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Pakistan में ड्रोन बनाएगी ट्रंप परिवार से जुड़ी Powerus? मुनीर से मुलाकात के बाद सामने आया बड़ा प्लान, भारत के लिए क्या मायने

अमेरिका, Pakistan और ड्रोन टेक्नोलॉजी के बीच एक नई कड़ी सामने आई है। अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus ने पाकिस्तान की सेना के साथ एक समझौता किया है और अब दोनों पक्ष पाकिस्तान में ड्रोन टेक्नोलॉजी तथा संभावित स्थानीय उत्पादन को लेकर सहयोग तलाश रहे हैं। मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि Powerus जिस कंपनी के साथ विलय करने जा रही है, उसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप निवेशक हैं।

16 सितंबर 2026 को Powerus के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर्स में मुलाकात की थी। पाकिस्तान की सेना के मुताबिक बातचीत में रक्षा खरीद, उत्पादन और दीर्घकालिक क्षमता निर्माण पर चर्चा हुई। इसके बाद Powerus ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से मानवरहित हवाई प्रणालियों यानी UAS के लिए एक सीमित प्रारंभिक ऑर्डर मिलने और एक रणनीतिक MoU पर हस्ताक्षर होने की पुष्टि की।

हालांकि, इस पूरे मामले में कुछ दावों को लेकर सावधानी जरूरी है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में हरिपुर, रावलपिंडी और तक्षशिला में तीन सैन्य साइटों का अंतिम चयन या आत्मघाती ड्रोन के उत्पादन का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। Powerus ने खुद कहा है कि MoU अंतिम खरीद समझौता नहीं है, इससे खरीद की बाध्यता नहीं बनती और आगे की किसी भी परियोजना को अलग समझौतों तथा अमेरिकी कानूनों और सरकारी मंजूरियों के अधीन रहना होगा।

16 सितंबर को आसिम मुनीर से हुई थी Powerus की मुलाकात

Powerus और पाकिस्तान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग की शुरुआत 16 सितंबर की बैठक से हुई। कंपनी के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने रावलपिंडी के GHQ में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की।

पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस यानी ISPR के मुताबिक बैठक में रक्षा तकनीक में बदलते रुझानों, रक्षा खरीद, उत्पादन और दीर्घकालिक क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने भविष्य में सहयोग बढ़ाने में रुचि जताई।

इसके अगले चरण में Powerus ने बताया कि उसे पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से मानवरहित हवाई प्रणालियों और उनसे जुड़े सपोर्ट के लिए एक सीमित प्रारंभिक ऑर्डर मिला है। ऑर्डर की कीमत और उसमें शामिल सिस्टम की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

Powerus ने क्या समझौता किया है?

Powerus के मुताबिक पाकिस्तान के साथ हुआ MoU व्यापक सहयोग का एक ढांचा तैयार करता है। इसमें मानवरहित और स्वायत्त रक्षा तकनीकों के क्षेत्र में आगे सहयोग की संभावनाएं तलाशने की बात है।

कंपनी के आधिकारिक बयान में साफ कहा गया है कि यह अंतिम समझौता नहीं है। इससे किसी पक्ष पर खरीद या आगे बढ़ने की बाध्यता नहीं बनती। किसी भी भविष्य के कार्यक्रम के लिए अलग से निश्चित समझौते करने होंगे और अमेरिकी कानूनों तथा सरकारी मंजूरियों का पालन करना होगा।

Powerus के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच ने यह भी कहा है कि कंपनी अमेरिका और पाकिस्तान की तकनीकी क्षमताओं को जोड़कर संयुक्त टेक्नोलॉजी संबंध विकसित करने के रास्ते तलाश रही है और पाकिस्तान में तकनीक विकसित या निर्मित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

यानी फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर ड्रोन फैक्ट्री शुरू हो चुकी है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। स्थानीय उत्पादन की संभावना जरूर चर्चा में है।

ट्रंप के बेटों का Powerus से क्या कनेक्शन है?

