Rohana डिस्टिलरी में अचानक मचा आपातकाल जैसा माहौल, मॉक ड्रिल में परखी गई बचाव की तैयारी; अधिकारियों ने सिखाए आग और हादसों से निपटने के तरीके
News-Desk
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मॉक ड्रिल के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आबकारी विभाग, स्वास्थ्य विभाग और फायर ब्रिगेड की टीमें मौजूद रहीं। इन टीमों ने प्लांट में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को आपात परिस्थितियों में तत्काल प्रतिक्रिया देने, प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने और आग जैसी घटनाओं में बचाव कार्य संचालित करने के तरीकों की जानकारी दी।
अभ्यास के दौरान प्लांट परिसर में ऐसी परिस्थितियों का प्रदर्शन किया गया, जिनसे किसी वास्तविक आपदा की स्थिति में सामना हो सकता है। संबंधित टीमों ने कर्मचारियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक तरीके से आपातकालीन प्रतिक्रिया की प्रक्रिया समझाई।
मॉक ड्रिल में परखी गई औद्योगिक परिसर की आपदा तैयारी
औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था का महत्व सामान्य स्थानों की तुलना में और बढ़ जाता है। बड़ी संख्या में कर्मचारी, मशीनरी, ऊर्जा स्रोत और विभिन्न प्रकार की औद्योगिक प्रक्रियाएं एक ही परिसर में संचालित होती हैं। ऐसे में किसी दुर्घटना की स्थिति में तत्काल और समन्वित कार्रवाई जरूरी हो सकती है।
इसी पृष्ठभूमि में Rohana Distillery Mock Drill का आयोजन किया गया। अभ्यास के जरिए यह समझने का प्रयास किया गया कि आपात स्थिति की सूचना मिलने के बाद संबंधित टीमें किस प्रकार सक्रिय होंगी और प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षित रखने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं।
मॉक ड्रिल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि प्लांट में तैनात कर्मचारियों को आपात स्थिति के दौरान अपनी भूमिका समझने का अवसर मिला। वास्तविक घटना के समय घबराहट और भ्रम को कम करने के लिए पहले से अभ्यास होना उपयोगी हो सकता है।
एडीएम फाइनेंस अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने पूर्व तैयारी को बताया अहम
मॉक ड्रिल में पहुंचे एडीएम फाइनेंस अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने प्लांट के अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए पूर्व तैयारी मजबूत होनी चाहिए, ताकि समय रहते जान-माल की रक्षा की जा सके।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आपदा के समय प्रतिक्रिया शुरू करने से पहले की गई तैयारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि कर्मचारियों को पहले से यह पता हो कि आपातकाल में किस दिशा में जाना है, किसे सूचना देनी है और बचाव दल के साथ किस प्रकार सहयोग करना है, तो राहत कार्य को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
औद्योगिक इकाइयों में आपातकालीन तैयारी का उद्देश्य केवल दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि संभावित जोखिमों की पहचान और उनके अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखना भी है।
रसोई गैस में आग लगने की स्थिति में भी बताए बचाव के उपाय
मॉक ड्रिल के दौरान एडीएम फाइनेंस अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने घरेलू दुर्घटनाओं का उदाहरण देते हुए रसोई गैस में आग लगने की स्थिति में महिलाओं और परिवार के अन्य सदस्यों के सुरक्षित बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।
घरेलू स्तर पर गैस सिलेंडर या गैस उपकरण से जुड़ी किसी घटना के दौरान घबराहट स्थिति को और गंभीर बना सकती है। ऐसे मामलों में सुरक्षा को प्राथमिकता देना, आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल आपातकालीन सहायता लेना महत्वपूर्ण होता है।
