Pakistan ने अफगानिस्तान में 10 ठिकानों पर किया एयरस्ट्राइक का दावा, 8 ड्रोन गिराने के एक दिन बाद पलटवार; TTP को लेकर बढ़ा तनाव
News-Desk
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पाकिस्तान का कहना है कि जिन 10 स्थानों को निशाना बनाया गया, उनका इस्तेमाल कथित तौर पर ड्रोन लॉन्च करने और उन्हें रखने के लिए किया जा रहा था। इस्लामाबाद के मुताबिक, इन ठिकानों की पहचान पहले की गई और उसके बाद कथित तौर पर सटीक हवाई कार्रवाई की गई।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा पार आतंकवाद, TTP की गतिविधियों और अफगान धरती के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। हाल के दिनों में दोनों तरफ से सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं और अब ड्रोन हमलों तथा जवाबी एयरस्ट्राइक ने तनाव को और बढ़ा दिया है।
10 ठिकानों पर हमले का पाकिस्तान ने किया दावा
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तराड़ ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 10 स्थानों को निशाना बनाया। उनके अनुसार इन स्थानों का इस्तेमाल ड्रोन लॉन्च करने और ड्रोन को स्टोर करने के लिए किया जा रहा था।
तराड़ ने कार्रवाई को पाकिस्तान की ओर से आत्मरक्षा के अधिकार के तहत उठाया गया कदम बताया। उनके मुताबिक, हमले कथित तौर पर पहचाने गए सैन्य ठिकानों और ड्रोन से संबंधित बुनियादी ढांचे तक सीमित रखे गए।
पाकिस्तान का दावा है कि ये ठिकाने 23 सितंबर को पाकिस्तान में हुए कथित ड्रोन घुसपैठ से जुड़े थे। पाकिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया है।
हालांकि, इस रिपोर्ट के समय अफगान तालिबान की ओर से इन ताजा हमलों पर तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। इससे पहले अफगान पक्ष पाकिस्तान के सीमा पार हमलों और आतंकवाद से जुड़े आरोपों को खारिज करता रहा है।
8 ड्रोन गिराने के बाद हुई कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत बुधवार को हुई, जब पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी सुरक्षा और वायु रक्षा प्रणालियों ने अफगानिस्तान की दिशा से आए 8 ड्रोन मार गिराए।
पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार कुछ ड्रोन तोर्खम सीमा के आसपास और कुछ कोहाट के निकट पहाड़ी इलाकों में गिराए गए। पाकिस्तान का दावा था कि ड्रोन अपने संभावित लक्ष्यों तक पहुंचने से पहले ही रोक दिए गए।
पाकिस्तान ने कहा कि इन ड्रोन के कारण उसके क्षेत्र में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इसके बाद गुरुवार को अफगानिस्तान के भीतर 10 स्थानों पर कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया।
इस तरह घटनाक्रम कुछ ही घंटों में सीमा पार ड्रोन गतिविधि से जवाबी हवाई हमलों तक पहुंच गया।
अफगान तालिबान ने ड्रोन हमलों से किया था इनकार
पाकिस्तान की ओर से 8 ड्रोन गिराने के दावे के बाद अफगान तालिबान ने कथित ड्रोन हमलों में अपनी भूमिका से इनकार किया था।
अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पहले कहा था कि अफगान सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के खिलाफ ऐसा कोई हमला नहीं किया। यही बिंदु दोनों देशों के बीच विवाद को और जटिल बनाता है।
एक तरफ पाकिस्तान इन ड्रोन को अफगान क्षेत्र से आया हुआ और अपनी सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि अफगान पक्ष ने ऐसे हमलों में अपनी भूमिका से इनकार किया है।
इसलिए 8 ड्रोन की उत्पत्ति और उन्हें किस संगठन ने भेजा था, इस बारे में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
पाकिस्तान का TTP पर बड़ा आरोप
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मौजूदा तनाव की जड़ केवल ड्रोन हमलों तक सीमित नहीं है। इस विवाद का बड़ा हिस्सा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP की गतिविधियों को लेकर है।