इस डील का सबसे चर्चित पहलू Powerus का ट्रंप परिवार से कारोबारी संबंध है।

Powerus का एक सार्वजनिक कंपनी Aureus Greenway Holdings के साथ विलय प्रस्तावित है। इस विलय के बाद बनने वाली कंपनी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप, निवेश फंड American Ventures के जरिए हिस्सेदारी रखते हैं।

अमेरिकी नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, विलय के बाद American Ventures की संयुक्त कंपनी में लगभग 9.9 प्रतिशत beneficial ownership हिस्सेदारी होने की उम्मीद है।

हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है। ट्रंप परिवार से जुड़ा निवेश होना और पाकिस्तान के साथ Powerus का रक्षा अनुबंध हासिल करना—दोनों बातें अलग हैं। ट्रंप जूनियर के प्रवक्ता ने कहा है कि वह passive investor हैं और कंपनी के संचालन या कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े फैसलों में उनकी भूमिका नहीं है। Powerus ने भी कहा है कि उसके कारोबारी कामकाज और अनुबंधों पर ट्रंप परिवार का प्रभाव नहीं है।

क्या पाकिस्तान में बनेंगे आत्मघाती ड्रोन?

यही वह हिस्सा है जहां उपलब्ध जानकारी और रिपोर्टों में अंतर करना जरूरी है। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान में संभावित स्थानीय ड्रोन उत्पादन और हरिपुर, रावलपिंडी तथा तक्षशिला जैसी जगहों को संभावित साइट के तौर पर बताए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, Powerus या पाकिस्तान की सेना की ओर से इन तीनों स्थानों को अंतिम उत्पादन साइट घोषित किए जाने की आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

इसी तरह, इन प्रस्तावित सुविधाओं में विशेष रूप से आत्मघाती ड्रोन ही बनाए जाएंगे, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी फिलहाल व्यापक रूप से unmanned aerial systems और autonomous defence technologies की बात करती है।

इसलिए अभी इसे पाकिस्तान में ड्रोन निर्माण की संभावित दिशा के रूप में देखना ज्यादा सटीक है, न कि पूरी तरह स्थापित उत्पादन योजना के रूप में।

पाकिस्तान के लिए स्थानीय ड्रोन उत्पादन क्यों महत्वपूर्ण है?

पाकिस्तान लंबे समय से अपनी रक्षा जरूरतों के लिए चीन समेत विदेशी स्रोतों पर निर्भर रहा है। ऐसे में स्थानीय उत्पादन की क्षमता विकसित करना उसके लिए रक्षा आपूर्ति और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

Powerus के साथ संभावित सहयोग का मतलब केवल तैयार ड्रोन खरीदना नहीं है। कंपनी ने पाकिस्तान में तकनीक विकसित या निर्मित करने की संभावना की बात की है। इससे भविष्य में असेंबली, स्थानीय निर्माण, तकनीकी सहयोग और उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसे रास्ते खुल सकते हैं।

Financial Times के अनुसार, प्रस्तावित सहयोग का एक उद्देश्य पाकिस्तान में ड्रोन निर्माण को स्थानीय स्तर पर विकसित करना और उसकी चीनी रक्षा आयात पर निर्भरता को कम करने की दिशा में काम करना है। हालांकि इस सहयोग का वास्तविक दायरा आगे होने वाले निश्चित समझौतों पर निर्भर करेगा।

दिलचस्प बात- Powerus का भारत से भी करार है

Powerus और पाकिस्तान की डील सामने आने के बाद एक और तथ्य खास चर्चा में आया है। इसी अमेरिकी कंपनी की तकनीक से भारत भी जुड़ा हुआ है।

30 जून 2026 को Paras Defence & Space Technologies ने Powerus की सहायक कंपनी Tandem Defense के साथ एक IP लाइसेंसिंग समझौता किया था। इसके तहत Paras Defence को भारत में Guardian-1 Interceptor की तकनीक के निर्माण और व्यावसायीकरण के लिए विशेष लाइसेंस मिला।

