीर ने शानदार फिनिश किया और गेंद को गोल में पहुंचा दिया। भारत ने इस गोल के साथ अपनी बढ़त को 3-0 कर लिया।
लगातार तीन गोल खाने के बाद साउथ कोरिया दबाव में नजर आया। दूसरी ओर भारतीय टीम के पास आत्मविश्वास की कमी नहीं थी और खिलाड़ी लगातार आक्रामक हॉकी खेलते रहे।
33वें मिनट में सुप्रिया का दूसरा गोल
मैच के तीसरे क्वार्टर में भी भारत ने अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी। 33वें मिनट में भारतीय टीम को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला।
एक बार फिर जिम्मेदारी सुप्रिया के कंधों पर थी। ड्रैग फ्लिकर ने बेहतरीन अंदाज में गेंद को गोल में पहुंचाकर भारत की बढ़त को 4-0 कर दिया।
सुप्रिया का यह मैच का दूसरा गोल था। उनके लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर गोल ने भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया था।
साउथ कोरिया को मिली एकमात्र सफलता
चार गोल से पिछड़ने के बाद साउथ कोरिया ने जवाबी हमला करने की कोशिश की। 41वें मिनट में कोरियाई टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिला और यूरी जियोंग ने इस मौके को गोल में बदल दिया।
इस गोल के साथ स्कोर 4-1 हो गया और कुछ समय के लिए साउथ कोरिया को उम्मीद जगी कि वह मुकाबले में वापसी कर सकता है। लेकिन भारतीय डिफेंस ने इसके बाद कोरियाई टीम को कोई और मौका नहीं दिया।
आखिरी क्वार्टर में भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रमण के साथ-साथ डिफेंस पर भी पूरा ध्यान रखा। कोरियाई खिलाड़ियों ने कई बार भारतीय सर्कल में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उनके प्रयासों को नाकाम कर दिया।
56वें मिनट में सुप्रिया ने पूरी की हैट्रिक
मुकाबले के आखिरी चरण में भारत ने फिर से गोल का रास्ता खोज लिया। 56वें मिनट में भारतीय टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिला और एक बार फिर गेंद सुप्रिया के पास थी।
सुप्रिया ने शानदार ड्रैग फ्लिक लगाई और गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के साथ भारत ने 5-1 की बढ़त हासिल कर ली और सुप्रिया ने अपनी हैट्रिक पूरी कर ली।
सुप्रिया के तीनों गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए आए। उनका यह प्रदर्शन सेमीफाइनल में भारत की जीत का सबसे बड़ा आकर्षण रहा। पूरे मुकाबले में उनकी ड्रैग फ्लिक ने कोरियाई डिफेंस को लगातार परेशान किया।
प्लेयर ऑफ द मैच बनीं सुप्रिया
तीन गोल करने वाली सुप्रिया को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। सेमीफाइनल जैसे महत्वपूर्ण मुकाबले में हैट्रिक लगाना उनके लिए भी एक यादगार उपलब्धि रही।
भारतीय टीम के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फाइनल में पहुंचने के लिए टीम ने एक ऐसी कोरियाई चुनौती को पार किया, जिसे टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में भी भारतीय टीम पहले हरा चुकी थी।
टूर्नामेंट में पहले भी कोरिया को हराया था
दिलचस्प बात यह है कि भारत ने टूर्नामेंट के पहले ही मुकाबले में साउथ कोरिया को 4-1 से हराया था। यानी सेमीफाइनल में 5-1 की जीत के साथ भारतीय टीम ने कोरियाई टीम पर लगातार दूसरी बड़ी जीत दर्ज की।
इससे साफ है कि भारतीय जूनियर टीम ने टूर्नामेंट के दौरान अपनी लय लगातार बनाए रखी है और जैसे-जैसे प्रतियोगिता आगे बढ़ी, टीम का प्रदर्शन और मजबूत होता गया।
पाकिस्तान के खिलाफ 19-0 की तूफानी जीत
सेमीफाइनल से पहले भारतीय टीम ने क्वार्टर फाइनल चरण में पाकिस्तान को 19-0 से हराकर शानदार अंदाज में अंतिम चार में प्रवेश किया था।