पाकिस्तानी अधिकारियों का आरोप है कि TTP से जुड़े आतंकवादी अफगानिस्तान के पक्तिया और नंगरहार इलाकों से पाकिस्तान में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं।
पाकिस्तान का कहना है कि उसकी सुरक्षा बलों ने ऐसी कोशिशों को नाकाम किया। इसके बाद अफगान तालिबान बलों द्वारा पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर मोर्टार और भारी हथियारों से गोलीबारी किए जाने का भी पाकिस्तान की ओर से आरोप लगाया गया।
पाकिस्तान का दावा है कि इसके जवाब में उसने तालिबान की चौकियों और मोर्टार ठिकानों को निशाना बनाया।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में उपलब्ध नहीं है और अफगान पक्ष कई पाकिस्तानी आरोपों को खारिज करता रहा है।
TTP और अफगान तालिबान एक ही संगठन नहीं
पाकिस्तान में TTP को लेकर अक्सर ‘तालिबान’ शब्द के साथ चर्चा होती है, लेकिन दोनों संगठनों को एक ही संगठन मानना सही नहीं है।
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP पाकिस्तान में सक्रिय एक अलग आतंकवादी संगठन है। दूसरी ओर, अफगान तालिबान अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज राजनीतिक-सैन्य शक्ति है।
हालांकि दोनों के बीच वैचारिक, ऐतिहासिक और संगठनात्मक स्तर पर संबंधों की चर्चा होती रही है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल TTP और उससे जुड़े नेटवर्क पाकिस्तान के खिलाफ हमलों के लिए करते हैं।
अफगान तालिबान इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग मामलों में अपने रुख सामने रखता रहा है।
यही मतभेद दोनों देशों के बीच संबंधों में लगातार तनाव का बड़ा कारण बने हुए हैं।
पाकिस्तान TTP को ‘फितना-उल-खवारिज’ क्यों कहता है
पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान TTP के लिए अक्सर ‘फितना-उल-खवारिज’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। यह पाकिस्तान की आधिकारिक शब्दावली का हिस्सा है।
इस नाम के जरिए पाकिस्तान TTP को एक आतंकी खतरे के रूप में प्रस्तुत करता है और उसके खिलाफ सैन्य एवं सुरक्षा कार्रवाई को उचित ठहराता है।
TTP लंबे समय से पाकिस्तान के खिलाफ सशस्त्र अभियान चला रहा है और देश के सुरक्षा बलों तथा अन्य लक्ष्यों पर हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है।
अफगानिस्तान में अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद पाकिस्तान की चिंता और बढ़ी, क्योंकि इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP के कई सदस्य अफगान क्षेत्र में मौजूद हैं।
2001 के बाद कैसे बदले पाकिस्तान और TTP के रिश्ते
पाकिस्तान और TTP के बीच संघर्ष को समझने के लिए 2001 के बाद की घटनाओं को देखना जरूरी है।
अमेरिका द्वारा 2001 में अफगानिस्तान में सैन्य अभियान शुरू किए जाने के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ सहयोग किया। इस नीति का पाकिस्तान में मौजूद कुछ कट्टरपंथी समूहों ने विरोध किया।
इसी व्यापक माहौल में बाद में TTP का गठन हुआ और उसने पाकिस्तान सरकार तथा सुरक्षा बलों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष शुरू किया।
TTP का आरोप रहा है कि पाकिस्तान सरकार ने अमेरिकी नेतृत्व वाले अभियान का समर्थन करके इस्लामी हितों के खिलाफ काम किया। पाकिस्तान दूसरी ओर TTP को देश की सुरक्षा के लिए गंभीर आतंकी खतरा मानता है।
इसके बाद दोनों के बीच संघर्ष लगातार चलता रहा।
अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद बढ़ी चिंता
2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में वापस आने के बाद पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अफगान क्षेत्र से उसके खिलाफ सक्रिय समूहों पर नियंत्रण स्थापित होगा। लेकिन इस्लामाबाद का कहना है कि इसके विपरीत TTP की गतिविधियों में कमी नहीं आई।
पाकिस्तान लगातार अफगान तालिबान से मांग करता रहा है कि वह अफगान क्षेत्र को पाकिस्तान के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने से रोके।