अधिकारियों ने इस तरह की घटनाओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। मॉक ड्रिल को केवल औद्योगिक सुरक्षा तक सीमित न रखते हुए आम जीवन में सामने आने वाली संभावित दुर्घटनाओं से भी जोड़ा गया।
राष्ट्रीय आपदा अधिनियम 2005 के नियमों की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय आपदा अधिनियम 2005 के तहत निर्धारित नियमों और बचाव संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने आपदा प्रबंधन से जुड़े प्रावधानों और आपात स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को लेकर कर्मचारियों को जागरूक किया।
आपदा प्रबंधन की व्यवस्था में प्रशासनिक संस्थाओं, स्थानीय अधिकारियों, राहत दलों और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी बड़े हादसे की स्थिति में केवल एक टीम के प्रयास से राहत कार्य पूरा करना कठिन हो सकता है।
इसी वजह से नियमित अभ्यास के माध्यम से अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियों और उनके बीच समन्वय को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाता है।
फायर ब्रिगेड ने कराया त्वरित प्रतिक्रिया का व्यावहारिक अभ्यास
मॉक ड्रिल में फायर ब्रिगेड की टीम ने आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। आगजनी जैसी घटना में घटनास्थल तक जल्दी पहुंचना, स्थिति का आकलन करना और सुरक्षित तरीके से बचाव कार्य शुरू करना महत्वपूर्ण होता है।
फायर ब्रिगेड की टीम ने कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। अभ्यास का उद्देश्य कर्मचारियों को यह समझाना रहा कि आग या अन्य आपात स्थिति के समय प्रशिक्षित टीमों के साथ किस प्रकार सहयोग करना चाहिए।
औद्योगिक परिसर में आग की स्थिति में केवल आग बुझाना ही चुनौती नहीं होती। वहां मौजूद कर्मचारियों को सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाना, प्रभावित हिस्से को अलग रखना और जरूरत के अनुसार चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने समझाई प्राथमिक चिकित्सा की भूमिका
आपदा या औद्योगिक दुर्घटना के दौरान कुछ लोग घायल हो सकते हैं। ऐसे समय में अस्पताल तक पहुंचाने से पहले प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण हो सकता है। मॉक ड्रिल में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इसी पहलू पर व्यावहारिक अभ्यास कराया।
स्वास्थ्य टीम की मौजूदगी ने अभ्यास में चिकित्सा प्रतिक्रिया को भी शामिल किया। प्रभावित व्यक्ति की स्थिति का प्रारंभिक आकलन, तत्काल सहायता और आवश्यकता के अनुसार आगे चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने की प्रक्रिया आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
इस तरह की कवायद से कर्मचारियों और अधिकारियों को यह समझने का अवसर मिलता है कि किसी घटना के बाद केवल सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि चिकित्सा सहायता की व्यवस्था भी समान रूप से जरूरी होती है।
प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य और आबकारी विभाग का समन्वय
मॉक ड्रिल में विभिन्न विभागों की भागीदारी ने इसे बहु-विभागीय अभ्यास का स्वरूप दिया। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आबकारी विभाग, स्वास्थ्य विभाग और फायर ब्रिगेड की टीमें शामिल हुईं।
किसी औद्योगिक दुर्घटना के दौरान कई विभागों को एक साथ काम करना पड़ सकता है। प्रशासन को समग्र व्यवस्था और समन्वय देखना पड़ सकता है, पुलिस को सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारी निभानी पड़ सकती है, स्वास्थ्य विभाग को चिकित्सा सहायता उपलब्ध करानी पड़ सकती है और फायर ब्रिगेड को आग एवं बचाव संबंधी कार्रवाई करनी पड़ सकती है।
आबकारी विभाग की मौजूदगी भी डिस्टिलरी प्लांट से संबंधित प्रशासनिक और नियामकीय व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण रही।
एसडीएम सदर शुभम श्रीवास्तव समेत अधिकारी रहे मौजूद