19 गोल की यह जीत भारतीय टीम के आक्रामक खेल का बड़ा उदाहरण रही। टीम ने पूरे मुकाबले में लगातार गोल किए और पाकिस्तान को एक भी गोल करने का अवसर नहीं दिया।
इसके बाद सेमीफाइनल में भी भारत ने अपने आक्रमण की धार बरकरार रखी और साउथ कोरिया के खिलाफ पांच गोल दागे।
चीन के खिलाफ गोलरहित मुकाबला भी रहा
हालांकि टूर्नामेंट में भारतीय टीम को एक मुकाबले में गोल करने में सफलता नहीं मिली थी। मेजबान चीन के खिलाफ भारत का मैच 0-0 से ड्रॉ रहा था।
इस मुकाबले में दोनों टीमों ने डिफेंस में अच्छा प्रदर्शन किया और किसी भी टीम को गोल करने का मौका नहीं मिला। लेकिन उस ड्रॉ के बाद भारतीय टीम ने अपने अगले मुकाबलों में आक्रामक अंदाज में वापसी की।
जापान और मलेशिया के खिलाफ भी बड़ी जीत
भारत ने टूर्नामेंट में जापान को 7-0 से हराया था। इस मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा और जापानी डिफेंस को लगातार दबाव में रखा।
इसके बाद मलेशिया के खिलाफ भारत ने 11-1 से शानदार जीत दर्ज की। इन बड़े अंतर से मिली जीतों ने भारतीय टीम के मजबूत आक्रमण की तस्वीर साफ कर दी।
अब तक टूर्नामेंट में भारत के प्रदर्शन को देखा जाए तो टीम ने बड़ी जीतों के साथ-साथ कठिन मुकाबलों में धैर्य भी दिखाया है। यही कारण है कि भारतीय जूनियर महिला टीम अब खिताब से सिर्फ एक कदम दूर है।
अब फाइनल में किससे होगा मुकाबला?
सेमीफाइनल में साउथ कोरिया को 5-1 से हराने के बाद भारत की नजर अब फाइनल पर है। खिताबी मुकाबले में भारतीय टीम का सामना चीन और जापान के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा।
अगर चीन फाइनल में पहुंचता है तो भारतीय टीम के सामने मेजबान टीम की चुनौती होगी। वहीं जापान के फाइनल में पहुंचने पर भारत को एक ऐसी टीम के खिलाफ खेलना होगा जिसे वह टूर्नामेंट में पहले ही 7-0 से हरा चुका है।
फाइनल में जो भी टीम सामने हो, भारतीय खिलाड़ियों के लिए सेमीफाइनल जैसी लय बनाए रखना सबसे अहम होगा। खासकर पेनल्टी कॉर्नर के मौकों को गोल में बदलने की क्षमता भारत के लिए खिताबी मुकाबले में भी बड़ा हथियार साबित हो सकती है।
भारत के लिए खिताब जीतने का बड़ा मौका
भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने इस टूर्नामेंट में अब तक आक्रामक हॉकी का शानदार उदाहरण पेश किया है। 19-0, 11-1 और 7-0 जैसी बड़ी जीतें बताती हैं कि टीम के पास गोल करने की क्षमता भरपूर है। वहीं साउथ कोरिया के खिलाफ सेमीफाइनल में 5-1 की जीत ने यह भी साबित किया कि दबाव वाले मुकाबले में टीम अपनी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू कर सकती है।
सुप्रिया की हैट्रिक ने इस जीत को और खास बना दिया। तीनों गोल पेनल्टी कॉर्नर से आने के कारण भारत के सेट-प्ले की मजबूती भी सामने आई है। फाइनल में अगर भारतीय टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिलते हैं, तो विपक्षी डिफेंस के सामने सुप्रिया की ड्रैग फ्लिक एक बार फिर बड़ी चुनौती बन सकती है।
भारत अब इस शानदार अभियान को एशिया कप की ट्रॉफी के साथ समाप्त करना चाहेगा। सेमीफाइनल में 5-1 की जीत के बाद आत्मविश्वास भारतीय टीम के साथ है और अब पूरा ध्यान खिताबी मुकाबले पर रहेगा।
भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने साउथ कोरिया को 5-1 से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। सुप्रिया की शानदार हैट्रिक इस जीत की सबसे बड़ी कहानी रही। अब भारत की नजर एशिया कप के खिताब पर है और फाइनल में उसका सामना चीन या जापान से होगा।