काबुल की ओर से कई बार कहा गया है कि पाकिस्तान की सुरक्षा समस्या को अफगानिस्तान पर थोपना उचित नहीं है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत और मध्यस्थता के प्रयास भी होते रहे हैं, लेकिन सीमा पार हमलों के आरोपों ने संबंधों को बार-बार तनावपूर्ण बनाया है।
तीन दिन पहले भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर की थी एयरस्ट्राइक
ताजा कार्रवाई से पहले भी पाकिस्तान ने 21 सितंबर को अफगानिस्तान में हवाई हमले किए थे। उस समय पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसकी कार्रवाई में 28 आतंकवादी मारे गए।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन हमलों को आतंकी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई बताया था। पाकिस्तान के अनुसार तीन लक्ष्यों को निशाना बनाया गया था, जिनमें एक आत्मघाती हमलावरों का प्रशिक्षण केंद्र भी शामिल था।
लेकिन अफगान पक्ष ने इस कार्रवाई पर अलग तस्वीर पेश की। अफगान अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े स्रोतों के अनुसार इन हमलों में कम से कम तीन नागरिकों की मौत और चार लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
यानी दोनों देशों की ओर से एक ही सैन्य कार्रवाई के प्रभाव को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए।
28 आतंकियों के दावे और नागरिक मौतों पर अलग-अलग आंकड़े
21 सितंबर की एयरस्ट्राइक इस पूरे घटनाक्रम में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने हताहतों को लेकर अलग-अलग दावे किए।
पाकिस्तान ने 28 आतंकियों के मारे जाने की बात कही, जबकि अफगान पक्ष ने नागरिकों के मारे जाने और घायल होने की जानकारी दी। संयुक्त राष्ट्र ने भी उस घटना में तीन नागरिकों की मौत की पुष्टि की थी।
इस तरह सीमा पार सैन्य कार्रवाई में न केवल आतंकवाद और सुरक्षा का सवाल सामने आता है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाती है।
कोहाट हमले के बाद और बढ़ा तनाव
पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव के बीच पाकिस्तान के कोहाट क्षेत्र में भी एक बड़ा हमला हुआ था। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक पुलिस परिसर और मस्जिद के आसपास हुए हमले में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और घायल हुए।
पाकिस्तान ने इस हमले के पीछे अफगानिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क की भूमिका का आरोप लगाया। इसके बाद इस्लामाबाद ने अफगान तालिबान से आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस और सत्यापित कार्रवाई की मांग दोहराई।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच इसी तरह के आरोप-प्रत्यारोप ने दोनों देशों के सुरक्षा संबंधों को और तनावपूर्ण बनाया है।
ड्रोन अब सीमा संघर्ष का नया मोर्चा
ताजा घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू ड्रोन का है। पाकिस्तान का दावा है कि अफगान क्षेत्र से भेजे गए 8 ड्रोन उसके हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए और सुरक्षा बलों ने उन्हें मार गिराया।
इसके जवाब में पाकिस्तान ने उन स्थानों पर कार्रवाई करने का दावा किया जहां से ड्रोन लॉन्च और स्टोर किए जाने की बात कही गई थी।
ड्रोन अपेक्षाकृत कम लागत में निगरानी और हमले दोनों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसी वजह से सीमा क्षेत्रों में उनकी मौजूदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
पाकिस्तान का कहना है कि उसने ड्रोन को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया। इसके बाद अफगानिस्तान के भीतर कथित लॉन्च और स्टोरेज साइटों को निशाना बनाने का दावा किया गया।
अफगानिस्तान में 10 ठिकानों पर कार्रवाई से बढ़ी चिंता
एक ही दिन में 10 स्थानों पर एयर और ड्रोन स्ट्राइक का पाकिस्तानी दावा दोनों देशों के बीच तनाव की गंभीरता को दिखाता है। इससे पहले तक सीमा पार गोलीबारी, आतंकी हमलों और सीमित हवाई कार्रवाई की खबरें सामने आती रही थीं।
