USS Abraham Lincoln पर 8 नौसैनिकों ने की आत्महत्या की कोशिश, एक समुद्र में कूदा तो हेलिकॉप्टर ने बचाया; 300 दिन की तैनाती के बीच मानसिक दबाव पर उठे गंभीर सवाल
News-Desk
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Abraham Lincoln, Hung Cao, iran war, Kirsten Gillibrand, US military, us navy, USS Abraham Lincoln, अमेरिकी नौसेना, अमेरिकी युद्धपोत, ईरान युद्ध, नौसैनिक, मानसिक स्वास्थ्यअमेरिकी नौसेना के सबसे चर्चित युद्धपोतों में शामिल USS Abraham Lincoln की लंबे समय तक चली तैनाती अब एक बेहद गंभीर वजह से चर्चा में है। अमेरिकी नौसेना ने पुष्टि की है कि USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप से जुड़े 8 नौसैनिकों ने तैनाती के दौरान आत्महत्या की कोशिश की। इनमें कम से कम दो मामले ऐसे थे, जिनमें नौसैनिकों ने समुद्र में कूदने की कोशिश की। एक नौसैनिक अगस्त की शुरुआत में समुद्र में कूद गया था, जिसे बाद में रेस्क्यू हेलिकॉप्टर की मदद से बचाया गया, जबकि मार्च में एक अन्य नौसैनिक को उसके साथियों ने पानी में कूदने से पहले रोक लिया था।
यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब USS अब्राहम लिंकन का मिशन सामान्य तैनाती से कहीं ज्यादा लंबा हो चुका था। युद्धपोत और उसके स्ट्राइक ग्रुप ने 300 दिन से ज्यादा समय तक तैनाती झेली और इस दौरान अमेरिकी सैन्य अभियान में ईरान के खिलाफ ऑपरेशनों का हिस्सा रहा। अमेरिकी नौसेना के कार्यवाहक सचिव हंग काओ (Hung Cao) ने सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड (Kirsten Gillibrand) के सवालों के जवाब में भेजे पत्र में 8 आत्महत्या प्रयासों की जानकारी दी।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ये आठ मामले केवल विमानवाहक पोत के मुख्य क्रू तक सीमित नहीं थे। नौसेना के मुताबिक, आंकड़े में USS Lincoln के क्रू के साथ-साथ कैरियर एयर विंग, कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और डिस्ट्रॉयर स्क्वाड्रन स्टाफ, साथ चलने वाले विध्वंसक जहाजों तथा जहाज पर तैनात विमानन स्क्वाड्रनों से जुड़े कर्मी भी शामिल हैं। नौसेना ने यह भी कहा है कि इस तैनाती के दौरान आत्महत्या से किसी की मौत नहीं हुई।
मार्च में साथी नौसैनिकों ने रोक लिया, अगस्त में समुद्र में कूद गया था एक नौसैनिक
हंग काओ के पत्र में सामने आए विवरण के मुताबिक, मार्च 2026 में एक नौसैनिक ने जहाज से समुद्र में जाने की कोशिश की थी। उसके साथ मौजूद दूसरे नौसैनिकों ने समय रहते उसे रोक लिया। उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता दी गई और बाद में उसे होमपोर्ट भेज दिया गया।
इसके कुछ महीनों बाद अगस्त की शुरुआत में एक अन्य नौसैनिक समुद्र में कूद गया। इस घटना में नौसेना के रेस्क्यू हेलिकॉप्टर को सक्रिय करना पड़ा। नौसैनिक को पानी से निकालकर बचाया गया, मेडिकल विभाग ने उसका उपचार किया और बाद में उसे जहाज से हटाकर आगे की देखभाल के लिए भेज दिया गया।
इन घटनाओं के सामने आने के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया कि इतने लंबे समय तक समुद्र में तैनाती का सैनिकों की मानसिक स्थिति पर कितना प्रभाव पड़ा। अगस्त में ही अमेरिकी सैन्य मीडिया में USS लिंकन पर मानसिक स्वास्थ्य, लंबे मिशन और सैनिकों की स्थिति को लेकर रिपोर्टें सामने आई थीं। उस समय कई परिवारों और सांसदों ने भी नौसैनिकों की परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई थी।
करीब 5,000 नौसैनिकों वाला विमानवाहक पोत, महीनों तक समुद्र में रहा