Guardian-1 एक हाई-स्पीड, बैटरी संचालित काउंटर-ड्रोन इंटरसेप्टर है, जिसे कम लागत वाले हवाई खतरों को रोकने के लिए विकसित किया गया है।

यहां भी एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—भारत वाला समझौता Powerus की तकनीक के वाणिज्यिक लाइसेंस और स्थानीय निर्माण से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे सीधे भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किसी निश्चित खरीद आदेश के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

एक ही कंपनी की तकनीक भारत और पाकिस्तान से जुड़ी

यही वजह है कि Powerus की पाकिस्तान डील ने खास ध्यान खींचा है। जून में भारत में Guardian-1 तकनीक के निर्माण का लाइसेंस और सितंबर में पाकिस्तान के साथ UAS सहयोग का MoU—दोनों घटनाएं कुछ ही महीनों के अंतर में सामने आई हैं।

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक भारत Powerus का दक्षिण एशिया में पहला सौदा था। इसके बाद पाकिस्तान के साथ समझौता सामने आया।

इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत और पाकिस्तान को एक जैसे ड्रोन या समान सैन्य सिस्टम मिल रहे हैं। भारत के साथ सामने आया समझौता Guardian-1 counter-drone technology के स्थानीय निर्माण से संबंधित है, जबकि पाकिस्तान के साथ प्रारंभिक ऑर्डर को Powerus ने व्यापक unmanned aerial systems श्रेणी में रखा है। पाकिस्तान वाले ऑर्डर के सटीक सिस्टम और मात्रा सार्वजनिक नहीं की गई है।

भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत और पाकिस्तान के बीच ड्रोन का इस्तेमाल अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहा है। सीमा पार हथियार पहुंचाने, निगरानी और सैन्य अभियानों में ड्रोन की भूमिका बढ़ी है।

मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान भी ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ था। ऐसे में पाकिस्तान की स्थानीय ड्रोन उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के लिए निश्चित रूप से निगरानी का विषय होगी।

हालांकि, किसी संभावित पाकिस्तानी उत्पादन सुविधा की वास्तविक क्षमता, ड्रोन की संख्या, रेंज, पेलोड या तकनीकी स्तर के बारे में अभी सार्वजनिक जानकारी सीमित है। इसलिए इसके संभावित सैन्य प्रभाव को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

भारत के पास काउंटर-ड्रोन क्षमताएं भी मौजूद हैं

दूसरी तरफ भारत ने भी ड्रोन खतरों से निपटने के लिए अपनी काउंटर-यूएएस क्षमताओं पर जोर बढ़ाया है। आधुनिक वायु रक्षा ढांचे में रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम, गन सिस्टम और मिसाइल आधारित प्रणालियां अलग-अलग स्तरों पर काम कर सकती हैं।

भारत ने हाल के वर्षों में स्वदेशी और विदेशी तकनीकों के जरिए ड्रोन तथा काउंटर-ड्रोन दोनों क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है।

Powerus का Guardian-1 समझौता भी इसी व्यापक काउंटर-ड्रोन क्षेत्र का हिस्सा है। कंपनी की अमेरिकी नियामकीय फाइलिंग में Guardian प्लेटफॉर्म को कम लागत वाले हवाई खतरों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाला हाई-स्पीड इंटरसेप्टर बताया गया है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन की भूमिका और ज्यादा चर्चा में आई

भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 के सैन्य संघर्ष के दौरान ड्रोन युद्ध की भूमिका प्रमुख रही थी। इस दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ ड्रोन और अन्य हवाई प्रणालियों के इस्तेमाल से जुड़े दावे किए थे।

यही अनुभव भारत के लिए ड्रोन डिफेंस को और महत्वपूर्ण बनाता है। भविष्य में सीमा पार से बड़ी संख्या में छोटे ड्रोन या स्वायत्त प्रणालियों के इस्तेमाल की स्थिति में केवल पारंपरिक मिसाइल डिफेंस पर्याप्त नहीं हो सकता। इसके लिए बहुस्तरीय counter-UAS व्यवस्था की जरूरत होती है।