अब ड्रोन हमलों और उनके जवाब में अफगान क्षेत्र के भीतर हमलों का सिलसिला एक नए चरण का संकेत दे सकता है।
हालांकि, इस कार्रवाई के वास्तविक प्रभाव, क्षति और हताहतों को लेकर स्वतंत्र रूप से पूरी तस्वीर उपलब्ध होना अभी बाकी है। पाकिस्तान ने अपने लक्ष्यों को सैन्य और ड्रोन से संबंधित ठिकाने बताया है, जबकि अफगान पक्ष की ओर से आगे आने वाली जानकारी इस तस्वीर को और स्पष्ट कर सकती है।
पाकिस्तान का कहना—हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन जवाब देंगे
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तराड़ ने कहा है कि पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति और संवाद के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे पाकिस्तान की कमजोरी या असीमित सहनशीलता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इस्लामाबाद का संदेश है कि अफगान क्षेत्र से उसके खिलाफ होने वाली किसी भी कार्रवाई को वह अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानेगा और जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
तराड़ ने अफगान तालिबान से आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस, सत्यापन योग्य और निरंतर कार्रवाई करने की मांग भी दोहराई।
अफगानिस्तान के लिए भी स्थिति आसान नहीं
अफगानिस्तान के लिए पाकिस्तान के साथ लगातार बढ़ता तनाव कई स्तरों पर चुनौती पैदा करता है। दोनों देशों के बीच लंबी सीमा है और सीमा के दोनों ओर पश्तून आबादी तथा ऐतिहासिक सामाजिक संबंध मौजूद हैं।
सीमा पर तनाव बढ़ने से व्यापार, आवागमन और स्थानीय आबादी की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर पहले से मानवीय और आर्थिक दबाव झेल रहे अफगानिस्तान पर पड़ सकता है।
इसीलिए क्षेत्रीय शक्तियां दोनों पक्षों के बीच बातचीत और तनाव कम करने की कोशिश करती रही हैं।
UN रिपोर्ट ने भी TTP को लेकर जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़े एक मॉनिटरिंग रिपोर्ट में भी TTP की गतिविधियों और अफगानिस्तान से उसके संबंधों को लेकर चिंता दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार अफगान तालिबान की ओर से TTP पर नियंत्रण से जुड़ी स्थिति पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि काबुल की ओर से समूह को नियंत्रित करने के लिए कुछ शुरुआती कदम उठाए गए थे। इसलिए स्थिति को केवल एकतरफा आरोप के रूप में देखना पूरी तस्वीर प्रस्तुत नहीं करता।
चीन और क्षेत्रीय देशों के सामने भी बढ़ी चुनौती
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। सीमा संघर्ष बढ़ने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
चीन पहले भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संवाद को बढ़ावा देने में रुचि दिखाता रहा है। इसके पीछे सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक परियोजनाओं की सुरक्षा जैसे कारण हैं।
यदि सीमा पार हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है तो क्षेत्रीय कूटनीति के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
अब आगे क्या होगा?
ताजा घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव किस दिशा में जाएगा। पाकिस्तान ने 10 ठिकानों पर कार्रवाई का दावा किया है और साथ ही स्पष्ट किया है कि अफगान क्षेत्र से होने वाली किसी भी नई कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा।
दूसरी ओर, अफगान तालिबान के सामने अपनी सीमा और क्षेत्र से जुड़े आरोपों का जवाब देने तथा पाकिस्तान के साथ तनाव को नियंत्रित रखने की चुनौती है।
यदि सीमा पार ड्रोन हमले, गोलीबारी और एयरस्ट्राइक जारी रहते हैं तो दोनों देशों के बीच पहले से कमजोर संवाद और अधिक कठिन हो सकता है।
फिलहाल ताजा हमलों के बाद दोनों पक्षों के अगले कदम पर नजर बनी हुई है।