मॉक ड्रिल में एडीएम फाइनेंस अनिरुद्ध प्रताप सिंह के साथ एसडीएम सदर शुभम श्रीवास्तव, तहसीलदार सदर राधेश्याम गौड़, नायब तहसीलदार अमित कुमार, सीओ अनुराग सिंह और दमकल अधिकारी आर.के. यादव मौजूद रहे।
इसके अलावा जिला आबकारी अधिकारी, प्लांट यूनिट हेड लोकेश कुमार बालियान, एचआर हेड आर.के. तिवारी तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी अभ्यास में सहभागिता की।
अधिकारियों और प्लांट प्रबंधन की संयुक्त मौजूदगी में आपातकालीन तैयारियों और बचाव व्यवस्था का अभ्यास किया गया। इससे प्रशासनिक स्तर और प्लांट प्रबंधन के बीच समन्वय की स्थिति को भी देखने का अवसर मिला।
डिस्टिलरी प्लांट में सुरक्षा व्यवस्था का महत्व
डिस्टिलरी जैसी औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां औद्योगिक प्रक्रियाओं के दौरान विभिन्न प्रकार के जोखिम मौजूद हो सकते हैं। ऐसी इकाइयों में किसी भी आपात स्थिति के लिए कर्मचारियों को निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं की जानकारी होना आवश्यक होता है।
सुरक्षा केवल मशीनों या उपकरणों तक सीमित नहीं रहती। इसमें कर्मचारियों का प्रशिक्षण, आपातकालीन निकासी व्यवस्था, आग से सुरक्षा, प्राथमिक चिकित्सा, संचार प्रणाली और संबंधित विभागों से तत्काल संपर्क जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल होती हैं।
नियमित मॉक ड्रिल इन व्यवस्थाओं की वास्तविक परिस्थितियों में जांच करने का अवसर देती है। अभ्यास के दौरान यदि किसी स्तर पर कमी सामने आती है तो उसे वास्तविक घटना से पहले सुधारने की संभावना रहती है।
आपदा के समय शुरुआती कुछ मिनट हो सकते हैं महत्वपूर्ण
किसी भी दुर्घटना के दौरान शुरुआती प्रतिक्रिया का महत्व काफी अधिक हो सकता है। सूचना मिलने के बाद राहत दल कितनी जल्दी मौके पर पहुंचते हैं और प्रभावित लोगों को कितनी तेजी से सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंचाया जाता है, यह नुकसान को सीमित करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसीलिए मॉक ड्रिल में त्वरित रिस्पॉन्स पर विशेष ध्यान दिया गया। फायर ब्रिगेड और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित किया।
ऐसे अभ्यास कर्मचारियों को यह समझने में मदद करते हैं कि आपदा के समय अनावश्यक भीड़ या अफरा-तफरी पैदा करने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना क्यों जरूरी है।
कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और अभ्यास का महत्व
किसी औद्योगिक परिसर में सुरक्षा व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है जब वहां काम करने वाले कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों के बारे में नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाए।
कर्मचारियों को यह जानकारी होनी चाहिए कि आपदा की सूचना मिलने पर किसे संपर्क करना है, किस मार्ग से सुरक्षित स्थान पर पहुंचना है और बचाव दल के पहुंचने तक किस तरह सावधानी बरतनी है।
मॉक ड्रिल इस प्रशिक्षण को वास्तविक परिस्थिति के करीब ले आती है। केवल निर्देश पढ़ना और वास्तव में उसी परिस्थिति का अभ्यास करना दोनों अलग-अलग अनुभव होते हैं। अभ्यास से कर्मचारियों को आपातकालीन प्रक्रिया को समझने और अपनी भूमिका पहचानने का अवसर मिलता है।
घरेलू सुरक्षा से औद्योगिक सुरक्षा तक जागरूकता का संदेश
इस आयोजन की खास बात यह रही कि अधिकारियों ने औद्योगिक आपदा के साथ घरेलू दुर्घटनाओं को भी चर्चा का हिस्सा बनाया। रसोई गैस में आग जैसी घटनाएं किसी भी परिवार के सामने अचानक आ सकती हैं।
ऐसी घटनाओं में सबसे महत्वपूर्ण बात घबराने के बजाय सुरक्षित तरीके से प्रतिक्रिया देना है। परिवार के सदस्यों को पहले से सामान्य सुरक्षा उपायों की जानकारी हो तो जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
मॉक ड्रिल के दौरान दिए गए इस संदेश ने कार्यक्रम को केवल प्लांट तक सीमित नहीं रखा, बल्कि दैनिक जीवन की सुरक्षा से भी जोड़ दिया।