भारत में इसी दिशा में रडार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, कमांड नेटवर्क, गन और मिसाइल प्रणालियों को एक साथ इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।

पाकिस्तान की चीन पर निर्भरता और अमेरिकी कंपनी का नया कनेक्शन

Powerus के साथ पाकिस्तान का सहयोग ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान की रक्षा खरीद में चीन की बड़ी भूमिका रही है। चीन पाकिस्तान का लंबे समय से प्रमुख रक्षा साझेदार है और CPEC के जरिए दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भी गहरे हैं।

ऐसे में अमेरिकी ड्रोन कंपनी के साथ रक्षा-तकनीकी सहयोग पाकिस्तान की रक्षा आपूर्ति में एक अतिरिक्त स्रोत जोड़ सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान की चीनी रक्षा निर्भरता तुरंत समाप्त हो जाएगी।

Powerus के साथ अभी जो जानकारी सार्वजनिक हुई है, वह एक सीमित प्रारंभिक UAS ऑर्डर और व्यापक सहयोग के MoU तक है। आगे का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश किन तकनीकों, कितनी मात्रा और किस स्तर के स्थानीय उत्पादन पर अंतिम समझौता करते हैं।

क्या यह सिर्फ ड्रोन डील है या अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों में बड़ा बदलाव?

Powerus डील को अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ते रक्षा तथा कारोबारी संपर्क के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा रहा है। सितंबर की बैठक में सिर्फ ड्रोन खरीद की बात नहीं हुई थी, बल्कि defence procurement, production और capacity building पर भी चर्चा हुई थी।

इसके बावजूद अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे अमेरिका-पाकिस्तान रक्षा संबंधों में कितना बड़ा संस्थागत बदलाव आएगा। Powerus का MoU खुद अंतिम समझौता नहीं है और भविष्य की परियोजनाओं के लिए अलग मंजूरियां और अनुबंध जरूरी होंगे।

सबसे बड़ा सवाल- आगे क्या होगा?

अब नजर इस बात पर होगी कि Powerus और पाकिस्तान के बीच शुरुआती UAS ऑर्डर में वास्तव में कौन-सी तकनीक शामिल है और स्थानीय उत्पादन की योजना किस स्तर तक जाती है।

यदि पाकिस्तान में स्थानीय निर्माण के लिए औपचारिक समझौते होते हैं, तो यह केवल ड्रोन खरीदने की डील नहीं रहेगी, बल्कि पाकिस्तान के रक्षा उद्योग में अमेरिकी तकनीक और निवेश की मौजूदगी बढ़ाने वाला कदम बन सकती है।

वहीं भारत के लिए महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि Powerus पहले ही भारतीय कंपनी Paras Defence को Guardian-1 इंटरसेप्टर तकनीक के निर्माण का विशेष लाइसेंस दे चुकी है। इसलिए आने वाले समय में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक भारत-पाकिस्तान की रक्षा तैयारियों में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 

Powerus Pakistan Drone Deal अभी शुरुआती चरण में है। 16 सितंबर को Powerus प्रतिनिधिमंडल की आसिम मुनीर से रावलपिंडी GHQ में मुलाकात हुई, जिसके बाद कंपनी ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से UAS का सीमित प्रारंभिक ऑर्डर और एक व्यापक MoU की पुष्टि की। पाकिस्तान में स्थानीय उत्पादन की संभावना पर चर्चा जरूर है, लेकिन हरिपुर, रावलपिंडी और तक्षशिला में अंतिम फैक्ट्री साइट तथा आत्मघाती ड्रोन के उत्पादन की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। दूसरी तरफ भारत में Powerus की Guardian-1 काउंटर-ड्रोन तकनीक के निर्माण के लिए Paras Defence को जून 2026 में विशेष लाइसेंस मिल चुका है।

 

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