USS Abraham Lincoln अमेरिकी नौसेना का Nimitz-class nuclear-powered aircraft carrier है। इस पर करीब 5,000 कर्मी तैनात रहते हैं। इस बार इसकी तैनाती असाधारण रूप से लंबी रही।
USNI News के मुताबिक, सितंबर में गुआम पहुंचने तक Lincoln और उसके साथ चल रहे जहाज 302 दिनों से तैनात थे। इससे पहले सितंबर की शुरुआत में यह थाईलैंड के पटाया इलाके में रुका था। उससे पहले पोत ने लंबे समय तक कोई घोषित पोर्ट कॉल नहीं किया था।
Reuters के अनुसार, सितंबर की शुरुआत में USS Abraham Lincoln करीब 286 लगातार दिनों तक समुद्र में रहने के बाद थाईलैंड पहुंचा था। इस दौरान लगभग 5,000 कर्मियों वाले क्रू को लंबे समय के बाद कुछ दिनों का आराम मिला।
इतनी लंबी तैनाती इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि USS Lincoln की शुरुआती योजना एक सामान्य मिशन के रूप में शुरू हुई थी। नवंबर 2025 में यह अमेरिका से रवाना हुआ था, लेकिन बाद में ईरान के साथ बढ़ते तनाव और फिर युद्ध की परिस्थितियों के बीच इसका मिशन बदल गया और इसे मध्य पूर्व की ओर भेजा गया।
ईरान के खिलाफ ऑपरेशन ने बढ़ाया मिशन का दबाव
USS Abraham Lincoln की तैनाती उस समय और चुनौतीपूर्ण हो गई जब उसे ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में शामिल किया गया। अमेरिकी नौसेना के मुताबिक, स्ट्राइक ग्रुप ने मध्य पूर्व में लंबे समय तक ऑपरेशनल गतिविधियां जारी रखीं। रिपोर्टों के अनुसार, इस तैनाती के दौरान जहाज ने 200 से ज्यादा दिनों तक मध्य पूर्व में combat operations से जुड़े मिशन किए।
इसका मतलब यह था कि नौसैनिक केवल सामान्य समुद्री तैनाती नहीं कर रहे थे, बल्कि लंबे समय तक युद्ध-संबंधी ऑपरेशनल दबाव के बीच काम कर रहे थे। इसी वजह से मानसिक स्वास्थ्य और सैनिकों के मनोबल को लेकर सवाल धीरे-धीरे बढ़ते गए।
हालांकि, आठ आत्महत्या प्रयासों को सीधे केवल युद्ध या लंबी तैनाती के किसी एक कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा। अमेरिकी नौसेना ने भी अपने जवाब में सैनिकों के लिए मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों की उपलब्धता पर जोर दिया है। लेकिन इतने लंबे मिशन के दौरान सामने आए ये मामले निश्चित रूप से सैनिकों की परिस्थितियों को लेकर चिंता का एक महत्वपूर्ण आंकड़ा हैं।
नौसेना ने कहा था- दूसरे एयरक्राफ्ट कैरियरों से कम थे मानसिक स्वास्थ्य मामले
दिलचस्प बात यह है कि कुछ सप्ताह पहले अमेरिकी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने USS Lincoln पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों को लेकर अलग तस्वीर पेश की थी।
अमेरिकी नौसेना के एडमिरल ब्रैड कूपर ने अगस्त में कहा था कि USS Lincoln पर मानसिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों की संख्या नौसेना के दूसरे विमानवाहक पोतों की तुलना में कम थी। लेकिन उन्होंने साथ ही यह भी माना था कि कम संख्या का अर्थ यह नहीं है कि जहाज पर हर चीज सामान्य थी।
कई महीनों तक समुद्र में रहना अपने आप में कठिन परिस्थिति है। परिवार से लंबे समय तक दूर रहना, लगातार ऑपरेशनल ड्यूटी, सीमित निजी स्थान, नींद और आराम की व्यवस्था तथा युद्ध क्षेत्र में काम करने का दबाव अलग-अलग सैनिकों पर अलग प्रभाव डाल सकता है।
इसी संदर्भ में अब सामने आए आठ आत्महत्या प्रयासों ने उस बहस को फिर से तेज कर दिया है कि लंबे समय तक समुद्र में रहने वाले सैन्य कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी किस तरह की जानी चाहिए।
सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने मांगी थी सैनिकों की हालत की जानकारी