आपदा प्रबंधन केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं
आपदा की स्थिति में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन नागरिकों, कर्मचारियों और संस्थानों की तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। किसी भी घटना के दौरान प्रभावित व्यक्ति यदि सुरक्षा निर्देशों को समझता है और बचाव दल के साथ सहयोग करता है, तो राहत कार्य अधिक व्यवस्थित हो सकता है।
औद्योगिक इकाइयों में यह जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि एक ही परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद हो सकते हैं। इसलिए सुरक्षा प्रशिक्षण और नियमित अभ्यास को संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा बनाए रखना जरूरी है।
रोहाना के डिस्टिलरी प्लांट में आयोजित अभ्यास ने इसी आवश्यकता को सामने रखा।
मॉक ड्रिल से वास्तविक आपदा के लिए तैयारी मजबूत करने का प्रयास
मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी दुर्घटना की भविष्यवाणी करना नहीं होता। इसका मकसद संभावित परिस्थितियों के लिए पहले से तैयारी करना और उपलब्ध व्यवस्था की व्यावहारिक जांच करना होता है।
शुक्रवार को आयोजित अभ्यास में प्रशासन, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित टीमों की मौजूदगी में विभिन्न आपात स्थितियों के दौरान प्रतिक्रिया का अभ्यास किया गया। कर्मचारियों को बचाव, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई।
इस दौरान अधिकारियों ने यह संदेश भी दिया कि आपदा से निपटने की क्षमता केवल संसाधनों से नहीं बनती, बल्कि नियमित प्रशिक्षण, स्पष्ट जिम्मेदारी और आपसी समन्वय से मजबूत होती है।
रोहाना में सुरक्षा को लेकर सामने आया जागरूकता का संदेश
मुजफ्फरनगर-सहारनपुर स्टेट हाईवे-59 स्थित रोहाना के आईपीएल डिस्टिलरी प्लांट में आयोजित मॉक ड्रिल ने औद्योगिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को एक साथ सामने रखा। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर फायर ब्रिगेड और स्वास्थ्य विभाग तक की टीमों ने अभ्यास में भाग लिया।
एडीएम फाइनेंस अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने पूर्व तैयारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कर्मचारियों को आपात स्थिति में जान-माल की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने का संदेश दिया। उन्होंने घरेलू गैस दुर्घटनाओं के दौरान बचाव के व्यावहारिक उपायों की भी जानकारी दी।
एसडीएम सदर शुभम श्रीवास्तव, तहसीलदार सदर राधेश्याम गौड़, नायब तहसीलदार अमित कुमार, सीओ अनुराग सिंह, दमकल अधिकारी आर.के. यादव, जिला आबकारी अधिकारी, प्लांट यूनिट हेड लोकेश कुमार बालियान, एचआर हेड आर.के. तिवारी और स्वास्थ्य विभाग की टीम की मौजूदगी में अभ्यास को आगे बढ़ाया गया।
नियमित अभ्यास से आपातकालीन व्यवस्था को मिलती है मजबूती
आपदा प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वास्तविक घटना के समय व्यवस्था को बिना तैयारी के सक्रिय न करना पड़े। पहले से अभ्यास होने पर संबंधित विभागों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों की बेहतर समझ हो सकती है।
औद्योगिक क्षेत्रों में इस प्रकार की मॉक ड्रिल सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने का एक माध्यम बन सकती है। इसमें केवल अधिकारियों की भूमिका नहीं होती, बल्कि प्लांट प्रबंधन और प्रत्येक कर्मचारी की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होती है।
रोहाना डिस्टिलरी में आयोजित यह अभ्यास इसी व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण का हिस्सा रहा, जिसमें संभावित आपात परिस्थितियों के बीच त्वरित प्रतिक्रिया, बचाव, प्राथमिक चिकित्सा और विभागीय समन्वय को व्यावहारिक रूप से परखा गया।