डेमोक्रेट सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने USS Lincoln पर तैनात सैनिकों की स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अमेरिकी नौसेना से जानकारी मांगी थी। वह सीनेट की Armed Services Committee की सदस्य हैं और उन्होंने लंबी तैनाती के दौरान सैनिकों की परिस्थितियों से जुड़े कई सवाल पूछे थे।
इन्हीं सवालों के जवाब में कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ ने उन्हें पत्र भेजा। इसी पत्र में पहली बार आधिकारिक तौर पर स्ट्राइक ग्रुप में हुए 8 आत्महत्या प्रयासों का आंकड़ा सामने आया।
गिलिब्रैंड ने इन घटनाओं को लेकर कहा कि इससे USS Lincoln पर तैनात सैनिकों की स्थिति को लेकर उनकी चिंताएं और बढ़ी हैं। दूसरी तरफ अमेरिकी नौसेना ने कहा है कि वह नौसैनिकों के स्वास्थ्य, कल्याण और मनोबल को लेकर प्रतिबद्ध है।
ट्रंप ने लंबी तैनाती की चिंता को किया था खारिज
USS Abraham Lincoln की लंबी तैनाती को लेकर अमेरिकी राजनीति में भी सवाल उठे थे। पिछले महीने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब जहाज पर तैनात सैनिकों की मानसिक स्थिति और लंबे मिशन को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा था कि तैनाती ज्यादा लंबी नहीं हुई है।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से भी जहाज पर खराब परिस्थितियों से जुड़ी खबरों को खारिज किया गया था। रक्षा विभाग की तरफ से ऐसी रिपोर्टों को गलत तरीके से पेश की गई स्थिति बताया गया था।
बाद में सीनेटर गिलिब्रैंड ने ट्रंप और हेगसेथ पर सैनिकों की चिंताओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। अब नौसेना के आधिकारिक पत्र में आठ आत्महत्या प्रयासों का आंकड़ा सामने आने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में है।
पूर्व नौसेना अधिकारी ने 8 मामलों को बताया बेहद चिंताजनक
अमेरिकी नौसेना के पूर्व शीर्ष कानूनी अधिकारी रियर एडमिरल डोनाल्ड जे. ग्यूटर ने आठ आत्महत्या प्रयासों की संख्या को बेहद चिंताजनक बताया है। उनके मुताबिक, इतने मामले यह संकेत देते हैं कि लंबे मिशन के दौरान सैनिकों पर गंभीर तनाव हो सकता है।
हालांकि, किसी भी आत्महत्या प्रयास के पीछे व्यक्तिगत परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। इसलिए केवल आंकड़े के आधार पर हर मामले के कारण को एक जैसा मानना सही नहीं होगा। फिर भी एक ही लंबे सैन्य मिशन से जुड़े आठ प्रयासों का आधिकारिक रूप से सामने आना सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है।
जहाज पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए कई संसाधन मौजूद थे
अमेरिकी नौसेना ने यह भी बताया है कि USS Lincoln की तैनाती के दौरान सैनिकों के लिए मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार संबंधी सहायता उपलब्ध थी। इनमें एक मनोवैज्ञानिक, तीन behavioural health technicians, एक clinical social worker, एक embedded integrated prevention counsellor, एक facility dog और पांच chaplains शामिल थे।
इससे यह स्पष्ट होता है कि नौसेना ने लंबे मिशन के दौरान मानसिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था की थी। लेकिन आठ आत्महत्या प्रयासों के आंकड़े ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि ऐसी सुविधाएं कितनी प्रभावी रहीं और क्या लंबे समय तक चलने वाली युद्ध तैनाती के लिए अतिरिक्त मानसिक स्वास्थ्य उपायों की जरूरत है।
286 दिन बाद थाईलैंड पहुंचा था USS Lincoln, मिला सिर्फ 5 दिन का ब्रेक
सितंबर की शुरुआत में USS Abraham Lincoln थाईलैंड के Laem Chabang Port पहुंचा था। इससे पहले जहाज करीब 286 दिनों तक लगातार समुद्र में रहने के बाद वहां पहुंचा था। क्रू को लगभग पांच दिनों के लिए आराम और मनोरंजन का समय मिला। Reuters ने इसे रिकॉर्ड-सेटिंग तैनाती के बाद crew के लिए rest and recuperation का मौका बताया था।
इसके बाद USS Lincoln दोबारा रवाना हुआ और 19 सितंबर को गुआम पहुंचा। USNI News के अनुसार, गुआम पहुंचने के समय तैनाती की अवधि 302 दिन हो चुकी थी। यह पोत और उसका स्ट्राइक ग्रुप अमेरिका लौटने की दिशा में आगे बढ़ रहा था।
यानी सैनिकों को लंबे समय तक समुद्र में रहने के बाद बीच में केवल सीमित समय के लिए ही जमीन पर उतरने का अवसर मिला। इसी वजह से परिवारों, सांसदों और सैन्य विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा बढ़ी कि इतनी लंबी तैनाती सैनिकों की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर किस स्तर का असर डाल सकती है।
आठ आत्महत्या प्रयासों की खबर ने पुरानी रिपोर्टों को फिर चर्चा में ला दिया
अगस्त में Navy Times और Stars and Stripes जैसी सैन्य प्रकाशनों की रिपोर्टों में USS Lincoln पर सैनिकों की मानसिक स्थिति को लेकर चिंता जताई गई थी। उन रिपोर्टों में समुद्र में कूदने की कोशिशों और लंबे समय तक तैनाती के कारण बढ़ते मानसिक दबाव का जिक्र किया गया था।
उस समय अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और प्रशासन की ओर से जहाज की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आई थी। लेकिन अब कार्यवाहक नौसेना सचिव की ओर से आठ आत्महत्या प्रयासों की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद उन रिपोर्टों पर फिर से ध्यान गया है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि नौसेना द्वारा पुष्टि की गई संख्या पूरे Carrier Strike Group से संबंधित है, केवल USS Abraham Lincoln के मुख्य जहाज के क्रू से नहीं। इसलिए इसे केवल जहाज पर मौजूद लगभग 5,000 लोगों के बीच आठ मामलों के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। आधिकारिक आंकड़े में स्ट्राइक ग्रुप से जुड़े विभिन्न जहाजों और विमानन इकाइयों के कर्मी भी शामिल हैं।
लंबी सैन्य तैनाती का दबाव कितना बड़ा मुद्दा है?
USS Abraham Lincoln का मामला यह सवाल सामने लाता है कि आधुनिक नौसैनिक युद्ध में लंबे समय तक चलने वाली तैनाती के दौरान सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य को किस तरह प्राथमिकता दी जाए। एक एयरक्राफ्ट कैरियर अपने आप में एक विशाल तैरता हुआ सैन्य अड्डा होता है, लेकिन महीनों तक लगातार समुद्र में रहने की परिस्थितियां जमीन पर स्थित सैन्य ठिकाने से अलग होती हैं।
परिवार से दूरी, सीमित निजी जीवन, लगातार ऑपरेशनल तैयारियां, युद्ध संबंधी गतिविधियां और वापसी की अनिश्चितता जैसी परिस्थितियां तनाव को बढ़ा सकती हैं। अमेरिकी नौसेना के अधिकारियों ने भी माना है कि लंबे समय तक समुद्र में रहना आसान नहीं होता और हर व्यक्ति इस दबाव का सामना अलग तरीके से करता है।
इस मामले में सबसे अहम तथ्य यह है कि आठ आत्महत्या प्रयासों की जानकारी खुद अमेरिकी नौसेना के शीर्ष अधिकारी ने दी है। साथ ही नौसेना ने स्पष्ट किया है कि इस तैनाती के दौरान आत्महत्या से कोई मौत नहीं हुई।
USS Abraham Lincoln अब अपनी लंबी तैनाती के अंतिम चरण में है, लेकिन इस मिशन से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य के सवाल इतनी जल्दी खत्म होने वाले नहीं हैं। रिकॉर्ड अवधि तक समुद्र में रहने वाले इस स्ट्राइक ग्रुप के अनुभव अब अमेरिकी नौसेना के लिए भी यह देखने का आधार बन सकते हैं कि भविष्य की लंबी और युद्ध-संबंधी तैनातियों में सैनिकों की मानसिक सेहत, आराम और परिवार से संपर्क को किस तरह बेहतर तरीके से संभाला जाए।

